क्‍या है ये '100- (100 माइनस)' का नियम? निवेश की दुनिया में एक्सपर्ट्स इसे क्यों मानते हैं 'गोल्डन रूल'?

अगर आप निवेश की दुनिया में नए हैं और समझ नहीं पा रहे कि कहां से शुरू करें, तो '100- (100 माइनस)' का नियम आपके लिए एक बेहतरीन गाइड का काम कर सकता है. ये आपको गलत एसेट एलोकेशन से बचाता है, जिससे युवा निवेशकों को ज्‍यादा ग्रोथ और वृद्ध निवेशकों को पूंजी की सुरक्षा मिलती है. 
क्‍या है ये '100- (100 माइनस)' का नियम? निवेश की दुनिया में एक्सपर्ट्स इसे क्यों मानते हैं 'गोल्डन रूल'?

निवेश की दुनिया में सबसे बड़ा सवाल जो हर किसी को परेशान करता है, वो ये है कि "कितना पैसा, कहां लगाएं?". कितना पैसा इक्विटी (Stock Market) जैसे जोखिम भरे लेकिन हाई-रिटर्न वाले रास्ते पर लगाएं और कितना पैसा डेट (FD, सरकारी बॉन्ड) जैसे सुरक्षित लेकिन कम-रिटर्न वाले रास्ते पर रखें? इसी एक सवाल का जवाब आपके पूरे फाइनेंशियल फ्यूचर की तस्वीर तय करता है.

अगर आप भी इस उलझन में हैं, तो फिक्र न करें. फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स ने इसका एक बहुत ही सरल और असरदार समाधान निकाला है, जिसे कहते हैं '100- (100 माइनस)' का नियम. इसे The 100 - Age Rule भी कहा जाता है. ये कोई किताबी ज्ञान नहीं, बल्कि एक प्रैक्टिकल फॉर्मूला है, जिसे दुनिया भर के निवेशक अपनाकर अपने पोर्टफोलियो को संतुलित रखते हैं. जानिए इस 'गोल्डन रूल' के बारे में और समझिए कि ये आखिर कैसे काम कर सकता है.

आखिर क्या है '100- (100 माइनस)' का नियम?

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ये नियम एसेट एलोकेशन यानी आपके निवेश को इक्विटी और डेट में बांटने का एक सीधा-साधा फॉर्मूला है. नियम कहता है:

100 माइनस आपकी उम्र (100 - Age) = इक्विटी में निवेश का प्रतिशत (%)

इस फॉर्मूले से जो आंकड़ा निकलता है, आपको अपने कुल निवेश का उतना प्रतिशत हिस्सा इक्विटी यानी शेयर बाजार से जुड़े साधनों (जैसे डायरेक्ट स्टॉक्स, इक्विटी म्यूचुअल फंड) में लगाना चाहिए. और बाकी बचा हुआ हिस्सा आपको डेट यानी फिक्स्ड-इनकम वाले सुरक्षित साधनों (जैसे पब्लिक प्रोविडेंट फंड-PPF, फिक्स्ड डिपॉजिट-FD, डेट म्यूचुअल फंड) में लगाना चाहिए.

उदाहरण से समझिए कि ये कैसे काम करता है?

इस नियम की खूबसूरती इसकी सादगी में है. चलिए तीन अलग-अलग उम्र के निवेशकों के उदाहरण से इसे समझते हैं.

उदाहरण -1

  • निवेशक 1: रिया, उम्र 25 साल
  • फॉर्मूला: 100 - 25 = 75
  • मतलब: रिया को अपने कुल निवेश का 75% हिस्सा इक्विटी में और बचा हुआ 25% हिस्सा डेट में लगाना चाहिए.

क्यों लगाना चाहिए?

क्योंकि रिया युवा है. उसकी जोखिम लेने की क्षमता ज्यादा है और उसके पास करियर के कई साल बाकी हैं. अगर बाजार में कोई गिरावट आती भी है, तो उसके पास रिकवर करने के लिए बहुत समय है. ज्यादा इक्विटी एक्सपोजर उसे लंबी अवधि में अच्छी संपत्ति बनाने में मदद करेगा.

उदाहरण -2

  • निवेशक: अमित, उम्र 40 साल
  • फॉर्मूला: 100 - 40 = 60
  • मतलब: अमित को अपने निवेश का 60% हिस्सा इक्विटी में और 40% हिस्सा डेट में लगाना चाहिए.

क्यों लगाना चाहिए?

अमित अपने करियर के मध्य में है. उस पर परिवार की जिम्मेदारियां भी हैं. इसलिए, वो रिया जितना जोखिम नहीं ले सकता. उसका पोर्टफोलियो ग्रोथ और सुरक्षा के बीच एक अच्छा संतुलन बनाएगा.

उदाहरण -3

  • निवेशक: मिस्टर शर्मा, उम्र 55 साल
  • फॉर्मूला: 100 - 55 = 45
  • मतलब: मिस्टर शर्मा को अपने निवेश का 45% हिस्सा इक्विटी में और 55% हिस्सा डेट में लगाना चाहिए.

