Low Risk और High Return का कॉम्‍बो हैं कॉर्पोरेट बॉन्‍ड्स! जानिए क्‍या हैं इनके फायदे-नुकसान और रिस्‍क फैक्‍टर्स?

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स उन निवेशकों के लिए एक संतुलित निवेश विकल्प हैं जो FD से ज़्यादा और इक्विटी से कम जोखिम के साथ स्‍टेबल इनकम चाहते हैं. ये कम जोखिम और शानदार रिटर्न का बेहतरीन कॉम्‍बो साबित हो सकते हैं. हालांकि इसमें निवेश करने से पहले आपको कॉर्पोरेट बॉन्‍ड्स के फायदे-नुकसान और दूसरे पहलुओं को भी समझ लेना चाहिए. यहां जानिए सबकुछ.
Low Risk और High Return का कॉम्‍बो हैं कॉर्पोरेट बॉन्‍ड्स! जानिए क्‍या हैं इनके फायदे-नुकसान और रिस्‍क फैक्‍टर्स?

सुरक्षित निवेश और आकर्षक रिटर्न, ये एक ऐसा कॉम्बिनेशन है जिसे हर निवेशक तलाशता है. इक्विटी बाज़ार के उतार-चढ़ाव और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) की घटती ब्याज दरों के बीच, कॉर्पोरेट बॉन्ड्स (Corporate Bonds) निवेश के ऐसे ऑप्‍शन के तौर पर सामने आए हैं जो आपकी इन दोनों जरूरतों को आसानी से पूरा कर सकते हैं. ये उन निवेशकों के लिए बेहतर विकल्‍प साबित हो सकते हैं जो अपने पोर्टफोलियो में स्थिरता चाहते हैं लेकिन FD से ज़्यादा रिटर्न की उम्‍मीद करते हैं.

कॉर्पोरेट बॉन्ड में निवेश करना शेयर बाजार की तुलना में कम जोखिम भरा माना जाता है. साथ ही इसमें सरकारी बॉन्‍ड और FD से बेहतर रिटर्न देने की क्षमता होती है. कॉर्पोरेट बॉन्‍ड्स में आपको 8-10% तक रिटर्न आसानी से मिल सकता है, जो बैंक FD से काफी बेहतर है. कई बार ब्‍याज इससे भी बेहतर हो सकता है. आइए जानते हैं कि क्‍या होता है कॉर्पोरेट बॉन्‍ड और क्‍या हैं इसके फायदे-नुकसान और रिस्‍क फैक्‍टर्स.

कॉर्पोरेट बॉन्ड क्या हैं? (What are Corporate Bonds?)

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जब किसी कंपनी को अपने कारोबार के विस्तार, नए प्रोजेक्ट शुरू करने या अन्य जरूरतों के लिए पैसों की जरूरत होती है, तो वो बैंकों से लोन लेने के बजाय आम निवेशकों से उधार लेती है. इस उधार के बदले में कंपनी एक तरह का ऋण पत्र (Debt Instrument) जारी करती है, जिसे कॉर्पोरेट बॉन्ड कहा जाता है. जो व्यक्ति इन बॉन्ड्स को खरीदता है, वो असल में उस कंपनी को कर्ज दे रहा होता है. इसके बदले में, कंपनी निवेशक को एक निश्चित अवधि तक, पहले से तय ब्याज दर (जिसे कूपन रेट कहते हैं) का भुगतान करती है. जब बॉन्ड की अवधि (मैच्योरिटी) पूरी हो जाती है, तो कंपनी निवेशक को उसकी मूल रकम वापस लौटा देती है.

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स में निवेश के फायदे (Benefits of Corporate Bonds)

आकर्षक और स्थिर रिटर्न (Attractive and Stable Returns)

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स का सबसे बड़ा फायदा ये है कि ये फिक्स्ड डिपॉजिट और सरकारी बॉन्ड्स की तुलना में बेहतर ब्याज दर ऑफर करते हैं. अच्छी रेटिंग वाले कॉर्पोरेट बॉन्ड्स आसानी से 8.00% से लेकर 10% तक या उससे भी ज्‍यादा का रिटर्न दे सकते हैं.

कम जोखिम (Lower Risk)

शेयर बाजार की तुलना में कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को काफी सुरक्षित माना जाता है. ऐसा इसलिए है क्योंकि बॉन्डधारकों का कंपनी की संपत्ति पर इक्विटी शेयरधारकों से पहला अधिकार होता है. अगर कंपनी दिवालिया होती है, तो पहले बॉन्डधारकों का पैसा चुकाया जाता है.

नियमित आय का स्रोत (Regular Income Source)

ये बॉन्ड्स एक निश्चित आमदनी का जरिया प्रदान करते हैं. कंपनी आपको मासिक, तिमाही, छमाही या सालाना आधार पर ब्याज का भुगतान करती है, जो आपकी नियमित जरूरतों को पूरा करने में मदद कर सकता है.

विविधता (Diversification)

आप अपने पोर्टफोलियो में कॉर्पोरेट बॉन्ड्स को शामिल करके डायवर्सिफाई कर सकते हैं. ये इक्विटी और अन्य एसेट्स से जुड़े जोखिम को संतुलित करने में मदद करता है.

लिक्विडिटी (Liquidity)

कई कॉर्पोरेट बॉन्ड्स स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड होते हैं, जिसका मतलब है कि आप उन्हें मैच्योरिटी से पहले भी आसानी से खरीद या बेच सकते हैं.

कॉर्पोरेट बॉन्ड्स के नुकसान और रिस्क फैक्टर्स (Disadvantages and Risk Factors)

क्रेडिट रिस्क या डिफॉल्ट रिस्क (Credit Risk or Default Risk)

अगर कंपनी की आर्थिक स्थिति खराब हो जाती है और वो ब्याज या मूलधन चुकाने में असमर्थ हो जाती है, तो आपको नुकसान हो सकता है. इससे बचने के लिए, हमेशा CRISIL, ICRA जैसी एजेंसियों द्वारा दी गई हाई क्रेडिट रेटिंग (जैसे AAA, AA+) वाले बॉन्ड्स में निवेश करें. ये काफी हद तक सुरक्षित होता है.

ब्याज दर का जोखिम (Interest Rate Risk)

बाजार में ब्याज दरें घटने-बढ़ने का असर बॉन्ड की कीमतों पर पड़ता है. अगर रिजर्व बैंक ब्याज दरें बढ़ाता है, तो नए जारी होने वाले बॉन्ड्स ज़्यादा कूपन रेट ऑफर करेंगे, जिससे आपके पुराने, कम ब्याज वाले बॉन्ड की कीमत सेकेंडरी मार्केट में घट सकती है.

लिक्विडिटी रिस्क (Liquidity Risk)

हालांकि कई बॉन्ड्स लिस्टेड होते हैं, लेकिन कुछ बॉन्ड्स, खासकर कम रेटिंग वाली कंपनियों के बॉन्ड्स के लिए खरीदार ढूंढना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में, मैच्योरिटी से पहले पैसा निकालना चुनौतीपूर्ण हो सकता है.

महंगाई का जोखिम (Inflation Risk)

अगर महंगाई दर आपके बॉन्ड पर मिल रहे रिटर्न से ज़्यादा हो जाती है, तो आपके निवेश की वास्तविक कीमत समय के साथ कम हो सकती है.

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