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भारत में महंगी धातुओं की खरीद के लिए धनतेरस को शुभ-मुहूर्त माना जाता है. (रॉयटर्स)
धनतेरस से पहले सर्राफा बाजार में इस बार हल्की ज्वेलरी की खास तैयारी है, क्योंकि सोने और चांदी के आसमान छूते दाम से हल्के आभूषणों में कस्टमर्स की दिलचस्पी ज्यादा रहने की उम्मीद है. भारत में महंगी धातुओं की खरीद के लिए धनतेरस को शुभ-मुहूर्त माना जाता है. धनतेरस और पुष्य नक्षत्र के अवसर पर पूरे साल में सबसे ज्यादा सोने और चांदी और हीरे के आभूषणों की खरीद होती है.
जयपुर के आभूषण कारोबारी सुशील मेघराज ने बताया कि हर साल की तरह इस बार भी धनतेरस से पहले गुलाबी शहर का सर्राफा बाजार सज चुका है और ग्राहकों का इंतजार किया जा रहा है. खास तैयारी को लेकर पूछे गए सवाल पर मेघराज ने कहा, "पिछले साल के मुकाबले इस साल सोने-चांदी के भाव काफी ऊंचे हैं, इसलिए ग्राहकों के बजट को ध्यान में रखते हुए हल्के आभूषणों की खास तैयारी की गई है और मेकिंग पर 15-25 फीसदी तक की छूट की पेशकश की जा रही है."
ज्वेलरी कारोबारियों ने बताया कि सोने और चांदी के हल्के आभूषणों के अट्रैक्टिव डिजाइन तैयार किए गए हैं. जेम एंड ज्वेलरी ट्रेड काउंसिल ऑफ इंडिया (जीजेटीसीआई) के प्रेसिडेंट शांति भाई पटेल ने बताया कि ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए आभूषण कारोबारियों ने अहमदाबाद में सोने के आभूषणों की मेकिंग पर 50 फीसदी तक छूट की पेशकश की है. उन्होंने कहा, "धनतेरस से पहले 22 अक्टूबर को पुष्य नक्षत्र है, जिसे महंगी धातु खरीद के लिए शुभ मुहूर्त माना जाता है. इसलिए सर्राफा बाजार में ग्राहकों की चहलकदमी पूरे सप्ताह बनी रहेगी."
(रॉयटर्स)
पटेल ने कहा कि इस बार हल्के आभूषणों के साथ-साथ सोने और चांदी के सिक्कों की बिक्री ज्यादा होने की उम्मीद है. पिछले महीने सोने का भाव देश के सर्राफा बाजार में 40,000 रुपये प्रति 10 ग्राम से ऊपर चला गया था, जबकि चांदी का भाव 50,000 रुपये प्रति किलो को पार कर गया था. हालांकि हाल के दिनों में इंटरनेशनल मार्केट में सोने-चांदी का भाव टूटने के बाद घरेलू बाजार में भी महंगी धातुओं के दाम में गिरावट आई है.
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कमोडिटी बाजार विश्लेषकों का मानना है कि गिरावट पर लिवाली जोर पकड़ेगी, जिससे धनतेरस पर देश के सर्राफा बाजार में खूब रौनक देखने को मिलेगी. केडिया एडवायजरी के डायरेक्टर अजय केडिया ने कहा कि जियोपॉलिटक टेंशन के कारण सोने और चांदी के भाव को लगातार सपोर्ट मिल रहा है, लेकिन घरेलू बाजार में 12.5 फीसदी आयात शुल्क और तीन फीसदी जीएसटी के कारण दाम ऊंचा हो जाता है, लेकिन त्योहारी सीजन की मांग फिर भी बनी रहेगी क्योंकि आगे शादी का सीजन है जिसके लिए लोग धनतेरस के शुभ मुर्हूत पर खरीदारी करना चाहेंगे.
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