क्यों लगाना चाहिए?

वो रिटायरमेंट के करीब हैं. इस पड़ाव पर उनकी प्राथमिकता अपनी जमा-पूंजी को सुरक्षित रखना है, न कि उस पर बड़ा जोखिम लेना. डेट में ज्यादा निवेश उन्हें एक स्थिर आय देगा और बाजार के बड़े उतार-चढ़ाव से बचाएगा.

तीनों उदाहरण के जरिए आपको ये समझ में आ गया होगा कि जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है, ये नियम अपने आप आपके पोर्टफोलियो से जोखिम को कम करता जाता है. ये बिल्कुल वैसा ही है जैसे हाईवे पर तेज चलाने के बाद शहर की भीड़ में आप गाड़ी का गियर बदलकर उसे धीमा कर लेते हैं.

क्यों एक्सपर्ट्स मानते हैं इसे 'गोल्डन रूल'?

  • बहुत ही सरल: इसे समझने या लागू करने के लिए आपको फाइनेंशियल एक्सपर्ट होने की जरूरत नहीं है.
  • उम्र के साथ ऑटोमैटिक एडजस्टमेंट: ये आपकी सबसे बड़ी चिंता खत्म कर देता है कि कब कितना रिस्क लेना है. ये आपकी उम्र के साथ आपके पोर्टफोलियो को खुद-ब-खुद保守वादी (conservative) बनाता जाता है.
  • भावनाओं पर नियंत्रण: बाजार जब बहुत चढ़ता है तो हम लालची हो जाते हैं और जब गिरता है तो डर जाते हैं. ये नियम आपको भावनाओं में बहकर गलत फैसले लेने से रोकता है और एक अनुशासन बनाए रखता है.
  • पर्सनलाइज्ड: ये हर किसी के लिए एक ही फॉर्मूला नहीं देता, बल्कि आपकी उम्र के हिसाब से बदलता है, जो इसे काफी हद तक एक व्यक्तिगत रणनीति बनाता है.

क्या ये नियम हर किसी के लिए पत्थर की लकीर है?

नहीं. ये याद रखना बहुत जरूरी है कि '100 - उम्र' का नियम एक शुरुआती बिंदु है, कोई पत्थर की लकीर नहीं. इसे 'रूल ऑफ थंब' यानी एक मोटा-मोटा अंदाजा लगाने वाला नियम कहा जाता है. एक्सपर्ट्स अब इसमें कुछ और चीजें भी जोड़ने की सलाह देते हैं.

आपकी जोखिम लेने की क्षमता (Risk Appetite)

हो सकता है कि आप 40 की उम्र में भी 70% का जोखिम लेने में सहज हों, या 25 की उम्र में भी सिर्फ 50% का जोखिम लेना चाहते हों. आपको इस नियम को अपनी जोखिम लेने की क्षमता के अनुसार थोड़ा-बहुत बदलना चाहिए.

नियम के नए वर्जन

आजकल लोगों की जीवन प्रत्याशा (Life Expectancy) बढ़ गई है और महंगाई भी ज्यादा है. इसलिए, कुछ एक्सपर्ट्स अब '110 - उम्र' या '120 - उम्र' के नियम को अपनाने की सलाह देते हैं, ताकि लंबी अवधि के लिए आपके पोर्टफोलियो में ग्रोथ की गुंजाइश बनी रहे.

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. इक्विटी और डेट में कौन-कौन से निवेश आते हैं?

इक्विटी: डायरेक्ट शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड (लार्ज-कैप, मिड-कैप, फ्लेक्सी-कैप), ELSS.
डेट: पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), फिक्स्ड डिपॉजिट (FD), सरकारी बॉन्ड, डेट म्यूचुअल फंड.

2. क्या मुझे हर साल अपने पोर्टफोलियो को इस नियम के हिसाब से बदलना चाहिए?

हां, साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करना और उसे अपनी मौजूदा उम्र के अनुसार रीबैलेंस करना एक अच्छी आदत है.

3. अगर मेरी जोखिम लेने की क्षमता बहुत ज्यादा है तो क्या मैं ये नियम बदल सकता हूं?

बिल्कुल. अगर आप ज्यादा जोखिम लेने में सहज हैं, तो आप '110 - उम्र' या '120 - उम्र' का नियम अपना सकते हैं. इससे आपके पोर्टफोलियो में इक्विटी का हिस्सा बढ़ जाएगा.

4. ये नियम किस पर लागू नहीं होता?

ये नियम उन लोगों पर कम लागू होता है जिनके पास बहुत विशिष्ट लक्ष्य या बहुत ज्यादा संपत्ति है. ऐसे लोगों को अक्सर एक पेशेवर वित्तीय सलाहकार की जरूरत होती है जो उनके लिए एक बेहतर योजना बना सके.

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