बुलेट ट्रेन पर आया बड़ा अपडेट, इस साल पटरी पर दौड़ेगी, BEML तैयार कर रही 280 किमी प्रति घंटा वाली B28 ट्रेन

मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर बड़ा अपडेट आया है. जापानी तकनीक में आ रही देरी के कारण अब B28 सीरीज की स्वदेशी बुलेट ट्रेन पटरी पर दौड़ेगी. जानिए क्या कहती है संसदीय समिति की रिपोर्ट.
बुलेट ट्रेन पर आया बड़ा अपडेट, इस साल पटरी पर दौड़ेगी, BEML तैयार कर रही 280 किमी प्रति घंटा वाली B28 ट्रेन

देशभर के रेल यात्री बुलेट ट्रेन का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. अब भारतीय रेलवे की सबसे महत्वाकांक्षी मुंबई-अहमदाबाद हाई स्पीड रेल (बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट) पर बड़ा अपडेट आया है. रेलवे पर संसद की स्थायी समिति की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई से अहमदाबाद के बीच शुरुआत में स्वदेशी रूप से विकसित B28 सीरीज की बुलेट ट्रैन दौड़ेगी. इसका निर्माण डिफेंस पीएसयू BEML द्वारा किया जा रहा है. स्टैंडिंग कमेटी ने साफ किया है कि रेलवे का टारगेट अगस्त 2027 में गुजरात के सूरत से वापी के बीच 97किमी के पहले सेक्शन पर इन मेड इंड इंडिया ट्रेनों का कमर्शियल ऑपरेशन शुरू करना है.

जापानी तकनीक में हो रही है देरी

रेलवे की संसदीय समिति की रिपोर्ट के मुताबिक, बुलेट ट्रेन में इस्तेमाल होने वाली जपानी तकनीक में देरी हो रही है. ऐसे में फैसला लिया गय है कि ऑपरेशन्स की शुरुआत भारत में निर्मित B28 से की जाएगी.

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280 किमी प्रति घंटा की रफ्तार से दौड़ेगी

  • स्वदेशी ट्रेन 280 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से दौड़ने में सक्षम होंगी.
  • स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के मुताबिक 280 किमी प्रति घंटा की डिजाइन स्पीड वाली 2 स्वदेशी ट्रेनों को बनाया जा रहा है.
  • पहला ट्रेन सेट 2027 की पहली तक तैयार होने की उम्मीद है. साथ ही सुरक्षित संचालन के लिए ETCS लेवल 2 पर आधारित सिग्नलिंग सिस्टम का टेंडर दिया जा रहा है.
  • सूरत से वापी के 97 किलोमीटर के हिस्से पर अगस्त 2027 में ट्रेन दौड़ाने के लिए फिलहाल कोशिश जारी है.

प्रोजेक्ट की बढ़ी लागत की समीक्षा

रेलवे स्टैंडिंग कमेटी ने बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट की लागत बढ़ने के कारणों का डीटेल से रिव्यू किया है. दिसंबर 2015 में इस प्रोजेक्ट की अनुमानित लागत 97,636 करोड़ रुपए मंजूर की गई थी लेकिन, अब इसके संशोधित अनुमान को मंजूरी का इंतजार है.

इन कारणों से बढ़ी प्रोजेक्ट की लागत

  • प्रोजेक्ट के लागात बढ़ने के कारण टैक्स और सेस (29,330 करोड़ रुपए), स्वदेशी रोलिंग स्टॉक और सिग्नलिंग सिस्टम (16500 करोड़ रुपए), महंगाई (19084 करोड़ रुपए) हैं.
  • समिति के मुताबिक शहरी क्षेत्रों में जमीन अधिग्रहण और पुनर्वास की बढ़ी हुई लागत (16,695 करोड़ रुपए) के कारण भी प्रोजेक्ट की कॉस्ट में इजाफा हुआ है.
  • जमीन अधिग्रहण की अड़चनों को कम करने और सुरक्षा के लिहाज से पूरे ट्रैक एलिवेटेड बनाने के फैसले से भी प्रोजेक्ट की लागत में इजाफा हुआ है.

प्रोजेक्ट को तेज करने के लिए दी ये सिफारिशें

रेलवे स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट में समिति ने प्रोजेक्ट में देरी और लागत के ज्यादा बढ़ने से रोकने के लिए अलग-अलग एजेंसियों बीच कोर्डिनेशन स्थापित करने और यूटिलिटी शिफ्टिंग जैसे कामों को पूरा करने की सिफारिश की है.

कमेटी ने दिए ये सुझाव

  • कमेटी ने सुझाव दिया है कि रेलवे को उन देशों के सफल हाई-स्पीड रेल नेटवर्क्स की डीटेल स्टडी करनी चाहिए. जहां से यह पहले से ज्यादा कुशल तरीके से चल सके.
  • बजट 2026-26 में घोषित फ्यूचर के लिए दिल्ली-वाराणसी, मुंबई-पुणे आदि जैस नए हाई स्पीड कोरिडोर्स क लिए कमेटी ने जोर देकर कहा है कि किसी भी प्रोजेक्ट को मंजूरी देने से पहले ही जमीन अधिग्रहण और वैधानिक मंजूरी ली जानी चाहिए.
  • स्टैंडिंग कमेटी ने वडोदरा में स्थित हाई स्पीड रेल ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट में ट्रेनिंग प्रोग्राम्स का विस्तार कर स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने की भी सिफारिश की है.

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