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जब भी कोई बड़ी सेल (Sale) आती है, जैसे कि अमेजन का ग्रेट इंडियन फेस्टिवल (Great Indian Festival) या फ्लिपकार्ट की बिग बिलियन डेज़ (The Big Billion Days), तो वहां हर प्रोडक्ट पर आपको 99 या 499 जैसे प्राइस टैग नजर आते हैं. आपने कभी सोचा है कि आखिर इन कंपनियों को 1 रुपये कम रखने से क्या फायदा होता है? दरअसल, ये सब एक बड़ी मार्केटिंग स्ट्रेटेजी का हिस्सा है.
मार्केटिंग की दुनिया में इसे साइकोलॉजिकल प्राइसिंग स्ट्रेटेजी (Psychological Pricing Strategy) कहा जाता है. कंपनियां जानती हैं कि ग्राहक दिमाग से ज्यादा दिल से खरीदारी करते हैं और ऐसे छोटे-छोटे ट्रिक्स उनकी जेब पर सीधा असर डालते हैं.
इस स्ट्रेटेजी का मकसद ग्राहकों को ये महसूस कराना होता है कि प्रोडक्ट सस्ता है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी प्रोडक्ट की कीमत 499 रुपये रखी जाती है, तो ग्राहक इसे 500 रुपये के बजाय 400 रुपये के करीब समझता है. हकीकत में यह 500 रुपये से सिर्फ 1 रुपये कम और 400 रुपये से 99 रुपये ज्यादा होता है.
शिकागो यूनिवर्सिटी और एमआईटी में हुए एक्सपेरिमेंट ने ये साबित किया है कि 9 पर खत्म होने वाली कीमतें ज्यादा आकर्षक लगती हैं. रिसर्च में जब महिलाओं के कपड़े 34, 39 और 44 डॉलर में बेचे गए, तो सबसे ज्यादा डिमांड 39 डॉलर वाले कपड़ों की रही. इससे साफ है कि ये स्ट्रेटेजी सिर्फ थ्योरी नहीं, बल्कि असली बिक्री पर असर डालती है.
आपने भी जब किसी ई-कॉमर्स वेबसाइट को खोला होगा, तो पाया होगा कि वहां लगभग हर प्रोडक्ट की कीमत 9 पर खत्म होती है. जैसे 999 रुपये का प्रोडक्ट आपको 900 के करीब लगता है, जबकि असल में वह 1000 रुपये से सिर्फ 1 रुपये कम है. यही वजह है कि कंपनियां इस टेक्निक का जमकर इस्तेमाल करती हैं.
अगर ऑफलाइन स्टोर्स की बात करें तो 1 रुपये कम रखने से सिर्फ मनोवैज्ञानिक फायदा ही नहीं होता, बल्कि दुकानदार को भी फायदा होता है. अगर ग्राहक कैश पेमेंट करता है, तो अक्सर लोग अपना 1 रुपया वापस लेना छोड़ देते हैं. यह पैसा सीधे दुकानदार की जेब में चला जाता है. हालांकि, डिजिटल पेमेंट (Digital Payment) बढ़ने के बाद यह फायदा कम हो गया है.
सेल (Sale) में 1 रुपये का खेल सिर्फ दिखावे का हिस्सा नहीं, बल्कि एक सोची-समझी साइकोलॉजिकल प्राइसिंग स्ट्रेटेजी है. कंपनियां जानती हैं कि ग्राहक भावनाओं के आधार पर खरीदारी करते हैं और यही कारण है कि 499 या 999 जैसे प्राइस टैग हमेशा बिकते हैं. इसलिए अगली बार जब आप शॉपिंग करें, तो 1 रुपये का यह खेल जरूर याद रखें.
यह एक मार्केटिंग स्ट्रेटेजी है जिसमें प्रोडक्ट की कीमत पूरी संख्या से 1 कम रखी जाती है, ताकि वह सस्ता लगे.
क्योंकि ग्राहक को वह कीमत अगले पूरे अंक से दूर और पिछले अंक के करीब लगती है.
हां, शिकागो यूनिवर्सिटी और एमआईटी की स्टडी में यह साबित हुआ है.
नहीं, ऑफलाइन दुकानों में भी यही तरीका अपनाया जाता है.
नहीं, यह सिर्फ एक मनोवैज्ञानिक भ्रम होता है.
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