दिल्ली, मुंबई-कोलकाता के Rail यात्री सावधान! बिहार में रेल पटरी पानी में डूबी

बिहार (Bihar) में बाढ़ (Flood) से लाखों लोग बेघर हो गए हैं. 13 जिले बाढ़ झेल रहे हैं. कई जगह रेल प‍टरियां पानी में डूब गई हैं.
दिल्ली, मुंबई-कोलकाता के Rail यात्री सावधान! बिहार में रेल पटरी पानी में डूबी

पटरी डूबने से दिल्ली, मुंबई या कोलकाता से संपर्क कट गया है. (Zee News)

बिहार (Bihar) में बाढ़ (Flood) से लाखों लोग बेघर हो गए हैं. 13 जिले बाढ़ झेल रहे हैं. कई जगह रेल प‍टरियां पानी में डूब गई हैं. इससे दिल्ली, मुंबई या कोलकाता से लोगों का ट्रेन से दरभंगा, मधुबनी, जयनगर, झंझारपुर और निर्मली जिले में पहुंचना मुश्किल हो गया है. सबसे ज्‍यादा संकट समस्तीपुर-दरभंगा रेल रूट पर है, जहां पटरी बाढ़ के पानी में डूब गई है. इस रूट पर ट्रेनों (Train) को रोक दिया गया है.

13 जिलों में घुसा पानी
बिहार के आपदा प्रबंधन विभाग के 1 अधिकारी ने बताया कि राज्य के 13 जिले- शिवहर, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, पूर्वी चंपारण, मधुबनी, दरभंगा, सहरसा, सुपौल, किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार और पश्चिम चंपारण में बाढ़ का पानी घुस गया है. बाढ़ से अब तक 127 लोगों की मौत हुई है, जबकि 85 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हुए हैं. समस्तीपुर-दरभंगा रेल पटरी पर बाढ़ का पानी आने से ट्रेनों को रोक दिया गया है.

10 ट्रेनें कैंसिल
पूर्व मध्य रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी राजेश कुमार ने बताया, "समस्तीपुर रेलमंडल के हायाघाट स्टेशन के पास पुल नंबर 16 पर बाढ़ का पानी आ गया. इस वजह से 10 ट्रेनों को कैंसिल कर दिया गया है, जबकि 12 ट्रेनों को डाइवर्ट किया गया है."

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नदियां उफान पर
जल संसाधन विभाग के मुताबिक, कई प्रमुख नदियों के जलस्तर में कमी आई है, लेकिन अभी भी कई स्थानों पर नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं. विभाग के अनुसार, बागमती ढेंग, डुबाधार, बेनीबाद सहित कई स्थानों पर खतरे के स्थान से ऊपर बह रही हैं जबकि बूढ़ी गंडक रोसड़ा रेल पुल के पास खतरे के निशान से ऊपर बह रही है. इसके अलावा कमला-बलान, अधवारा समूह की नदियां और महानंदा भी कई स्थानों पर खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं.

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नेपाल से संपर्क टूटा
सीतामढ़ी के कई गांवों व कई मोहल्ले अब भी बाढ़ की चपेट में हैं. जिले का पूर्वी चंपारण, मधुबनी, शिवहर और नेपाल से भी सड़क संपर्क भंग रहा. राहत की बात यह है कि कुछ क्षेत्रों में नदियों के जलस्तर में कमी आई है, लेकिन बाढ़ प्रभावित इलाकों की कई सड़कें अभी भी पानी से लबालब भरी हैं और सभी खेत जलमग्न हैं.

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