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आर्थिक मंदी (Recession) का दौर किसी भी अर्थव्यवस्था और इंसान के लिए एक चुनौती भरा समय होता है. यह वह समय होता है जब नौकरियां जा सकती हैं, बिजनेस को नुकसान हो सकता है, और बाजार में अनिश्चितता का माहौल रहता है. ऐसे में, सही फाइनेंशियल फैसले लेना और कुछ गलतियों से बचना बहुत जरूरी हो जाता है, ताकि आप इस मुश्किल टाइम को पार कर सकें और अपनी आर्थिक स्थिति को सेफ रख सकें.तो समझेंगे कि कैसे रिसेशन के दौरान कुछ ऐसी गलतियां हैं जिनसे हर हाल में बचना चाहिए और 5 चीजें कौन सी हैं जो आपको मंदी के दौरान भूलकर भी नहीं करनी चाहिए.
क्यों नहीं करना चाहिए: जब मार्केट गिरता है, तो स्वाभाविक रूप से हर किसी को लगता है कि कहीं आपका पैसा डूब ना जाए. तो अगर मार्केट में पैसा लगाया है तो ऐसे लोग अक्सर घबराकर अपने शेयर, म्यूचुअल फंड या अन्य निवेश बेच देते हैं. यह सबसे बड़ी गलती हो सकती है.
क्या करें: जब आप रिसेशन में बेचते हैं, तो "असली" फायदे को भी खो देते हैं,क्योंकि जब अर्थव्यवस्था सुधरती है और बाजार वापस बढ़ता है, तो आप उस रिकवरी का लाभ उठाने से चूक जाते हैं.तो हमेशा आपने धैर्य रखें और मार्केट की वापसी का इंतजार करें.
क्यों नहीं करना चाहिए: रिसेशन के दौरान नौकरी की सेफ्टी कम हो जाती है और इनकम भी फिक्स नहीं होती है.ऐसे में नया कर्ज लेना, चाहे वह क्रेडिट कार्ड पर हो, व्यक्तिगत लोन हो या नई कार का लोन हो, आपकी फाइनेंशियल स्थिति को खतरे में डाल सकता है.
क्या करें: तो अगर इनकम कम हो जाती है या नौकरी चली जाती है,ऐसे में लोन की मासिक किस्तें चुकाना मुश्किल हो जाएगा. ऐसे कई बार लोग कर्ज के जाल में फंस भी जाते हैं. ऐसे समय में जितना हो अपने मौजूदा हाई-ब्याज वाले कर्ज (जैसे क्रेडिट कार्ड का बकाया) को चुकाने पर ध्यान दें. नए कोई लोन को तब लें जब आपको बहुत इमरजेंसी हो.
क्यों नहीं करना चाहिए: रिसेशन के समय कंपनियां अक्सर लागत में कटौती करती हैं, जिसमें छंटनी भी शामिल है. तो ऐसे टाइम में, आप अपकी फिलहाल नौकरी को सेफ रखना एक प्राथमिकता होनी चाहिए.
क्या करें: अगर बिना सोचे आपने नौकरी छोड़ दी तो मंदी के बाजार में नई नौकरी ढूंढना बेहद मुश्किल हो सकता है, क्योंकि बेरोजगारी की दर बढ़ने से नौकरी मिलना मुश्किल होता है. ऐसे में अपनी कंपनी में अपने मूल्य को बढ़ाएं और नए कौशल सीखें और काम में दिखाएं. मंदी का आसार दिख रहा है तो ऐसे काम करें कि कंपनी आपको निकालने के बारे में कभी ना सोचे.
क्यों नहीं करना चाहिए: इमरजेंसी फंड रिसेशन जैसे अनिश्चित समय के लिए ही बनाया जाता है. तो यह आपकी 3 से 6 महीने (या अधिक) की लाइफ की जरूरतों को पूरा करता है, इसको फालतू के काम में ना गवाएं.
क्या करें: जी हां गैर-जरूरी चीजों पर अपने इमरजेंसी फंड को खर्च करेंगे तो बाद में असली जरूरत पड़ने पर आपको कर्ज लेना पड़ सकता है.आप हमेशा अपने इमरजेंसी फंड को आपात स्थितियों के लिए बचा कर रखें. यदि आपके पास इमरजेंसी फंड नहीं है, तो इसे रिसेशन आने से पहले इसको बनाएं.
क्यों नहीं करना चाहिए: रिसेशल के दौरान, कुछ लोग मार्केट में 'बॉटम' पकड़ने या 'तेज़ पैसा' बनाने की कोशिश में भयंकर रिस्क भरा निवेश करना भारी पड़ जाता है.
क्या करें: फाइनेंशियल अनिश्चितता के माहौल में ऐसे निवेश में पैसा गंवाने का रिस्क बहुत अधिक होता है.इससे आप अपनी बची हुई पूंजी भी खो सकते हैं. हमेशा मंदी के दौरान सेविंग्स को प्राथमिकता दें.सेफ ऑप्शन जैसे एफडी, आरडी जैसे ऑप्शन में निवेश करना चाहिए.(नोट: ये आर्टिकल सिर्फ जानकारी के लिए है और इसे किसी भी तरह से इंवेस्टमेंट सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए, निवेश के लिए वित्तीय सलाहकारों से सलाह लेने का सुझाव लें)
Q1. आर्थिक मंदी (Recession) क्या होती है?
Ans: जब किसी देश की अर्थव्यवस्था में लगातार गिरावट आती है, नौकरियां कम होती हैं और बाजार में अनिश्चितता बढ़ती है, तो उसे आर्थिक मंदी कहते हैं.
Q2. मंदी के दौरान कौन-सी सबसे बड़ी गलती नहीं करनी चाहिए?
Ans: मंदी के समय बड़ी खरीदारी या अनावश्यक कर्ज लेना सबसे बड़ी गलती हो सकती है, जिससे फाइनेंशियल स्ट्रेस बढ़ सकता है.
Q3. क्या निवेश मंदी में बंद कर देना चाहिए?
Ans: नहीं, अगर आप SIP या लॉन्ग टर्म प्लान में निवेश कर रहे हैं, तो उसे बंद न करें. मंदी के दौरान गिरा हुआ बाजार आगे चलकर अच्छा रिटर्न दे सकता है.
Q4. मंदी में इमरजेंसी फंड क्यों ज़रूरी होता है?
Ans: मंदी के समय नौकरी जाने या इनकम कम होने की आशंका रहती है, ऐसे में 6–12 महीने का इमरजेंसी फंड आपकी मदद करता है.
Q5. मंदी के दौरान खर्च कैसे कंट्रोल करें?
Ans: गैरज़रूरी खर्चों को टालें, लग्ज़री आइटम्स न खरीदें और EMI पर सामान लेने से बचें। ज़रूरत के मुताबिक ही खर्च करें.