ऑफिस की सैलरी से लेकर मैटरनिटी तक, हर वर्किंग लेडी के ये हैं 6 हक, इनके लिए HR भी नहीं कर सकती मना

अब ऑफिस में महिलाओं की मर्जी चलेगी! नए लेबर कोड में नाइट शिफ्ट के लिए पक्की सुरक्षा, 'समान काम-समान वेतन' का कानूनी हक और मैटरनिटी लीव के बाद 'वर्क फ्रॉम होम' जैसे कई धाकड़ फायदे मिलने वाले हैं.ऑफिस में बच्चों के लिए क्रेच की सुविधा भी अब अनिवार्य होगी. जानें ये नए नियम कैसे बनाएंगे आपका करियर और भी शानदार.
ऑफिस की सैलरी से लेकर मैटरनिटी तक, हर वर्किंग लेडी के ये हैं 6 हक, इनके लिए HR भी नहीं कर सकती मना

नए लेबर कोड के लागू होने के बाद वर्किंग महिलाओं की जिंदगी में वर्किंग लाइफ में काफी चेंज हुआ है. (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt) 

वो दिन गए जब महिलाओं के लिए करियर और परिवार के बीच किसी एक को चुनना एक मजबूरी होती थी. अब टाइम बदल चुका है, और टाइम के साथ बदल गए हैं ऑफिस के भी महिलाओं को लेकर रूल्स. सरकार ने 'नए लेबर कोड' का जो पिटारा हाल ही में खोला है, उसने कामकाजी महिलाओं के हाथों में ऐसी ताकत थमा दी है, जिसकी कल्पना शायद पहले कभी नहीं की गई थी.

जी हां 'नए लेबर कोड' में महिलाओं के लिए कुछ ऐसे जबरदस्त बदलाव किए हैं, जो न केवल उनकी सेफ्टी बढ़ाएंगे, बल्कि उन्हें बराबरी का हक भी दिलाएंगे. तो अब ऑफिस जाना हो या घर से काम करना, महिलाओं के लिए नियम पहले से कहीं ज्यादा आसान और फायदेमंद होने वाले हैं.

ऐसे में आइए समझते हैं कि नए लेबर कोड के लागू होने के बाद वर्किंग महिलाओं की जिंदगी में क्या बड़े बदलाव आने वाले हैं.

1. नाइट शिफ्ट अब डर नहीं, बल्कि आजादी!

पहले के टाइम में शाम 7 बजे के बाद महिलाओं का ऑफिस में रुकना एक बड़ा 'इशू' माना जाता था. लेकिन नए लेबर कोड ने इसको बदल दिया है. अब महिलाएं अपनी मर्जी से रात 7 बजे के बाद और सुबह 6 बजे से पहले भी बेधड़क काम कर सकेंगी, यानी कि महिलाएं आसानी से नाइट शिफ्ट कर सकती हैं. लेकिन ट्विस्ट ये है कि बॉस आपको जबरदस्ती नहीं रोक सकता. आपकी मर्जी होगी, तभी काम होगा.इसके साथ ही, कंपनी की यह जिम्मेदारी होगी कि वह महिलाओं के लिए सुरक्षा, लाइट और आने-जाने के लिए ट्रांसपोर्ट की पक्की व्यवस्था करे.

2. सैलरी में भेदभाव की नो एंट्री

आपको बता दें कि अक्सर देखा जाता है कि एक ही जैसा काम करने के बावजूद महिलाओं को पुरुषों से कम सैलरी दी जाती है. नया 'वेतन कोड' इसे पूरी तरह खत्म कर देगा.तो अब लिंग के आधार पर सैलरी या भर्ती में कोई भेदभाव नहीं किया जा सकेगा.'इक्वल पे फॉर इक्वल वर्क' अब केवल एक नारा नहीं, बल्कि कानूनी अधिकार होगा.


3.मातृत्व अवकाश (Maternity Leave) और 'वर्क फ्रॉम होम' का हक

महिलाओं के लिए सबसे बड़ा डर होता था कि मां बनने के बाद उनकी नौकरी का क्या होगा? नए लेबर कोड ने इसका पक्का जुगाड़ कर दिया है. 26 हफ्ते की छुट्टी तो मिलेगी ही, लेकिन असली गेम चेंजर है वर्क फ्रॉम होम. अगर आपके काम की प्रोफाइल ऐसी है कि वो घर से हो सकता है, तो आप अपनी कंपनी से हाथ मिलाकर मैटरनिटी लीव के बाद भी घर से काम जारी रख सकती हैं.

