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45 की उम्र के बाद निवेश का सही तरीका: सिर्फ बचत ही काफी नहीं, कमाई बढ़ाना भी है जरूरी.
45 साल की उम्र ऐसी होती है जहां हमें लगता है कि अब निवेश के मामले में रिस्क नहीं लेना चाहिए. लेकिन अगर गौर करें तो 45 की उम्र कोई 'फिनिश लाइन' नहीं है, बल्कि यह तो आधी रेस है. आपके पास अभी भी रिटायर होने में करीब 15 साल का समय है. अब अगर आपने इन्हें अच्छे से इस्तेमाल कर लिया, तो बुढ़ापा मौज में कटेगा.
अगर आप सारा पैसा सिर्फ बैंक की एफडी (FD) या गुल्लक में डालकर रखेंगे, तो महंगाई आपके पैसों की ताकत कम कर देगी. जो चीज आज ₹100 की मिल रही है, वह 15 साल बाद ₹250 की मिलेगी. ऐसे में थोड़ा पैसा ऐसी जगह लगाना जरूरी है, जहां वह तेजी से बढ़े.
45 की उम्र में आपका फोकस 'पैसा बटोरने' से हटकर 'पैसा बचाने और सुरक्षित करने' पर होना चाहिए. लाइफ इंश्योरेंस आपके घर की उस 'नींव' की तरह है, जिसके बिना मकान गिर सकता है.
टर्म इंश्योरेंस एक ढाल है: जो आपके न होने पर परिवार को संभालेगा.
एन्युटी (Annuity) एक पक्की पेंशन है: जो 60 साल के बाद हर महीने आपके हाथ में पैसा देगी, ताकि आप किसी के आगे हाथ न फैलाएं.
जब आपकी सुरक्षा पक्की होती है, तभी आप बेफिक्र होकर म्यूचुअल फंड जैसी जगहों पर पैसा लगाकर उसे बढ़ा सकते हैं.
यहां 5 आसान बातें दी गई हैं जो आपके बुढ़ापे को संवार देंगी:
1. थोड़ा रिस्क, थोड़ी सुरक्षा (40:40:20 का फॉर्मूला)
अपने निवेश को 3 हिस्सों में बांटें:
40% सुरक्षा: बीमा और पेंशन वाली स्कीमें.
40% ग्रोथ: अच्छे म्यूचुअल फंड जो आपके पैसे को बढ़ाएं.
20% पक्की बचत: सोना या सरकारी बॉन्ड्स.
2. बीमा को हल्के में न लें
45 के बाद कभी भी तबीयत बिगड़ सकती है. इसलिए एक बढ़िया हेल्थ इंश्योरेंस और टर्म इंश्योरेंस जरूर लें. यह आपके बैंक बैलेंस को अस्पताल के बिलों से बचाएगा.
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3. शेयरों (Equity) से दोस्ती बनाए रखें
भले ही आप 45 के हो गए हैं, लेकिन सारा पैसा म्यूचुअल फंड से न निकालें. महंगाई से लड़ने के लिए शेयरों में पैसा रहना बहुत जरूरी है. अगर समझ न आए, तो किसी जानकार की सलाह लें.
4. सोने को 'सुरक्षा कवच' की तरह रखें
सोना मुश्किल समय का साथी है. पिछले कुछ समय में सोने के दाम बहुत बढ़े हैं. अपने पोर्टफोलियो में थोड़ा सोना जरूर रखें, ताकि जब शेयर बाजार गिरे, तो सोना आपको संभाल ले.
5. लालच से बचें और सीखते रहें
45 की उम्र में लोग जल्दी पैसा बनाने के चक्कर में गलत जगह फंस जाते हैं. 'द साइकोलॉजी ऑफ मनी' जैसी अच्छी किताबें पढ़ें. यह आपको समझाएंगी कि अमीर बनने से ज्यादा जरूरी 'अमीर बने रहना' है.

45 के बाद निवेश करने का मतलब है- थोड़ी सावधानी और थोड़ा भरोसा. अपनी मेहनत की कमाई को सुरक्षित करना तो जरूरी है ही, लेकिन उसे बढ़ाना भी उतना ही जरूरी है. किसी अच्छे वित्तीय सलाहकार (Financial Advisor) से बात करें. एक सही प्लान आपको बुढ़ापे में न केवल पैसे की आजादी देगा, बल्कि मानसिक शांति भी देगा. याद रखिए, आज का अनुशासन ही कल की चैन की नींद है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या 45 साल की उम्र निवेश शुरू करने के लिए बहुत देर वाली है?
बिल्कुल नहीं! अभी भी आपके पास कम से कम 15 साल हैं. आज से शुरू किया गया छोटा निवेश भी 60 की उम्र तक काफी बड़ा हो सकता है.
Q2 टर्म इंश्योरेंस और लाइफ इंश्योरेंस में क्या फर्क है?
टर्म इंश्योरेंस कम पैसों में बहुत बड़ा कवर देता है (केवल मृत्यु पर मिलता है), जबकि साधारण लाइफ इंश्योरेंस में बचत और सुरक्षा दोनों होती है, लेकिन कवर छोटा होता है.
Q3 क्या मुझे अपना सारा पैसा एफडी (FD) में डाल देना चाहिए?
नहीं. एफडी सुरक्षित है लेकिन उसका रिटर्न बहुत कम होता है. महंगाई को मात देने के लिए म्यूचुअल फंड का साथ जरूरी है.
Q4 एन्युटी (Annuity) प्लान कब लेना चाहिए?
आप इसे अभी ले सकते हैं या रिटायरमेंट के करीब पहुंचने पर. यह बुढ़ापे में 'पक्की पेंशन' की गारंटी देता है.
Q5 45 के बाद हेल्थ इंश्योरेंस लेना महंगा पड़ता है?
उम्र के साथ प्रीमियम बढ़ जाता है, इसलिए जितनी जल्दी हो सके इसे ले लेना चाहिए ताकि पुरानी बीमारियों का कवर भी मिल सके.