&format=webp&quality=medium)
रूम रेंट बढ़ने की वजह से आपके बाकी कई खर्चे भी बढ़ जाते हैं.
हम अक्सर हेल्थ इंश्योरेंस लेते समय सिर्फ 'सम एश्योर्ड' (कुल बीमा राशि) देखते हैं. हमें लगता है कि अगर 10 लाख का बीमा है, तो 10 लाख तक का कोई भी बिल कंपनी भरेगी. लेकिन अधिकतर लोग रूम रेंट पर ध्यान नहीं देते और जब क्लेम लेने जाते हैं तो पता चलता है कि बहुत सारे पैसे तो जेब से जाएंगे. इतना ही नहीं, रूम रेंट बढ़ने की वजह से आपके बाकी कई खर्चे भी बढ़ जाते हैं.
ऐसे मामलों में इंश्योरेंस कंपनी सिर्फ रूम रेंट का अंतर ही क्लेम से नहीं काटती है, बल्कि डॉक्टर की फीस, सर्जरी का खर्च और नर्सिंग चार्ज तक में भारी कटौती देखने को मिलती है. दरअसल, रूम रेंट बढ़ने के साथ ही ये सारे खर्चे भी बढ़ जाते हैं. इसे कहते हैं 'प्रोपोर्शनल डिडक्शन'. यानी अगर आपने सिंगल प्राइवेट रूम के बजाय डीलक्स एसी रूम ले लिया तो आपक भारी नुकसा हो सकता है. आइए जानते हैं कि यह खेल आखिर काम कैसे करता है.
हेल्थ इंश्योरेंस में यह क्लॉज यह तय करता है कि अस्पताल में भर्ती होने पर आप किस कैटेगरी के कमरे के हकदार हैं. आसान भाषा में, अस्पताल के कमरों को इन कैटेगरी में बांटा जाता है:
जनरल वार्ड (General Ward): एक बड़ा कमरा जहां कई बेड होते हैं और पर्दों से प्राइवेसी दी जाती है.
शेयर्ड रूम (Shared Room): एक कमरे में 2-3 बेड होते हैं.
सिंगल प्राइवेट एसी रूम (Single Private AC Room): एक प्राइवेट कमरा, जो पूरी तरह आपका होता है.
कोई सीमा नहीं (Any Category): आप सुईट या डीलक्स रूम भी ले सकते हैं, कंपनी पूरा पैसा देगी.
यानी अगर आपकी पॉलिसी में लिखा है कि आप 'सिंगल प्राइवेट एसी रूम' के हकदार हैं, तो आप वह कमरा या उससे सस्ता कमरा ले सकते हैं- कंपनी पूरा पैसा देगी. लेकिन जैसे ही आप उससे ऊपर (जैसे सुइट) जाते हैं, मुसीबत शुरू हो जाती है.
मान लीजिए आपकी पॉलिसी में कमरे की लिमिट ₹6000 प्रतिदिन है. लेकिन आपने ₹15,000 प्रतिदिन वाला सुईट चुन लिया. यहां अंतर ₹9000 का है. आपको लगेगा कि 5 दिन रहने पर आपको सिर्फ ₹45000 (9000 x 5) अतिरिक्त देने होंगे. यहीं आप गलती कर रहे हैं!
तमाम अस्पताल अपने खर्चों को कमरे की कैटेगरी से जोड़ देते हैं. सुईट में रहने वाले मरीज के लिए डॉक्टर की विजिट फीस ₹2000 हो सकती है, जबकि जनरल वार्ड वाले के लिए वही फीस ₹500 होगी.
जब आप महंगा कमरा चुनते हैं, तो इंश्योरेंस कंपनी आनुपातिक कटौती (Proportional Deduction) लागू करती है. कंपनी कहेगी- "चूंकि आपने अपनी लिमिट से 2.5 गुना महंगा कमरा लिया, इसलिए हम आपके डॉक्टर की फीस और ऑपरेशन के खर्च में भी उसी अनुपात में कटौती करेंगे." नतीजा? आपको हजारों या लाखों रुपये अपनी जेब से भरने पड़ेंगे.