जी हां मैंटरनिटी लीव खत्म होने के बाद भी महिलाएं कंपनी के साथ मिलकर वर्क फ्रॉम होम (WFH) का विकल्प चुन सकती हैं.इसके अलावा, जो महिलाएं बच्चा गोद लेती हैं या सरोगेसी के जरिए मां बनती हैं, उन्हें भी 12 हफ्ते की छुट्टी का हक मिलेगा.


4. बच्चा भी पास, नौकरी भी खास!

अब आपको ऑफिस में इस बात की टेंशन नहीं होगी कि पीछे घर पर बच्चा रो रहा होगा. जिस ऑफिस में 50 से ज्यादा लोग हैं, वहां 'क्रेच'यानी बच्चों के लिए प्ले-एरिया बनाना अब कंपनी की मजबूरी है. कामकाजी मांएं दिन में 4 बार अपने बच्चे से मिलने जा सकती हैं. यानी अब आप अपने करियर की सीढ़ियां भी चढ़ेंगी और बच्चे की परवरिश भी साथ-साथ होगी.

5. फैसलों में महिलाओं की बढ़ेगी ताकत

अक्सर ऑफिस की कमेटियों में मेल का दबदबा रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा.असल में शिकायतों को सुनने वाली कमेटी (GRC) और सरकारी बोर्ड्स में अब महिलाओं की उतनी ही भागीदारी होगी जितने वहां कर्मचारी हैं. यानी कि आपके साथ अगर कुछ गलत होता है, तो आपकी बात सुनने वाली भी एक महिला ही होगी. इससे वर्कप्लेस हैरेसमेंट जैसे मामलों पर लगाम लगेगी और महिलाएं खुद को ज्यादा सुरक्षित महसूस करेंगी.

6. मेडिकल बोनस और आसान नियम

अगर कंपनी महिला को प्री-नेटल और पोस्ट-नेटल चेकअप की मुफ्त सुविधा नहीं दे रही है, तो महिला 3,500 रुपये के मेडिकल बोनस की हकदार होगी.इसके साथ ही, अब मैटरनिटी बेनिफिट के लिए कागजी कार्रवाई को आसान बना दिया गया है. तो अब सिर्फ डॉक्टर ही नहीं, बल्कि आशा (ASHA) वर्कर या मिडवाइफ का सर्टिफिकेट भी मान्य होगा

एचआर नहीं करेग मना?

नए लेबर कोड में महिलाओं को जो हक दिए गए हैं, वो हर कंपनी को उनको देना होगा, इस हक या कहें कि सुविधा को देने के लिए एचआई भी मना नहीं कर सकता है. महिलाओं को सुरक्षा और सुविधा के लिए नए वेज कोड में महिलाओं का खास ध्यान रखा गया है.

आपके काम की बात

सरकार के नए लेबर कोड्स का सीधा मकसद महिलाओं को एक सुरक्षित और बराबरी वाला माहौल देना है. चाहे वो वेतन की बात हो, सुरक्षा की या फिर बच्चों की देखभाल की, नए नियम महिलाओं को सशक्त बनाने के लिए तैयार किए गए हैं.इससे न सिर्फ वर्कफोर्स में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी, बल्कि वे देश की आर्थिक तरक्की में और भी ज्यादा जोश के साथ योगदान दे सकेंगी

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 अगर मैं नाइट शिफ्ट के लिए मना कर दूं, तो क्या नौकरी जा सकती है?

नाइट शिफ्ट के लिए आपकी लिखित मंजूरी जरूरी है,अगर आप मना करती हैं, तो कंपनी आपको नौकरी से नहीं निकाल सकती.

Q2 नाइट शिफ्ट में घर आने-जाने का खर्चा कौन देगा?

रात में काम करने वाली महिलाओं को सुरक्षित घर छोड़ने और लाने (Pick & Drop) की पूरी जिम्मेदारी और खर्चा कंपनी का ही होगा.

Q3 क्या छोटी कंपनियों में भी बच्चों के लिए 'क्रेच' की सुविधा मिलेगी?

यह नियम सिर्फ उन ऑफिसों के लिए अनिवार्य है जहां 50 या उससे ज्यादा कर्मचारी काम करते हैं, छोटी कंपनियों के लिए यह जरूरी नहीं है.

Q4 अगर पुरुषों से कम सैलरी मिले, तो शिकायत कहां करें?

आप अपने ऑफिस की इंटरनल कमेटी या सीधे लेबर कमिश्नर ऑफिस में शिकायत कर सकती हैं,भेदभाव पर कंपनी पर भारी जुर्माना लगेगा

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