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हर निवेशक चाहता है कि उसका पैसा तेजी से बढ़े और उसे शानदार रिटर्न मिले. लेकिन जैसे ही शेयर बाजार का नाम आता है, मन में उतार-चढ़ाव का डर भी बैठ जाता है. बहुत से लोग इसी डर की वजह से मार्केट के निवेश से दूर रहते हैं और पारंपरिक विकल्पों जैसे FD वगैरह में ही अटके रह जाते हैं. लेकिन आज के समय में अगर आपको मोटा पैसा बनाना है तो ऐसी किसी जगह पर पैसा निवेश करना होगा, जहां रिटर्न महंगाई को भी मात दे सके. ये क्षमता स्टॉक मार्केट में है.
लेकिन आप चाहें तो मार्केट में भी "कम जोखिम और ज्यादा रिटर्न" (Low Risk High Return) का संतुलन बना सकते हैं. इसके लिए आपको निवेश की दुनिया के सबसे शक्तिशाली सिद्धांत को समझना होगा और वो है एसेट एलोकेशन (Asset Allocation). एसेट एलोकेशन कोई रॉकेट साइंस नहीं, बल्कि एक स्मार्ट निवेश की रणनीति है, जिसे अपनाकर आप अपने वित्तीय लक्ष्यों (Financial Goals) तक आसानी से पहुंच सकते हैं. यहां जानिए इसके बारे में.
एसेट एलोकेशन का मूल सिद्धांत है - "Don't put all your eggs in one basket" यानी अपने सारे अंडे एक ही टोकरी में न रखें. इसका सीधा सा मतलब है अपने निवेश की रकम को एक जगह रखने के बजाय अलग-अलग तरह की संपत्ति (Assets) में बांटना चाहिए. इसे एक उदाहरण से समझिए- जिस तरह एक संतुलित भोजन की थाली में रोटी, दाल, सब्जी, सलाद और दही सब कुछ होता है, उसी तरह एक संतुलित निवेश पोर्टफोलियो में भी अलग-अलग एसेट क्लास होने चाहिए.
एसेट एलोकेशन का कोई एक निश्चित फॉर्मूला नहीं है जो सब पर लागू हो. ये पूरी तरह से आपकी व्यक्तिगत परिस्थितियों पर निर्भर करता है. अपनी सही निवेश रणनीति (Investment Strategy) बनाने के लिए इन तीन बातों पर ध्यान दें-
उम्र सबसे बड़ा फैक्टर है.एक सामान्य नियम है "100 - आपकी उम्र".इस फॉर्मूले के अनुसार, आपको अपनी उम्र को 100 में से घटाकर जो संख्या मिले, उतने प्रतिशत पैसा इक्विटी में लगाना चाहिए. मान लीजिए कि अगर आप 30 साल के हैं, तो आपको (100-30) = 70% पैसा इक्विटी में और बाकी 30% डेट और गोल्ड में लगाना चाहिए.
क्या आप बाजार के उतार-चढ़ाव से घबरा जाते हैं या आपको लगता है कि "रिस्क है तो इश्क है"?
आपका लक्ष्य क्या है और उसे पाने के लिए कितना समय है?
| उम्र (Age Group) | रिस्क प्रोफाइल (Risk Profile) | इक्विटी (Equity %) | डेट (Debt %) | गोल्ड/अन्य (Gold/Other %) |
| 25-35 साल | एग्रेसिव (Aggressive) | 70-80% | 15-20% | 5-10% |
| 40-50 साल | मॉडरेट (Moderate) | 50-60% | 30-40% | 10% |
| 55+ साल | कंजर्वेटिव (Conservative) | 20-30% | 60-70% | 10% |
40 की उम्र तक: इस उम्र में आप करियर में ग्रोथ कर रहे होते हैं और जोखिम लेने की क्षमता अधिक होती है.आप 70% इक्विटी, 20% डेट और 10% गोल्ड का एलोकेशन रख सकते हैं. इस दौरान लोन और बच्चों की जिम्मेदारी भी होती है, इसलिए एक इमरजेंसी फंड जरूर बनाएं.
40 के बाद: जैसे-जैसे आपकी उम्र 50 की ओर बढ़ती है, जोखिम लेने की क्षमता कम होने लगती है. अब आपको पूंजी की सुरक्षा पर अधिक ध्यान देना चाहिए.अपने इक्विटी निवेश को धीरे-धीरे कम करके 50% पर लाएं और डेट में निवेश बढ़ाएं.
रिटायरमेंट के करीब (55+): इस पड़ाव पर आपकी प्राथमिकता रेगुलर इनकम और स्थिरता होनी चाहिए.इक्विटी में अपना निवेश घटाकर 20-30% कर दें और 60-70% हिस्सा डेट फंड, सरकारी योजनाओं और एन्युटी प्लान में लगाएं ताकि आपको नियमित आय मिलती रहे.
इसका कोई "सर्वश्रेष्ठ" फॉर्मूला नहीं है.सबसे अच्छा फॉर्मूला वो है जो आपकी उम्र, आय, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता के अनुकूल हो.
आमतौर पर साल में एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा और रीबैलेंसिंग करने की सलाह दी जाती है या फिर जब बाजार में बड़े उतार-चढ़ाव के कारण आपका एलोकेशन 5-10% से ज्यादा बदल जाए.
बिल्कुल नहीं! एक व्यक्ति जो हर महीने ₹5000 की SIP भी कर रहा है, वह भी अपनी SIP को अलग-अलग फंड्स (जैसे 70% इक्विटी फंड में, 30% डेट फंड में) में बांटकर एसेट एलोकेशन का लाभ उठा सकता है.
अगर आपको निवेश की गहरी समझ नहीं है, तो किसी सर्टिफाइड फाइनेंशियल एडवाइजर (Certified Financial Advisor) की मदद लेना सबसे बेहतर विकल्प है.
हां, रियल एस्टेट एक महत्वपूर्ण एसेट क्लास है. लेकिन ये बहुत इललिक्विड होता है (इसे तुरंत बेचा नहीं जा सकता). इसलिए, अपने कुल पोर्टफोलियो का एक निश्चित हिस्सा ही इसमें लगाएं और ध्यान रखें कि यह आपके शॉर्ट-टर्म लक्ष्यों के लिए उपयुक्त नहीं है.
डिस्क्लेमर- शेयर बाजार में निवेश जोखिम भरा है, इसलिए अगर आपको मार्केट की समझ नहीं है तो फाइनेंशियल एक्सपर्ट की सलाह लेकर ही कहीं निवेश का फैसला लें.