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Unified Pension System: यूपीएस (UPS) यानी यूनिफाइड पेंशन स्कीम में अप्लाई करने की आखिरी तारीख को 30 जून से बढ़ाकर 30 सितंबर कर दिया गया है. ऐसे में केंद्रीय कर्मचारियों के पास यूपीएस में अप्लाई करने के लिए अब तीन महीने का समय है. यूपीएस को केंद्रीय कर्मचारियों के लिए 1 अप्रैल से लागू किया गया है. अभी तक सभी कर्मचारियों का कॉन्ट्रीब्यूशन नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में हो रहा है. NPS एक मार्केट पर आधारित स्कीम है, वहीं UPS गारंटीड पेंशन देने वाली स्कीम है. दोनों में से किसी एक स्कीम के चुनाव का फैसला उनके रिटायरमेंट के बाद की लाइफ पर सीधेतौर पर असर डालेगा. ऐसे में कर्मचारियों के दिमाग में ये कन्फ्यूजन बना हुआ है कि उन्हें कौन सी स्कीम को चुनना चाहिए? क्या एनपीएस में ही बने रहना चाहिए या यूपीएस में स्विच कर लेना चाहिए? यहां जानिए दोनों स्कीम्स के नफा-नुकसान, ताकि आप भविष्य के लिए सही डिसीजन ले सकें.
UPS का फायदा ये हैं कि इसके तहत 25 साल की सर्विस पूरी करने के बाद केंद्रीय कर्मचारियों को आखिरी सैलरी का कम से कम 50 फीसदी फिक्स पेंशन और एकमुश्त रकम मिलेगी. एनपीएस में फिक्स्ड पेंशन वाला सिस्टम नहीं है. UPS में भी NPS की तरह कर्मचारियों को सैलरी का 10% कॉन्ट्रीब्यूशन देना होगा, लेकिन सरकार का इस स्कीम में कॉन्ट्रीब्यूशन 18.5 फीसदी होगा, जबकि एनपीएस में सरकार का कॉन्ट्रीब्यूशन 14 फीसदी है. UPS से मिलने वाली पेंशन में महंगाई दर के हिसाब से इजाफा भी किया जाएगा, जबकि NPS में ये फायदा नहीं है.
UPS के तहत मिलने वाली मासिक पेंशन आपकी आय मानी जाएगी और इस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. रिटायरमेंट पर मिलने वाली एकमुश्त रकम पर टैक्स कैसे लगेगा, इस पर अभी तक स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है.
UPS की गारंटी आकर्षक लग सकती है, लेकिन NPS को पूरी तरह खारिज करने से पहले इसके फायदों को भी जान लें. NPS एक इन्वेस्टमेंट-कम-पेंशन प्लान है, जिसके अपने खास फायदे हैं:
चूंकि NPS का पैसा इक्विटी (शेयर बाजार), सरकारी बॉन्ड और कॉर्पोरेट डेट में लगाया जाता है, इसलिए इसमें लंबे समय में एक बहुत बड़ा रिटायरमेंट फंड बनाने की क्षमता है. अगर बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है, तो आपका रिटर्न UPS की गारंटीड पेंशन से कहीं ज्यादा हो सकता है.
NPS टैक्स बचाने का एक बेहतरीन जरिया है. कैसे? समझिए-
रिटायरमेंट पर हाथ में आने वाले पैसे पर टैक्स कैसे लगेगा, ये समझना बहुत जरूरी है. रिटायरमेंट पर आप कुल जमा फंड का 60% हिस्सा एकमुश्त निकाल सकते हैं, और ये रकम पूरी तरह टैक्स-फ्री होती है. बाकी 40% हिस्से से आपको एन्युटी (Annuity) प्लान खरीदना होता है, जिससे आपको जीवन भर पेंशन मिलती है. इस पेंशन पर आपकी इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है.
रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए कौन सा विकल्प बेहतर है, यह समझने के लिए पहले दोनों के बीच के बुनियादी अंतर को जानना जरूरी है.
| फीचर (Feature) | यूनिफाइड पेंशन स्कीम (UPS) | नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) |
| पेंशन का प्रकार | फिक्स्ड और गारंटीड पेंशन का प्रावधान | पेंशन की रकम बाजार से मिलने वाले रिटर्न पर निर्भर करती है, कोई गारंटी नहीं. |
| कर्मचारी का योगदान | बेसिक सैलरी का 10% | बेसिक सैलरी का 10% |
| सरकार का योगदान | 18.5% (ज्यादा योगदान) | 14% |
| महंगाई से सुरक्षा | पेंशन में महंगाई दर (DA) के हिसाब से बढ़ोतरी होगी. | पेंशन में महंगाई के हिसाब से बढ़ोतरी का कोई प्रावधान नहीं है. |
| न्यूनतम सर्विस | 25 साल की सर्विस पूरी करने पर आखिरी सैलरी का कम से कम 50% फिक्स पेंशन और एकमुश्त रकम. | ऐसी कोई शर्त नहीं है, आपका फंड आपके योगदान और रिटर्न पर निर्भर करता है. |
इसका कोई सीधा जवाब नहीं है. ये पूरी तरह से आपकी उम्र, वित्तीय लक्ष्य और जोखिम लेने की क्षमता पर निर्भर करता है.