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अगर आप 10-15 साल तक SIP करते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव अपने आप संतुलित हो जाते हैं. (प्रतीकात्मक फोटो: AI)
जब शेयर बाजार गिरता है, तो ज्यादातर निवेशक घबरा जाते हैं. कई लोग अपनी SIP (Systematic Investment Plan) रोक देते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि पैसा डूब रहा है.
लेकिन सच इसके बिल्कुल उलट है. अगर आप SIP का यूनिट्स वाला गणित समझ लें, तो आपको पता चलेगा कि गिरता बाजार नुकसान नहीं बल्कि मौका होता है.
सरल भाषा में: NAV= एक यूनिट की कीमत
SIP में मिलने वाली यूनिट्स का फॉर्मूला बहुत आसान है:
यही असली खेल है.
उदाहरण देखें:
| NAV | निवेश | मिलने वाली यूनिट्स |
| ₹100 | ₹10,000 | 100 |
| ₹80 | ₹10,000 | 125 |
| ₹70 | ₹10,000 | 142 |
यहां ध्यान देने वाली बात:
मान लीजिए आपने 3 महीने SIP की:
| महीना | NAV | यूनिट्स |
| जनवरी | ₹100 | 100 |
| फरवरी | ₹80 | 125 |
| ₹70 | 142 |
अब औसत लागत:
यानी आपने ₹100, ₹80 और ₹70 पर निवेश किया, लेकिन आपकी औसत कीमत ₹81.7 रह गई.
इसे ही कहते हैं: Rupee Cost Averaging
अब मान लीजिए बाजार रिकवर होकर NAV फिर ₹100 पहुंच गया.
यानी गिरावट में खरीदी गई यूनिट्स ने आपको ज्यादा रिटर्न दिया.
निवेश की दुनिया में एक शब्द चलता है: Bear Market Bonus
मतलब:
इसलिए गिरता बाजार SIP निवेशकों के लिए “डिस्काउंट सेल” जैसा होता है.
ज्यादातर लोग:
यानी:
जबकि सही तरीका इसका उल्टा है:
SIP कभी भी बाजार के उतार-चढ़ाव देखकर बंद नहीं करनी चाहिए.
इसे बंद करने के सही कारण हैं:
SIP का असली फायदा:
अगर आप 10-15 साल तक SIP करते हैं, तो बाजार के उतार-चढ़ाव अपने आप संतुलित हो जाते हैं.
SIP सिर्फ निवेश नहीं, बल्कि एक डिसिप्लिन है.
अगर आप समझ लें कि:
तो आप कभी भी गिरावट में SIP बंद नहीं करेंगे. बल्कि उसी समय आप सबसे ज्यादा मजबूत निवेश कर रहे होते हैं.
Q1. SIP में यूनिट्स कैसे मिलती हैं?
A. निवेश राशि को NAV से भाग देने पर मिलने वाली संख्या यूनिट्स होती हैं.
Q2. गिरते बाजार में SIP क्यों फायदेमंद है?
A. क्योंकि कम NAV पर ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं.
Q3. Rupee Cost Averaging क्या है?
A. अलग-अलग कीमतों पर निवेश करके औसत लागत कम करना.
Q4. क्या गिरावट में SIP रोकनी चाहिए?
A. नहीं, यही समय ज्यादा यूनिट्स खरीदने का होता है.
Q5. SIP में सबसे बड़ा फायदा क्या है?
A. लंबी अवधि में कंपाउंडिंग और कम औसत लागत.