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क्रेडिट रिपोर्ट में दिखने लगे 'Written Off' तो तुरंत जो जाएं अलर्ट.
अक्सर जब हम अपनी सिबिल (CIBIL) रिपोर्ट चेक करते हैं और वहां किसी पुराने लोन के आगे 'Written Off' लिखा देखते हैं, तो एक पल के लिए राहत मिलती है कि चलो "हिसाब बराबर" हो गया. लेकिन ठहरिए, यह राहत बहुत महंगी पड़ सकती है. ये आपके सिबिल स्कोर में 7 सालों तक दिखता रह सकता है.
बैंकिंग की भाषा में 'रिटेन ऑफ' का मतलब "माफी" नहीं, बल्कि "भरोसा टूटना" है. इसका सीधा असर आपके आने वाले कल की आर्थिक जरूरतों पर पड़ता है. आइए, इस गंभीर विषय को विस्तार से समझते हैं और जानते हैं कि आप अपनी बिगड़ी हुई साख को वापस कैसे पा सकते हैं.
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जब कोई व्यक्ति अपने लोन या क्रेडिट कार्ड की किस्तें (EMI) लगातार 180 दिनों या उससे अधिक समय तक नहीं भरता, तो बैंक उसे 'नॉन-परफॉर्मिंग एसेट' (NPA) मान लेता है.
बैंक का नजरिया: बैंक यह मान लेता है कि अब इस पैसे की वसूली की उम्मीद ना के बराबर है.
अकाउंटिंग ट्रिक: बैंक अपने वित्तीय घाटे को साफ दिखाने के लिए उस रकम को 'रिटेन ऑफ' कर देता है.
कानूनी हकीकत: बैंक ने भले ही इसे फाइलों में नुकसान लिख दिया हो, लेकिन आप कानूनी रूप से उस पैसे को चुकाने के लिए अब भी जिम्मेदार हैं. रिकवरी एजेंसियां आपसे कभी भी पैसों की वसूली के लिए संपर्क कर सकती हैं.
सिबिल रिपोर्ट में यह स्टेटस एक 'कलंक' की तरह काम करता है:
स्कोर में भारी गिरावट: आपका क्रेडिट स्कोर एक झटके में 100 पॉइंट या उससे भी ज्यादा नीचे गिर सकता है.
7 साल का वनवास: यह स्टेटस आपकी रिपोर्ट में लगभग 7 सालों तक बना रहता है.
लोन मिलने में बाधा: कोई भी प्रतिष्ठित बैंक आपको होम लोन या पर्सनल लोन देने से कतराएगा. अगर कोई छोटा संस्थान लोन देगा भी, तो उसकी ब्याज दरें बहुत ज्यादा होंगी.
Settled का मतलब है आपने बैंक से कम रकम देकर मामला खत्म कर लिया है. वहीं Written Off का मतलब है कि बैंक ने खुद लोन को डूबा हुआ मान लिया है. दोनों ही आपके क्रेडिट स्कोर के लिए खराब हैं, लेकिन Written Off ज्यादा नेगेटिव माना जाता है.
इन दोनों के बीच का अंतर जानना आपके लिए बहुत जरूरी है:
| Written Off | बैंक ने वसूली की उम्मीद छोड़कर इसे 'नुकसान' मान लिया. | सबसे खराब - आप पूरी तरह डिफॉल्टर माने जाते हैं. |
| Settled | आपने बैंक से मोलभाव किया और कुछ हिस्सा देकर मामला खत्म किया. | खराब - बैंक को नुकसान हुआ, भविष्य में लोन मिलना मुश्किल. |
| Closed/Paid | आपने ब्याज समेत पूरी बकाया राशि चुका दी. | बेहतर - आपका स्कोर धीरे-धीरे सुधरने लगेगा. |
अगर आपकी रिपोर्ट में यह स्टेटस आ गया है, तो डरें नहीं, सुधार की प्रक्रिया आज ही शुरू करें:
पूरी रिपोर्ट देखें: सिबिल की आधिकारिक वेबसाइट से अपनी रिपोर्ट निकालें और देखें कि किस बैंक का कितना 'प्रिंसिपल' और 'ब्याज' बकाया है.
बैंक से संपर्क (Negotiation): संबंधित बैंक की 'रिकवरी ब्रांच' में जाएं. उन्हें अपनी वित्तीय स्थिति बताएं और 'Full and Final' भुगतान की इच्छा जताएं.
एकमुश्त भुगतान: कोशिश करें कि 'सेटलमेंट' के बजाय आप पूरा पैसा चुकाएं. इससे आपका स्टेटस 'Written Off Paid' हो जाएगा, जो कि भविष्य के लिए बहुत अच्छा है.
NOC प्राप्त करें: पैसा चुकाने के बाद बैंक से 'No Dues Certificate' (NOC) लेना न भूलें. यह आपका सबसे बड़ा कानूनी सबूत है.
सिबिल अपडेट: बैंक से कहें कि वे 30 दिनों के भीतर आपकी जानकारी सिबिल को भेजें. यदि 45 दिनों बाद भी स्टेटस नहीं बदलता, तो सिबिल पोर्टल पर 'Dispute' दर्ज करें.
एक अच्छी क्रेडिट प्रोफाइल बनाने में सालों लग जाते हैं, लेकिन एक 'Written Off' स्टेटस उसे चंद मिनटों में बर्बाद कर सकता है. अगर अतीत में कोई गलती हुई है, तो उसे सुधारने का सबसे सही समय 'अभी' है. पूरा पैसा चुकाकर अपनी साख वापस पाना ही सबसे समझदारी भरा निवेश है.
1- क्या 'Written Off' होने के बाद बैंक मुझे परेशान करना बंद कर देगा?
नहीं, बैंक अपनी रिकवरी की कोशिशें या कानूनी कार्रवाई जारी रख सकता है.
2- क्या सेटलमेंट करना सिबिल सुधारने का अच्छा तरीका है?
नहीं, सेटलमेंट से सिबिल स्कोर में सुधार नहीं होता. हमेशा 'Full Payment' को प्राथमिकता दें.
3- NOC मिलने के बाद स्कोर कितने दिन में बढ़ता है?
बैंक द्वारा डेटा अपडेट करने के बाद आमतौर पर 3 से 6 महीनों में स्कोर में सुधार दिखना शुरू होता है.
4- क्या मैं 7 साल तक इंतजार करके इसे खुद हटने दे सकता हूं?
7 साल बाद यह रिपोर्ट से हट सकता है, लेकिन उस बैंक के साथ आपका रिश्ता हमेशा के लिए खत्म हो जाएगा और दूसरे बैंक भी पुराने रिकॉर्ड देखकर कतराएंगे.
5- क्या इसके रहते मुझे क्रेडिट कार्ड मिल सकता है?
साधारण क्रेडिट कार्ड मिलना मुश्किल है, लेकिन आप FD (Fixed Deposit) के बदले क्रेडिट कार्ड लेकर अपना स्कोर सुधारना शुरू कर सकते हैं.
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