स्लीपर टिकट पर भी ले सकते हैं AC कोच का मजा! जान लीजिए टीटीई का वो नियम जो आपकी यात्रा को बिना पैनेल्टी बनाएगा 'VVIP'

क्या आपके पास स्लीपर टिकट है और आप AC की ठंडी हवा में सफर करना चाहते हैं? अब टीटीई ने बताया है वो 'सीक्रेट' तरीका जिससे आप कानूनी रूप से अपनी सीट अपग्रेड करा सकते हैं. तो जानें किराए का गणित, पेनाल्टी से बचने के तरीके और ऑटो-अपग्रेड का वो खास नियम, जो बिना जेब ढीली किए आपका सफर आरामदायक बना देगा.
स्लीपर टिकट पर भी ले सकते हैं AC कोच का मजा!  जान लीजिए टीटीई का वो नियम जो आपकी यात्रा को बिना पैनेल्टी बनाएगा 'VVIP'

क्या आपके पास स्लीपर टिकट है और आप AC की ठंडी हवा में सफर करना चाहते हैं? (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)

भारतीय रेलवे को देश की लाइफलाइन कहा जाता है. आज भी हर रोज करोड़ों लोग ट्रेन से सफर करते हैं. लेकिन सफर तब सजा बन जाता है जब उमस भरी गर्मी हो, लंबी वेटिंग हो और आपके पास केवल स्लीपर क्लास की टिकट हो. अक्सर ऐसा होता है कि हम स्लीपर की टिकट बुक तो कर लेते हैं, लेकिन कोच की भीड़ और गर्मी देखकर मन करता है कि काश... काश हम AC कोच में बैठ पाते.

तो क्या आपने कभी सोचा है कि क्या ऐसा मुमकिन हो सकता है? क्या कोई ऐसा कानूनी रास्ता है जिससे आप स्लीपर की टिकट पर AC कोच की ठंडी हवा का आनंद ले सकें? असल में सोशल मीडिया पर अक्सर इसे लेकर बहस छिड़ी रहती है, लेकिन हाल ही में एक सीनियर TTE (Traveling Ticket Examiner) ने इस पर पर्दा उठा दिया है. तो चलिए जानते हैं कि रेलवे के रूल्स इस बारे में क्या कहते हैं और आप कैसे कानूनी तरीके से अपनी सीट अपग्रेड करा सकते हैं.

क्या स्लीपर टिकट वाला यात्री AC में बैठ सकता है?

तो इसका जवाब है 'हां, लेकिन शर्तों के साथ'. असल में यात्रियों को लगता है कि अगर उनके पास स्लीपर की कन्फर्म टिकट है, तो वे चुपचाप जाकर AC कोच की किसी खाली सीट पर बैठ सकते हैं. अगर आप भी ऐसा सोचते हैं, तो पहले अलर्ट मोड ऑन करें. असल में यह रेलवे की भाषा में 'बगैर टिकट यात्रा' की श्रेणी में आ सकता है.

लेकिन टीटीई के मुताबिक, अगर आप स्लीपर क्लास के यात्री हैं और AC कोच में सफर करना चाहते हैं, तो सबसे पहले आपको टीटीई से संपर्क करना होगा. अगर AC कोच में कोई बर्थ (सीट) खाली होगी, तो फिर खुद टीटीई उसे आपको अलॉट कर सकता है. लेकिन इसके लिए आपको 'फेयर डिफरेंस' (किराये का अंतर) देना होगा.

कैसे काम करता है 'फेयर डिफरेंस' का गणित?

इसे एक आसान उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिए आप दिल्ली से पटना जा रहे हैं. स्लीपर क्लास का किराया 500 रुपये है और उसी ट्रेन में AC 3-टियर का किराया 1200 रुपये है. तो अब अगर आप स्लीपर की टिकट पर AC में बैठना चाहते हैं, तो टीटीई आपसे इन दोनों किरायों के बीच का अंतर यानी 700 रुपये लेगा.

जी हां, पैसे वसूलने के बाद टीटीई आपको एक रसीद (EFT - Excess Fare Ticket) काटकर देगा. इसके बाद आप बिना किसी परेशानी के कानूनी रूप से उस AC सीट के मालिक बन जाएंगे. लेकिन याद रहे कि यह सब तभी मुमकिन है जब AC कोच में सीट खाली हो. अगर ट्रेन पूरी तरह फुल है, तो फिर टीटीई चाहकर भी आपकी मदद नहीं कर पाएगा.

