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न्यू टैक्स रिजीम के तहत अब 12.75 लाख रुपए तक की कमाई पर कोई टैक्स नहीं देने की जरूरत नहीं है. अगर आपकी भी आमदनी इससे कम है तो टैक्स देनदारी नहीं बनती है. लेकिन ये सोचकर अगर आप ITR भी फाइल नहीं कर रहे, तो आप अपना नुकसान करा रहे हैं. फाइनेंशियल एडवायजर मानते हैं कि आप टैक्स के दायरे में आएं या फिर न आएं, लेकिन आपको ITR फाइल जरूर करना चाहिए. ITR फाइल न करना एक बड़ी भूल हो सकती है, क्योंकि इसके कई ऐसे फायदे हैं जो आपको भविष्य में बहुत काम आएंगे.
ITR आपकी आमदनी का सबसे मजबूत और सरकारी मान्यता प्राप्त सबूत होता है. जब आप लोन (होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन) के लिए अप्लाई करते हैं, तो बैंक सबसे पहले आपसे ITR मांगते हैं. इसके बिना लोन मिलना मुश्किल हो सकता है.
कई बार ऐसा होता है कि आपकी सैलरी, बैंक के फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) पर मिले ब्याज या किसी अन्य आमदनी पर TDS (Tax Deducted at Source) कट जाता है. अगर आपकी कुल इनकम टैक्स के दायरे में नहीं आती है, तो यह कटा हुआ TDS आपको तभी वापस मिलेगा जब आप ITR फाइल करेंगे.
कई देशों की एम्बेसी वीजा एप्लीकेशन के साथ पिछले 2-3 सालों का ITR मांगती हैं. ये आपकी फाइनेंशियल कंडीशन को बताता है. ITR न होने पर वीजा रिजेक्ट भी हो सकता है.
अच्छी क्रेडिट लिमिट वाला क्रेडिट कार्ड लेने या बड़ी बीमा पॉलिसी खरीदने में भी ITR आपकी मदद करता है. ये आपकी इनकम प्रूफ का काम करता है. कंपनियां आपकी इनकम देखकर ही तमाम सुविधाएं देती हैं.
नियमित रूप से ITR फाइल करने से आप इनकम टैक्स विभाग की नजर में एक जिम्मेदार नागरिक बनते हैं. इससे भविष्य में किसी भी तरह की जांच या नोटिस आने की संभावना कम हो जाती है.
VIDEO: 10 Transaction पर Income Tax की नजर!
अगर आप कोई बड़ी संपत्ति खरीदते हैं या कोई बड़ा निवेश करते हैं, तो इनकम टैक्स विभाग आपसे आमदनी का स्रोत पूछ सकता है. ऐसे में फाइल किया गया ITR आपके लेनदेन को सही ठहराने में मदद करता है.