कार खरीद रहे हैं? पहले जान लें '20/4/10 का नियम', नहीं बिगड़ेगा घर का बजट, EMI की टेंशन भी नहीं होगी

कार लोन के आर्थिक बोझ और तनाव से बचने के लिए '20/4/10 का नियम' एक बेहद असरदार फॉर्मूला है. इस नियम के अनुसार, कार खरीदते समय उसकी ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20% डाउन पेमेंट नकद देना चाहिए. बचे हुए लोन को चुकाने की अवधि अधिकतम 4 वर्ष (48 महीने) होनी चाहिए.
कार खरीद रहे हैं? पहले जान लें '20/4/10 का नियम', नहीं बिगड़ेगा घर का बजट, EMI की टेंशन भी नहीं होगी

कार लोन के आर्थिक बोझ और तनाव से बचने के लिए '20/4/10 का नियम' एक बेहद असरदार फॉर्मूला है. प्रतीकात्मक फोटो (AI/ChatGPT)

घर के सामने अपनी एक शानदार कार खड़ी देखना हर इंसान का एक बहुत बड़ा सपना होता है. लेकिन इस सपने को पूरा करने की जल्दबाजी में लिया गया एक गलत लोन (Car Loan) का फैसला आपके इस हसीन सपने को कई सालों के मानसिक और आर्थिक तनाव में बदल सकता है. अक्सर लोग शोरूम में कम डाउन पेमेंट और 7 से 8 साल के लंबे लोन की कूटनीतिक बातों में फंस जाते हैं. इससे हर महीने की किस्त (EMI) तो कम दिखने लगती है, लेकिन लंबे समय में आपको लाखों रुपये का अतिरिक्त ब्याज चुकाना पड़ता है.

इस दलदल से बचने और अपनी जेब के अनुसार सही कार चुनने के लिए दुनिया भर के पर्सनल फाइनेंस एक्सपर्ट्स '20/4/10 का नियम' (20/4/10 Rule) अपनाने की सलाह देते हैं. यह एक ऐसा जादुई फॉर्मूला है जो आपको कर्ज के जाल में फंसने से बचाता है.

कार के बजट के अनुसार समझें इस नियम का पूरा गणित

इस फॉर्मूले के आधार पर ₹5 लाख, ₹10 लाख और ₹15 लाख की कारों के लिए आपकी कमाई और डाउन पेमेंट कितनी होनी चाहिए. आइए इसे एक आसान टेबल से समझते हैं.

कार की कुल कीमत (Car Price)न्यूनतम 20% डाउन पेमेंट (Down Payment)कुल लोन की रकम (Loan Amount)अधिकतम लोन अवधि (Tenure)आपकी जरूरी न्यूनतम मासिक आय (Monthly Income)*
₹5 लाख₹1 लाख₹4 लाख4 साल (48 महीने)करीब ₹50,000
₹10 लाख₹2 लाख₹8 लाख4 साल (48 महीने)करीब ₹1 लाख
₹15 लाख₹3 लाख₹12 लाख4 साल (48 महीने)करीब ₹1.5 लाख

Note: यह अनुमान इस आधार पर लगाया गया है कि आपकी कार की ईएमआई, तेल और मेंटेनेंस का कुल मासिक खर्च आपकी कुल आय के 10% के भीतर ही सिमट जाए.

क्या है '20/4/10 का नियम' और इसके फायदे?

यह नियम कार जैसी तेजी से मूल्य गंवाने वाली संपत्ति (Depreciating Asset) पर होने वाले फिजूलखर्च को रोकने के लिए 3 मुख्य प्वाइंट्स पर काम करता है-

1. '20' का मतलब: 20% डाउन पेमेंट

जब भी आप शोरूम पर कार फाइनल करें, तो कोशिश करें कि उसकी ऑन-रोड कीमत का कम से कम 20 प्रतिशत हिस्सा अपनी जेब से नकद (Upfront) चुकाएं. इसका सबसे बड़ा फायदा यह होता है कि आपकी लोन की रकम (Principal Amount) तुरंत कम हो जाती है, जिससे बैंक आप पर ज्यादा ब्याज नहीं वसूल पाता.

2. '4' का मतलब: 4 साल की लोन अवधि

बचे हुए लोन को चुकाने के लिए कभी भी 5, 7 या 10 साल का लंबा लोन न लें. इस नियम के तहत अपने कार लोन को अधिकतम 4 साल (48 महीने) के भीतर पूरी तरह चुकाकर बंद (Close) कर देना चाहिए. लोन जितना छोटा होगा, आपकी जेब से ब्याज के रूप में जाने वाला फालतू पैसा उतना ही बचेगा और आप जल्दी कर्जमुक्त हो सकेंगे.