बिना पूछे AC में घुसे तो होगी 'जेब ढीली'

कई लोग 'जुगाड़' लगाने के चक्कर में बिना टीटीई को बताए ही सीधे AC कोच में जाकर बैठ जाते हैं. तो उन्हें लगता है कि टीटीई आएगा तो देख लेंगे. लेकिन यह दांव उल्टा पड़ सकता है. असल में टीटीई ने साफ बताया कि अगर कोई यात्री बिना परमिशन या बिना टिकट अपग्रेड कराए AC कोच में पाया जाता है, तो उस पर भारी जुर्माना लग सकता है.

असल में रेलवे के रूल्स के मुताबिक, ऐसी स्थिति में आपसे न सिर्फ किराये का अंतर वसूला जाएगा, बल्कि रेलवे आपसे कम से कम 250 रुपये या उससे ज्यादा का जुर्माना भी ले सकता है. इतना ही नहीं, टीटीई आपको अगले स्टेशन पर उतारकर वापस स्लीपर कोच में भेज सकता है.

TTE के पास होता है 'विशेषाधिकार'

एक बात आप समझ लीजिए कि ट्रेन में टीटीई केवल टिकट चेक करने वाला अधिकारी नहीं होता, बल्कि वह उस चलती ट्रेन का मैनेजर भी होता है. जी हां टीटीई ने बताया कि कई बार मानवीय आधार पर भी फैसले लिए जाते हैं. तो जैसे कि अगर कोई बुजुर्ग व्यक्ति है, कोई बीमार है या किसी महिला के साथ छोटा बच्चा है और स्लीपर में बहुत ज्यादा भीड़ या गर्मी है, तो टीटीई से रिक्वेस्ट करने पर वह प्राथमिकता के आधार पर खाली सीट मुहैया करा सकता है. हालांकि, इसके लिए भी रसीद कटवाना और अतिरिक्त किराया देना अनिवार्य है.

ऑटो-अपग्रेडेशन: रेलवे का वो 'वरदान' जिसे आप भूल जाते हैं

अगर आप टीटीई के चक्करों में नहीं पड़ना चाहते, तो टिकट बुक करते टाइम एक छोटा सा 'चेकबॉक्स' आपकी किस्मत बदल सकता है. IRCTC की वेबसाइट या ऐप से टिकट बुक करते समय 'Consider for Auto Upgradation' का ऑप्शन आता है.

अगर आप इसे टिक करते हैं, तो रेलवे चार्ट बनते टाइम अगर AC कोच में सीटें खाली रहती हैं, तो स्लीपर वाले यात्रियों को फ्री में AC में प्रमोट कर सकता है. इसके लिए आपको एक रुपया भी एक्स्ट्रा नहीं देना होता. कई बार लोग इस ऑप्शन को छोड़ देते हैं, जबकि यह AC में सफर करने का सबसे सस्ता और बेहतरीन तरीका है.

सोशल मीडिया पर क्यों छिड़ी है जंग?

जी हां वैसे जब से टीटीई की यह जानकारी वायरल हुई है, सोशल मीडिया पर लोग अपनी-अपनी राय रख रहे हैं. कुछ यात्रियों का कहना है कि टीटीई अक्सर खाली सीटें होने के बावजूद पैसे बनाने के चक्कर में मना कर देते हैं. वहीं, कुछ का कहना है कि यह नियम आम लोगों के लिए बहुत फायदेमंद है, खासकर तब जब अचानक मौसम खराब हो जाए या तबीयत बिगड़ जाए.

इन बातों का रखें खास ख्याल

  • हमेशा खुद जाकर सीट पर न बैठें, पहले टीटीई को ढूंढें और अपनी स्थिति बताएं.
  • अगर आप किराये का अंतर दे रहे हैं, तो टीटीई से EFT रसीद जरूर मांगें. बिना रसीद के पैसे देना रिश्वत की श्रेणी में आता है.
  • आज के डिजिटल दौर में आप IRCTC ऐप पर 'Chart Vacancy' के जरिए खुद देख सकते हैं कि किस कोच में कौन सी सीट खाली है. इससे टीटीई आपको गुमराह नहीं कर पाएगा.
  • टीटीई से हमेशा तमीज से बात करें. नियमों के मुताबिक सीट देना या न देना काफी हद तक उपलब्धता और टीटीई के विवेक पर निर्भर करता है.

आपके काम की बात

भारतीय रेलवे में स्लीपर से AC में जाना नामुमकिन नहीं है, बस आपको सही रास्ता पता होना चाहिए. शॉर्टकट अपनाने के बजाय रेलवे के नियमों का पालन करें, ताकि आपका सफर यादगार बने, न कि जुर्माने वाला बोझ. अगली बार जब आप स्लीपर में गर्मी से परेशान हों, तो जेब में कुछ एक्स्ट्रा पैसे और टीटीई से बात करने की हिम्मत रखिए, शायद आपका सफर 'ठंडा-ठंडा कूल-कूल' हो जाए

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