&format=webp&quality=medium)
आज के दौर में लोन लेना पहले से कहीं ज्यादा आसान हो गया है. बैंक हों या मोबाइल ऐप, कुछ ही समय में आसानी से लोन मिल जाता है. अब जरूरत पड़ते ही लोग बिना ज्यादा सोचे-समझे लोन ले लेते हैं. लेकिन यहीं से कई बार फाइनेंशियल परेशानी शुरू हो जाती है, क्योंकि हर लोन आपके फायदे के लिए नहीं होता. असल में लोन दो तरह के होते हैं गुड लोन और बैड लोन और दोनों में फर्क समझना आम लोगों के लिए बेहद जरूरी है.
डिजिटल दौर में इंस्टेंट लोन ऐप्स ने लोगों को जल्दी पैसा तो दिया, लेकिन साथ में हाई इंटरेस्ट, छिपे चार्ज और मानसिक तनाव भी दिया है. कई लोग छोटी जरूरतों के लिए ऐसे ऐप्स से लोन लेते हैं और बाद में EMI के बोझ में फंस जाते हैं. यही वजह है कि लोन लेने से पहले यह समझना जरूरी है कि आप किस तरह का कर्ज ले रहे हैं.
गुड लोन वह होता है जो आपकी जिंदगी को बेहतर बनाने में मदद करें. ऐसा लोन जो भविष्य में आपकी आमदनी बढ़ाए, संपत्ति बनाए या करियर को मजबूत करे, उसे अच्छा कर्ज माना जाता है. इसमें ब्याज दर आमतौर पर कम होती है और समय के साथ इसका फायदा नजर आता है.
मान लीजिए आपने पढ़ाई के लिए एजुकेशन लोन लिया और आगे चलकर उसी पढ़ाई से आपकी कमाई बढ़ती है. इसी तरह बिजनेस लोन से व्यापार बढ़ता है या होम लोन से आपकी खुद की संपत्ति बनती है. ऐसे लोन लंबे समय में आपकी नेटवर्थ बढ़ाने का काम करते हैं, इसलिए इन्हें गुड लोन कहा जाता है.
गुड लोन में रिटर्न की संभावना ब्याज से ज्यादा होती है. EMI आपकी कमाई के हिसाब से मैनेज हो जाती है और लोन का इस्तेमाल किसी प्रोडक्टिव काम में होता है. यह आपकी फाइनेंशियल ग्रोथ का हिस्सा बनता है, बोझ नहीं.
ये भी पढ़ें: सिर्फ रिटायरमेंट फंड नहीं है PF, इंश्योरेंस कवर से लेकर टैक्स छूट तक छिपे हैं और भी कई फायदे
बैड लोन वह होता है जो सिर्फ खर्च बढ़ाता है, आमदनी नहीं. इस तरह के लोन में ब्याज दर काफी ज्यादा होती है और कई बार अतिरिक्त चार्ज भी जुड़ जाते हैं. अगर समय पर भुगतान न हो, तो क्रेडिट स्कोर बिगड़ जाता है और आगे लोन मिलना मुश्किल हो जाता है. पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड बकाया, इंस्टेंट लोन ऐप्स से लिया गया कर्ज या गैर-जरूरी चीजों के लिए लिया गया लोन अक्सर इसी कैटेगरी में आता है. इनसे न तो कोई एसेट बनता है और न ही भविष्य में कोई फायदेमंद रिटर्न मिलता है.
बैड लोन की EMI जेब पर भारी पड़ती है. कई लोग एक लोन चुकाने के लिए दूसरा लोन लेते हैं और धीरे-धीरे कर्ज के जाल में फंस जाते हैं. तनाव बढ़ता है, सेविंग खत्म हो जाती है और आर्थिक आज़ादी खतरे में पड़ जाती है.
| आधार | गुड लोन | बैड लोन |
| लोन लेने का मकसद | भविष्य को मजबूत बनाना | सिर्फ मौजूदा खर्च पूरा करना |
| पैसे का असर | दौलत और कमाई बढ़ाता है | जेब पर बोझ बढ़ाता है |
| ब्याज दर | अपेक्षाकृत कम | काफी ज्यादा |
| लंबे समय का फायदा | फायदा देता है नहीं | नुकसान बढ़ाता है |
| कमाई | बढ़ाने में मदद करता है | नहीं करता |
| जोखिम का स्तर | कम जोखिम | ज्यादा जोखिम |
| उदाहरण | होम लोन, एजुकेशन लोन, बिजनेस लोन | पर्सनल लोन, क्रेडिट कार्ड लोन, इंस्टेंट ऐप लोन |
| मानसिक असर | सुरक्षा और स्थिरता | तनाव और दबाव |
| भविष्य की प्लानिंग | आसान बनती है | मुश्किलें बढ़ाती है |
लोन लेते समय अपनी आय और खर्च का सही हिसाब लगाना जरूरी है. इसके लिए डेट-टू-इनकम रेश्यो देखा जाता है. यानी आपकी कुल मासिक EMI, आपकी मासिक कमाई के 40 फीसदी से ज्यादा नहीं होनी चाहिए. अगर यह 30 फीसदी से नीचे है, तो और भी बेहतर माना जाता है.
हर छोटी जरूरत के लिए लोन लेना समझदारी नहीं है. बेहतर है कि पहले बचत की आदत डालें. छोटी प्लानिंग, SIP या इमरजेंसी फंड बनाकर कई खर्च बिना कर्ज के पूरे किए जा सकते हैं. लोन तभी लें, जब वह सच में आपकी जिंदगी को आगे बढ़ाने वाला हो.
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
लोन अपने आप में न अच्छा है, न बुरा. फर्क इस बात से पड़ता है कि आप उसे किस मकसद से ले रहे हैं. सही जानकारी और सोच-समझकर लिया गया कर्ज आपकी तरक्की का रास्ता खोल सकता है, जबकि जल्दबाजी में लिया गया लोन आपकी जेब का सबसे बड़ा दुश्मन बन सकता है.
नहीं, हर लोन बुरा नहीं होता, जो लोन आपकी आमदनी या संपत्ति बढ़ाए, वह गुड लोन कहलाता है.
क्योंकि इनमें ब्याज ज्यादा, चार्ज छिपे हुए और चुकाने का दबाव बहुत तेज होता है.
ये लोन भविष्य में आपकी वैल्यू बढ़ाते हैं जैसे घर संपत्ति बनता है और पढ़ाई से कमाई करने जरिया मिलता है.
अगर आपकी EMI आपकी मासिक आय के 30–40% के भीतर है, तो कर्ज सुरक्षित माना जाता है.
नहीं, छोटी जरूरतों के लिए पहले बचत और प्लानिंग को प्राथमिकता देनी चाहिए.