3. '10' का मतलब: 10% मासिक खर्च की सीमा

यह इस नियम का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसे अधिकांश लोग भूल जाते हैं. लोग सोचते हैं कि अगर उनकी सैलरी ₹1 लाख है और कार की ईएमआई ₹25,000 है, तो वे इसे आसानी से झेल लेंगे. लेकिन वे भूल जाते हैं कि कार केवल ईएमआई से नहीं चलती.

इस नियम के अनुसार, आपकी कार की ईएमआई + हर महीने का पेट्रोल/डीजल + सालाना इंश्योरेंस का मासिक हिस्सा + सर्विस और मेंटेनेंस का कुल खर्च आपकी कुल इन-हैंड सैलरी के 10% से ज्यादा नहीं होना चाहिए. यानी ₹1 लाख कमाने वाले की जेब से कार पर हर महीने ₹10,000 से ज्यादा नहीं निकलने चाहिए.

यह नियम आपको किन बड़ी गलतियों से बचाता है?

लंबा लोन लेने से रोकना: यह आपको 7 या 8 साल के उस जाल में फंसने से बचाता है जहां कार पुरानी हो जाती है पर लोन खत्म होने का नाम नहीं लेता.

इमरजेंसी फंड की सुरक्षा: जब आपकी सैलरी का एक बड़ा हिस्सा कार की ईएमआई में नहीं जाता, तो आपके पास भविष्य की आकस्मिक जरूरतों और बच्चों की पढ़ाई के लिए निवेश करने के लिए पर्याप्त पैसा और वित्तीय साख बची रहती है.

साख और सिबिल स्कोर की मजबूती: समय पर और छोटी अवधि में लोन बंद करने से बैंकों की नजर में आपका सिबिल स्कोर (CIBIL Score) बहुत मजबूत हो जाता है, जिससे भविष्य में होम लोन मिलने में आसानी होती है.

Conclusion

'20/4/10 का नियम' कोई कड़ा सरकारी कानून नहीं है, बल्कि यह समझदार और जिम्मेदार कार मालिक बनने का एक बेहतरीन पैमाना है. कार खरीदते समय शोरूम की चकाचौंध और भावनाओं में बहने के बजाय हमेशा व्यावहारिक और तार्किक सोच अपनानी चाहिए. कार खरीदने का आखिरी फैसला करने से पहले अपनी वर्तमान बचतों, मौजूदा लोन और भविष्य के आर्थिक लक्ष्यों का मूल्यांकन खुद करें या किसी प्रमाणित वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) की मदद लें, ताकि कार आपके जीवन में खुशियाँ लाए, न कि ईएमआई का तनाव.

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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)

Q1 कार लोन के लिए कितना सिबिल (CIBIL) स्कोर होना अच्छा माना जाता है?

750 या उससे अधिक का सिबिल स्कोर सबसे अच्छा माना जाता है. इस पर कम ब्याज दर पर लोन आसानी से मिल जाता है.

Q2 कार लोन पर फिक्स्ड और फ्लोटिंग ब्याज दरों में क्या अंतर होता है?

फिक्स्ड रेट में ईएमआई पूरे कार्यकाल के दौरान स्थिर रहती है, जबकि फ्लोटिंग रेट में आरबीआई के नियमों के अनुसार ब्याज बदलता रहता है.

Q3 क्या बैंक कार की ऑन-रोड कीमत पर पूरा लोन दे देते हैं?

हां, कई बैंक आपकी अच्छी साख और सिबिल स्कोर को देखकर कार की ऑन-रोड कीमत (टैक्स व इंश्योरेंस सहित) का 90% से 100% तक फाइनेंस कर देते हैं.

Q4 कार लोन चुकाने के लिए अधिकतम कितने साल का समय मिलता है?

ज्यादातर बैंक नई कार के लिए 7 से 8 साल का समय देते हैं, लेकिन वित्तीय सुरक्षा के लिए 4 साल की अवधि चुनना सबसे बेहतर है.

Q5 क्या पुरानी या यूज़्ड कार (Used Car) खरीदने के लिए भी लोन मिलता है?

हां, पुरानी कार पर भी लोन मिलता है, लेकिन नई कार के मुकाबले इस पर ब्याज दरें 2% से 5% तक अधिक होती हैं.

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