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हर कोई चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद की ज़िंदगी सुकून भरी हो, जहां पैसों की टेंशन न हो और आगे की लाइफ सुकून से बीते. लेकिन ऐसा तभी मुमकिन है जब आप जवानी के दिनों से ही अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग (Retirement Planning) को सीरियसली लेना शुरू करें. इसके लिए सिर्फ सेविंग अकाउंट या फिक्स्ड डिपॉजिट से काम नहीं चलेगा क्योंकि महंगाई हर साल आपकी बचत की वैल्यू कम कर देती है. ऐसे में मार्केट बेस्ड NPS (National Pension System) जैसी स्कीम एक ऐसा भरोसेमंद विकल्प बन सकती है. ये स्कीम न सिर्फ लंबी अवधि में बड़ी पूंजी भी तैयार कर सकती है, बल्कि इसके और भी तमाम फायदे हैं. यहां जानिए वो 4 ठोस वजहें जो इसे आपके पोर्टफोलियो के लिए जरूरी बनाती हैं.
ये NPS का सबसे बड़ा और सबसे यूनिक फायदा है, जो आपको किसी और स्कीम में नहीं मिलता. हम सब सेक्शन 80C के तहत ₹1.5 लाख तक की टैक्स छूट के बारे में जानते हैं, जिसमें PPF, EPF, ELSS, बीमा आदि सब कुछ आ जाता है.
NPS का जादू: NPS आपको सेक्शन 80CCD(1B) के तहत ₹50,000 की अतिरिक्त (Additional) टैक्स छूट देता है. यह छूट ₹1.5 लाख की 80C की लिमिट के ऊपर और अलग से मिलती है.
PPF और FD जैसे पारंपरिक विकल्प आपको सिर्फ एक निश्चित और सुरक्षित रिटर्न देते हैं, जो अक्सर लंबी अवधि में महंगाई को भी मात नहीं दे पाता. यहीं पर NPS बाजी मार ले जाता है.
इक्विटी में निवेश का मौका: NPS आपको अपना पैसा इक्विटी (शेयर बाजार) में लगाने का मौका देता है, वो भी 75% तक.
फायदा: लंबी अवधि में, इक्विटी ने हमेशा डेट (FD, बॉन्ड) से कहीं ज्यादा रिटर्न दिया है. 15-20 साल जैसी लंबी अवधि में NPS का इक्विटी वाला हिस्सा आपको आसानी से 10-12% या उससे भी ज्यादा का औसत सालाना रिटर्न कमाकर दे सकता है, जबकि PPF 7-8% के बीच ही सीमित रह जाता है. ये 3-4% का अतिरिक्त रिटर्न लंबी अवधि में आपके फाइनल कॉर्पस को कई लाखों या करोड़ों से बढ़ा सकता है.
जब आप म्यूचुअल फंड या ULIP में निवेश करते हैं, तो आपको 'एक्सपेंस रेशियो' या 'फंड मैनेजमेंट चार्ज' देना पड़ता है, जो 1% से 2% तक हो सकता है. NPS की लागत: NPS दुनिया की सबसे कम लागत वाली पेंशन योजनाओं में से एक है. कम लागत का सीधा मतलब है कि आपके हाथ में ज्यादा रिटर्न आएगा. लंबी अवधि में, यह 1-1.5% का मामूली दिखने वाला फर्क भी आपके फाइनल फंड में लाखों का अंतर पैदा कर देता है.
NPS का मुख्य उद्देश्य ही आपको रिटायरमेंट के बाद एक रेगुलर इनकम देना है. 60 साल की उम्र में, आपको अपने कुल जमा फंड का एक हिस्स रिटायरमेंट कॉर्पस के तौर पर मिलता है, जबकि एक हिस्से से आप एन्युटी खरीदते हैं. इसी एन्युटी प्लान से आपको हर महीने पेंशन मिलती है. ऐसे में आपको अपनी ओल्ड ऐज में किसी पर निर्भर नहीं रहना पड़ता.
A1. भारत का कोई भी नागरिक उम्र 18 वर्ष से लेकर 60 वर्ष तक NPS खाता खोल सकता है.
A2. NPS में दो तरह के अकाउंट होते हैं - टियर-I (Tier-I) और टियर-II (Tier-II). टियर-I मुख्य रिटायरमेंट अकाउंट है, जिसमें टैक्स बेनिफिट मिलता है और पैसा 60 साल तक लॉक रहता है. टियर-II एक स्वैच्छिक सेविंग अकाउंट की तरह है, जिसमें कोई लॉक-इन नहीं होता, लेकिन इस पर कोई टैक्स बेनिफिट भी नहीं मिलता.
A3. नहीं, NPS ज्यादातर लंबी अवधि के लिए है और रिटर्न मार्केट-लिंक्ड है (लगभग 9-12% प्रति वर्ष औसतन). बाजार-उतार-चढ़ाव हो सकते हैं.
A4. नहीं, कोई भी भारतीय नागरिक NPS में निवेश कर सकता है, चाहे वो सरकारी कर्मचारी हो, प्राइवेट कर्मचारी हो या अपना बिजनेस करता हो.