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रेलवे स्टेशनों पर पैसेंजर्स को एक बेहतरीन एक्सपीरिएंस देने और उनकी सभी सुविधाओं का ख्याल रखने के लिए रेलवे लगातार काम कर रही है. लेकिन क्या हो अगर हम आपको बताएं कि रेलवे अब पैसेंजर्स के लिए 'चूहों' की तलाश में निकली है. यही नहीं, इसके लिए रेलवे 2 खास तरह के कैमरों का भी इस्तेमाल कर रही है. जी हां, सेंट्रल रेलवे ने पैसेंजर्स की सुविधा के लिए ये कदम उठाया है. आइए जानते हैं इसके बारे में सबकुछ.
दरअसल, रेलवे स्टेशनों पर कई बार ये चूहे ऐसी जगहों पर जाकर मर जाते हैं, जहां इन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है. ऐसे में इन जगहों पर कई दिनों तक सड़ने के कारण इनसे भयानक दुर्गंध आने लगती है. जिसके कारण पैसेंजर्स और रेलवे स्टेशन पर मौजूद स्टाफ को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता है. इस परेशानी से निजात दिलाने के लिए सेंट्रल रेलवे ने दो बोरोस्कोपिक कैमरों से मरे हुए चूहों की तलाश शुरू कर दी है. इन विशेष तरह के कैमरों में स्क्रीन आपके हाथ में होती है, लेकिन कैमरे का डक्ट छोटी और न पहुंच वाली जगहों में जाता है.
बता दें कि छत वाले एरिया को स्कैन करने के लिए दो बोरोस्कोपिक कैमरों की व्यवस्था की गई है, जो साधारण आंखों से नहीं देखा जा सकता था. पूरे क्षेत्र को चरणबद्ध तरीके से स्कैन किया गया और इन कैमरों की मदद से कई मृत चूहे पाए गए. इस प्रकार पहचाने गए छत के पैनल को तोड़ा गया और मृत चूहों को हटाया गया.
उपनगरीय लॉबी के शौचालय और वाशरूम क्षेत्र के पास झूठी छत के पीछे कुछ मृत चूहे पाए गए. मृत चूहों को तुरंत हटाकर उनका निपटान कर दिया गया. मृत चूहे के नमूने और पानी के नमूने को भी परीक्षण के लिए प्रयोगशाला में भेजा गया.
सफाई के इस काम को देखते हुए इस एरिया में काम करने वाले मोटरमैन, ट्रेन मैनेजर और चालक दल नियंत्रण कर्मचारियों के पूरे उपनगरीय दल को अस्थायी रूप से स्थानांतरित कर दिया गया. उपनगरीय लॉबी के मोटरमैन और ट्रेन मैनेजरों के लिए बैठने की व्यवस्था लॉबी के सामने खुली जगह के पास की गई थी.