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भारत में टेक्नोलॉजी के माध्यम से महिलाओं के सशक्तिकरण के प्रयासों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिल रही है. एमआईटी स्लोन स्कूल ऑफ मैनेजमेंट के सीनियर स्पीकर जोनाथन फ्लेमिंग ने भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के पूसा परिसर का दौरा किया और ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत महिलाओं द्वारा किए जा रहे कार्यों की सराहना की. फ्लेमिंग ने योजना से लाभ उठा रही महिलाओं से बातचीत के बाद कहा कि मैं यह देखकर उत्साहित हूं कि भारत महिला सशक्तिकरण के लिए प्रौद्योगिकी का उपयोग कैसे कर रहा है. यह पहल न केवल ग्रामीण भारतीय महिलाओं के लिए बल्कि अन्य देशों के लिए भी प्रेरणा है.
आईसीएआर पूसा परिसर के दौरे के दौरान, जोनाथन फ्लेमिंग ने चार महिला प्रतिभागियों—गीता, सीता, प्रियंका और हेमलता द्वारा ड्रोन तकनीक के प्रयोग का प्रत्यक्ष प्रदर्शन देखा. इन महिलाओं ने खेतों में उर्वरकों और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया. इस तकनीक से खेती में न केवल समय की बचत होती है बल्कि उत्पादकता भी बढ़ती है. बातचीत के दौरान, महिलाओं ने बताया कि ‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना ने उन्हें न सिर्फ ड्रोन तकनीक सीखने का अवसर दिया बल्कि वित्तीय सहायता भी प्रदान की. उन्होंने अपनी आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार का जिक्र किया और ‘ड्रोन दीदी’ के रूप में अपनी नई पहचान पर गर्व जताया.
‘नमो ड्रोन दीदी’ योजना के तहत सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को ड्रोन उड़ाने की मुफ्त ट्रेनिंग देती है और ड्रोन खरीदने पर सब्सिडी तथा किफायती दरों पर लोन उपलब्ध कराती है. इस योजना के अंतर्गत ड्रोन की खरीद पर महिला स्वयं सहायता समूहों को 80% तक सब्सिडी या अधिकतम 8 लाख रुपए की सहायता दी जाती है. ड्रोन की शेष लागत के लिए कृषि अवसंरचना कोष (AIF) से ऋण सुविधा दी जाती है, जिस पर मात्र 3% ब्याज दर लागू होती है. ड्रोन तकनीक के उपयोग से महिला समूह हर साल अतिरिक्त 1 लाख रुपए तक की कमाई कर सकते हैं.