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हर महीने सैलरी आती है, लेकिन स्लिप को ज्यादातर लोग सिर्फ नेट सैलरी देखकर फेंक देते हैं.तो अब से गलती मत करिएगा...असल में आपकी सैलरी स्लिप में 5 ऐसी बातें छिपी हैं जो सही तरीके से समझोगे तो टैक्स में हजारों-लाखों बचा सकते हो, गलत कटौती पकड़ सकते हो और फ्यूचर प्लानिंग आसान हो जाएगी. असल में HR और टैक्स एक्सपर्ट बताते हैं कि 90% कर्मचारी इन 5 पॉइंट्स को इग्नोर करते हैं और बाद में पछताते हैं.तो बिना देरी किए आज हम आसान भाषा में बताते हैं वो 5 जरूरी बातें – इन्हें जान लोगे तो जेब हमेशा भरी रह सकती है.
सैलरी स्लिप में बेसिक 40-50% होती है, बाकी HRA, स्पेशल अलाउंस, कन्वेयंस वगैरह. ये इसलिए क्योंकि टैक्स और PF का हिसाब इसी पर होता है.तो अगर बेसिक कम दिखाई तो PF कम कटेगा, लेकिन ग्रेच्युटी और ओवरटाइम कम मिलेगा.ऐसे में नई जॉब जॉइन करते समय बेसिक ज्यादा रखवाओ – लॉन्ग टर्म में फायदा.
अगर आप किराए के मकान में रहते हो तो HRA पर टैक्स छूट मिल सकती है, असल में स्लिप में HRA अलग दिखता है.तो हर साल ITR भरते समय किराया रसीद और मकान मालिक का PAN दिखाओ तो हजारों-लाखों टैक्स बच जाता है. कई कंपनियां HRA नहीं देतीं, वो गलत है – सैलरी स्ट्रक्चर चेक करो.
स्लिप में Employee PF (12%) और Employer PF दिखता है. असल में एम्प्लॉयर का 12% में से 8.33% EPS (पेंशन) में जाता है, बाकी 3.67% आपके PF में जा सकता है.तो अगर सैलरी 50 हजार है तो हर महीने 1,800 रुपये पेंशन फंड में फ्री जा रहे हैं.कई लोग सोचते हैं पूरा 12% उनके अकाउंट में जाता है – गलत। EPS की लिमिट 15,000 पर है, इससे ऊपर वाली सैलरी वालों को फायदा मिल सकता है.
स्लिप में TDS कॉलम होता है। कंपनी हर महीने थोड़ा-थोड़ा टैक्स काटती है,तो अगर आप 80C, 80D, HRA में निवेश कर रहे हो और कंपनी को फॉर्म 12BB दिया तो TDS कम कटेगा. नहीं दिया तो साल के अंत में पूरा टैक्स देना पड़ सकता है.ऐसेमें हर तिमाही स्लिप चेक करो कि सही कट रहा है या नहीं.
सैलरी में फोन बिल, पेट्रोल, मेडिकल, LTA जैसी चीजें टैक्स-फ्री होती हैं,लेकिन इसके लिए बिल जमा करना पड़ता है.वैसे स्लिप में ये अलग दिखते हैं,इसलिए साल के अंत तक बिल नहीं दिया तो ये पैसा टैक्सेबल हो जाता है और अगले महीने की सैलरी से कट जाता है और लाखों लोग हर साल 50-60 हजार ऐसे गंवा देते हैं.
यही कारण है कि सैलरी स्लिप कोई कागज का टुकड़ा नहीं, आपका पैसा बचाने का टूल है, हर महीने 2 मिनट निकालकर चेक करो – गलत कटौती पकड़ो, निवेश प्लान करो और टैक्स बचाओ,और नई जॉब या अप्रेजल के समय सैलरी स्ट्रक्चर जरूर देखो. ये 5 बातें जान लीं तो जिंदगी भर के हजारों-लाखों रुपये बच जाएंगे(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी से सलाह लें)
Top 5 FAQs
1. क्या सैलरी स्लिप में बेसिक और अलाउंस अलग दिखाना जरूरी है?
हाँ, क्योंकि PF, ग्रेच्युटी और टैक्स की पूरी गणना इन्हीं पर होती है, बेसिक कम होने से PF कम कटेगा लेकिन लॉन्ग-टर्म बेनिफिट्स घट जाते हैं.
2. क्या HRA से टैक्स बचत होती है?
हाँ, किराये के घर में रहने पर HRA पर टैक्स छूट मिलती है, PAN व रेंट रसीद देकर हजारों–लाखों टैक्स बचाया जा सकता है.
3. PF और EPS में क्या फर्क है?
एम्प्लॉयर PF का 8.33% EPS (पेंशन फंड) में जाता है और बाकी PF में.कई लोग गलती से मान लेते हैं कि पूरा 12% PF में ही जाता है.
4. क्या TDS स्लिप में देखना जरूरी है?
बिल्कुल, अगर फॉर्म 12BB नहीं दिया तो TDS ज्यादा कटता है, सही कटौती देखने से साल के अंत में भारी टैक्स भरने से बचा जा सकता है/
5. रीइंबर्समेंट का पैसा कब कट जाता है?
फोन, LTA, मेडिकल, पेट्रोल जैसे रीइंबर्समेंट के बिल समय पर न देने पर यह राशि टैक्सेबल हो जाती है और अगली सैलरी से कट जाती है.
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