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नवरात्रि 22 सितंबर से शुरू हो रहे हैं, इसके बाद करवाचौथ, दिवाली, भाई दूज वगैरह तमाम बड़े त्योहार हैं. इन त्योहारों के मौके पर सोना खरीदने का चलन है. भारत में सोने को सिर्फ एक धातु नहीं माना जाता, बल्कि ये इमोशंस, निवेश और भविष्य की सुरक्षा का प्रतीक है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि अपनी मेहनत की कमाई से खरीदा हुआ सोना कितना शुद्ध है? हालांकि आजकल इसे परखने के लिए हॉलमार्क की व्यवस्था की गई है, लेकिन हॉलमार्किंग भी कई बार नकली होने के मामले सामने आते रहे हैं. ऐसे में आप ये कैसे पता लगाएंगे कि सोना जितने कैरेट का बताया जा रहा है, उतने कैरेट का है भी या नहीं. यहां जानिए वो 5 तरीके जो फेस्टिव सीजन में गोल्ड खरीदने में आपकी मदद करेंगे और आपको Smart Gold Buyer बनाएंगे.
24 कैरेट सोने को सबसे शुद्ध माना जाता है, लेकिन इससे गहने नहीं बनते क्योंकि ये बहुत नरम होता है. सरकार के नियम के मुताबिक, ज्वेलर्स को सोने के गहने बेचने के लिए BIS स्टैंडर्ड के मानकों को पूरा करना होता है. साथ ही, सरकार ने ये भी साफ कर दिया है कि हॉलमार्क अनिवार्य होने के बाद देश में सिर्फ 14, 18 और 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी ही बिकेगी. इसका मतलब ये है कि अगर आप ज्वेलरी खरीदने जाते हैं तो वो आपको सामान्यत- इन्हीं तीन कैरेट में मिलेगी. 24 कैरेट के बिस्कुट या सिक्के मिल सकते हैं, पर ज्वेलरी नहीं.

बता दें कि सोने की आसमान छूती कीमतों को देखकर लोग अब इससे भी कम कैरेट के सोने की डिमांड कर रहे हैं, ऐसे में 9 कैरेट के सोने की मांग भी काफी बढ़ी है. इसको देखते हुए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने कुछ वक्त पहले ऐलान किया है कि अब 9 कैरेट सोने के गहनों पर भी हॉलमार्किंग अनिवार्य होगी. BIS ने 9 कैरेट सोने को अनिवार्य हॉलमार्किंग श्रेणियों की सूची में शामिल कर लिया है. ये नियम इसी जुलाई से लागू हो गया है.
22 कैरेट सोने पर 916 लिखा होता है (मतलब 91.66% सोना)
18 कैरेट सोने पर 750 लिखा होता है (मतलब 75% सोना)
14 कैरेट सोने पर 585 लिखा होता है (मतलब 58.3% सोना)
9 कैरेट सोने पर 375 लिखा होता है (मतलब 37.5% सोना)
ये अंक देखकर आप पहचान सकते हैं कि सोना कितने कैरेट का है और उसमें कितने प्रतिशत शुद्ध सोना मिला हुआ है. बाकी हिस्सा अन्य धातुओं (जैसे तांबा, चांदी) का होता है, जिन्हें मिलाकर गहने मजबूत बनाए जाते हैं.
भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) ने एक खास ऐप बनाया है, जिसका नाम है BIS Care App. इसकी मदद से आप ज्वेलरी की शुद्धता को खुद जांच सकते हैं.

सोना खरीदने के बाद हमेशा पक्की रसीद (बिल) जरूर लें. इस रसीद पर सोने का वजन, कैरेट, हॉलमार्किंग डीटेल, HUID नंबर, मेकिंग चार्ज और सोने की कीमत साफ-साफ लिखी होनी चाहिए. ये रसीद आपके लिए एक कानूनी दस्तावेज का काम करती है और भविष्य में किसी भी विवाद की स्थिति में आपके काम आएगी.
A1: हॉलमार्किंग सोने की शुद्धता का सरकारी प्रमाण है, जो भारत में BIS (ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड) द्वारा दिया जाता है.
A2: 24 कैरेट सोना 100% शुद्ध होता है, लेकिन बहुत नरम होने की वजह से इससे गहने नहीं बनाए जा सकते. ज्वेलरी के लिए इसमें अन्य धातुएं मिलानी पड़ती हैं ताकि वो मजबूत बने.
A3: भारत में सरकारी नियमों के अनुसार, सिर्फ 14, 18 और 22 कैरेट सोने की ज्वेलरी ही बेची जाती है. लेकिन अब 9 कैरेट की भी हॉलमार्क वाली ज्वेलरी मिलेगी.
A4: HUID (हॉलमार्क यूनीक आइडेंटिफिकेशन) 6 अंकों का एक कोड होता है जो हर हॉलमार्क ज्वेलरी पर होता है. ये हर पीस के लिए यूनीक होता है और सोने की शुद्धता की पहचान करने में मदद करता है.
A5: BIS Care App को इंस्टॉल करके, रजिस्टर करें और फिर "Verify HUID" ऑप्शन में जाकर ज्वेलरी का HUID नंबर डालकर उसकी शुद्धता की जांच कर सकते हैं.