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अमीर होना कौन नहीं चाहता. आए दिन तमाम तरह की ऐसी स्कीमें समझाने वाले लोग भी आपको मिलते ही होंगे, जो बताते होंगे अमीर कैसे बन सकते हैं. कई लोगों को तो आपने अपनी आंखों के सामने ही अमीर बनते देखा भी होगा. कुछ लोग शेयर बाजार में पैसे लगाकर अमीर बन जाते हैं तो कुछ म्यूचुअल फंड में एसआईपी कर के.
यही है कंपाउंडिंग का जादू, जिस पर चलता है उसकी दुनिया ही बदल देता है. हालांकि, ऐसा नहीं है कि यह जादू सिर्फ कुछ ही लोगों पर चलेगा, जो भी इसके नियम-कायदों को फॉलो करेगा, कंपाउंडिंग का जादू उसे अमीर बनाता ही बनाता है. हां, थोड़ा वक्त जरूर लगता है. शुरुआत में पैसा बहुत धीरे-धीरे बढ़ता है, लेकिन कुछ वक्त के बाद पैसा इतनी तेजी से बढ़ता है कि वह आपको किसी जादू से कम नहीं लगता. आइए समझते हैं कैसे काम करता है कंपाउंडिंग का जादू.
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अगर आप कहीं निवेश करते हैं तो उस पर दो तरह से ब्याज मिल सकता है. पहला है साधारण ब्याज और दूसरा है कंपाउंडिंग ब्याज. जब हर साल सिर्फ आपके मूल पर ही ब्याज मिलता है तो उसे साधारण ब्याज कहते हैं. वहीं जब साल दर साल आपको मिले ब्याज पर भी ब्याज मिलता है, तो इसे कंपाउंडिंग कहा जाता है.
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साधारण ब्याज के तहत अगर आप 1000 रुपये जमा करते हैं और उस पर आपको 10 फीसदी ब्याज मिलता है तो आपको हर साल 100 रुपये का ब्याज मिलेगा. वहीं अगर आप इसे ही कंपाउंडिंग के तहत देखें तो पहले साल तो आपको 100 रुपये का ब्याज मिलेगा, लेकिन उसके अगले साल आपकी कुल रकम 1100 रुपये हो चुकी होगी और उसका 10 फीसदी यानी 110 रुपये का ब्याज मिलेगा. इसी तरह साल दर साल आपको मिले ब्याज पर भी ब्याज मिलता चला जाएगा.
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मान लेते हैं आपने किसी स्कीम या म्यूचुअल फंड में 1 लाख रुपये निवेश किए हैं. यह भी मान लेते हैं कि आपको लंबे वक्त में औसतन 12 फीसदी का रिटर्न मिलेगा. ऐसे में आपके पैसे 1 लाख रुपये से 2 लाख होने में करीब 6 साल लग जाएंगे. वहीं 2 लाख से 3 लाख होने में करीब 3.5 साल लगते हैं लेकिन जब वह 9 लाख हो चुके होंगे, जो उन्हें 10 लाख होने में महज एक साल लगेगा.
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जब आपका फंड बड़ा हो जाता है, तब हर एक और लाख रुपये जोड़ने में कम समय लगता है.
1 लाख से 2 लाख – 6 साल
2 लाख से 3 लाख – 3.5 साल
3 लाख से 4 लाख – 2.5 साल
4 लाख से 5 लाख– 2 साल
5 लाख से 6 लाख – 1.5 साल
6 लाख से 7 लाख – 1.4 साल
9 लाख से 10 लाख – सिर्फ 1 साल
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कई लोग शुरुआत में ही हार मान लेते हैं क्योंकि पैसा धीरे बढ़ता है. लेकिन जो टिके रहते हैं, उन्हें बाद में असली फायदा मिलता है. एक बार आपका फंड मोटा हो गया, फिर पैसा खुद आपके लिए काम करता है. सोचिए, अगर आप 6 लाख पर हैं, तो अगला एक लाख सिर्फ 1.4 साल में आएगा. वहीं, पहले एक लाख से दूसरे एक लाख तक पहुंचने में 6 साल लगे थे. ये है कंपाउंडिंग का कमाल.
दौलत बनाने का खेल निवेश पर ज्यादा रिटर्न पाने का नहीं होता है, बल्कि ज्यादा वक्त तक लगातार रिटर्न पाते रहने का होता है. जो लोग धैर्य रखते हैं, वही आगे चलकर जीतते हैं.
तो अगली बार जब लगे कि निवेश से पैसा नहीं बढ़ रहा, तो याद रखिए- पहला एक लाख सबसे मुश्किल होता है. टिके रहिए, पैसा अपने आप भागने लगेगा.