Zee Business Hindi Live TV यहां देखें
पॉलिसी खरीदते समय और अस्पताल जाते समय इन बातों का ध्यान रखें:
रूम रेंट चेक करें: पॉलिसी लेने से पहले ये तय कर लें कि आपको कौन से रूम वाली पॉलिसी चाहिए. फिर जब भी आप अस्पताल में भर्ती हों तो ध्यान रखें कि आपकी पॉलिसी में कौन सी कैटेगरी तक का रूम लेने की इजाजत है, उससे ऊपर ना जाएं.
नो रूम रेंट कैपिंग (No Room Rent Capping): अगर आप रूम रेंट के झंझट से बचना चाहते हैं तो हमेशा ऐसी पॉलिसी चुनें, जिसमें कमरे के किराए की कोई सीमा न हो. हालांकि, ऐसी पॉलिसियों का प्रीमियम थोड़ा ज्यादा हो सकता है.

ICU कैपिंग चेक करें: कई बार कमरे पर तो कैपिंग नहीं होती, लेकिन ICU के किराए पर कैपिंग होती है. इसे ध्यान से पढ़ें.
फाइन प्रिंट (Fine Print) पढ़ें: पॉलिसी के कागजों में 'Proportional Deduction' शब्द को ढूंढें. अगर यह है, तो समझ लीजिए कि महंगा कमरा लेना खतरे से खाली नहीं है. अगर ये नहीं भी है तो भी अगर अस्पताल ने महंगे कमरे के ज्यादा चार्ज लिए हैं तो क्लेम के वक्त इंश्योरेंस कंपनी वह पैसे चुकाने से मना कर सकती है.
अस्पताल में पूछें: भर्ती होते समय अस्पताल के रिसेप्शन पर अपनी पॉलिसी दिखाएं और पूछें कि "मेरी लिमिट के हिसाब से कौन सा कमरा मुझे बिना एक्स्ट्रा चार्ज के मिलेगा?"
हेल्थ इंश्योरेंस का मतलब सिर्फ प्रीमियम भरना नहीं है, बल्कि अपनी 'पात्रता' (Entitlement) को समझना भी है. अगर आपके पास पुरानी पॉलिसी है, तो आज ही उसे चेक करें. अगर उसमें रूम रेंट लिमिट है, तो उसे 'टॉप-अप' या 'पोर्ट' करवाकर 'नो कैपिंग' वाली पॉलिसी में बदल लें. याद रखिए, अस्पताल का कमरा आराम के लिए होता है, लेकिन वह इतना महंगा नहीं होना चाहिए कि आपके इलाज का पैसा ही खत्म कर दे.
(ताजा खबरों के लिए आप हमारे WhatsApp Channel को सब्सक्राइब जरूर करें)
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या रूम रेंट लिमिट सभी पॉलिसियों में होती है?
नहीं, आजकल कई मॉडर्न प्लान 'नो रूम रेंट कैपिंग' के साथ आते हैं. पुरानी या सस्ती पॉलिसियों में अक्सर यह लिमिट (आमतौर पर सम एश्योर्ड का 1%) होती है.
Q2 'सिंगल प्राइवेट रूम' और 'सुइट' में क्या अंतर है?
सिंगल प्राइवेट रूम एक स्टैंडर्ड कमरा होता है, जबकि सुइट में एक अतिरिक्त लिविंग एरिया, सोफा और ज्यादा सुविधाएं होती हैं.
Q3 क्या पोर्टेबिलिटी के जरिए मैं अपनी रूम रेंट लिमिट हटा सकता हूं?
हां, आप अपनी मौजूदा पॉलिसी को दूसरी कंपनी में पोर्ट कर सकते हैं जो 'नो रूम रेंट कैपिंग' की सुविधा देती हो.
Q4 क्या दवाइयों के खर्च पर भी रूम रेंट की वजह से कटौती होती है?
आमतौर पर दवाइयों (Pharmacy) और कंज्यूमेबल्स पर आनुपातिक कटौती नहीं होती, क्योंकि उनकी एमआरपी फिक्स होती है.
Q5 अगर अस्पताल में मेरी लिमिट वाला कमरा खाली न हो तो क्या करें?
ऐसी स्थिति में अस्पताल से लिखित में लें कि कमरा उपलब्ध नहीं था, या फिर इंश्योरेंस कंपनी के कस्टमर केयर को तुरंत सूचित करें.