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आज के टाइम में भारत में केवल 29% कर्मचारी अपनी सैलरी से खुश हैं (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
भारत में बड़ी संख्या में कर्मचारी अपनी मौजूदा सैलरी से हैप्पी नहीं हैं और आने वाले 12 महीनों में वेतन बढ़ोतरी की मांग करने की तैयारी कर रहे हैं. यह जानकारी Association of Chartered Certified Accountants की एक सर्वे रिपोर्ट में सामने आई है.
एनआई की वेबसाइट पर रिपोर्ट के मुताबिक भारत में केवल 29 प्रतिशत कर्मचारी ही अपनी मौजूदा सैलरी से हैप्पी हैं. वहीं बड़ी संख्या में लोग बढ़ती महंगाई और जीवनयापन की लागत को लेकर चिंतित हैं.
इस चौंकाने वाली रिपोर्ट में बताया गया है कि साल 2026 में भी दुनियाभर के कर्मचारियों के लिए 'महंगाई' काम से जुड़ी सबसे बड़ी चिंताओं में से एक बनी हुई है. भारतीय कर्मचारियों के लिए यह दूसरी सबसे बड़ी चिंता है.असल में भारत में सबसे बड़ा डर 'टेक्नोलॉजी की वजह से नौकरी चले जाना' है और उसके ठीक बाद बढ़ता खर्च (Cost of living) आता है.
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आपको बता दें कि सैलरी बढ़ाने की मांग करने की सबसे ज्यादा इच्छा 'मिलेनियल्स' में देखी गई है, जिनमें से 90% लोग अगले एक साल में इंक्रीमेंट की मांग करेंगे. इसके मुकाबले Gen Z के 77% और 'जेन एक्स' (Gen X) के 75% लोग सैलरी बढ़ाने की मांग करने की योजना बना रहे हैं.
भारतीय कर्मचारियों की सैलरी को लेकर उम्मीदें ग्लोबल औसत से काफी अधिक हैं. भारत में करीब 68% कर्मचारी 10% से ज्यादा की बढ़त की उम्मीद कर रहे हैं, जबकि ग्लोबल स्तर पर यह औसत केवल 37% है। 10% से ज्यादा की बढ़त की उम्मीद रखने वालों में 'जेन एक्स' (76%) सबसे आगे हैं, इसके बाद 'जेन जेड' (60%) और 'मिलेनियल्स' (55%) का नंबर आता है.
इस रिपोर्ट के मुताबिक कंपनियों पर अब बढ़ती Salary Expectations को संभालने का दबाव बढ़ रहा है. असल में कंपनियों को मुनाफे और कर्मचारियों को बनाए रखने की प्लानिंग के बीच बैलेंस बनाना पड़ रहा है.
आपको बता दें कि रिपोर्ट के मुताबिक, कर्मचारियों के लिए पैसा (Compensation) सबसे महत्वपूर्ण फैक्टर बना हुआ है. खासकर युवा प्रोफेशनल 'इन-हैंड सैलरी' पर ज्यादा फोकस कर रहे हैं.हालांकि, जो लोग अपने करियर के बीच वाले पड़ाव पर हैं, वे अब सैलरी के साथ-साथ काम के महत्व को भी बराबर तवज्जो दे रहे हैं.तो अब कंपनियों के सामने चुनौती यह है कि वे बढ़ती सैलरी की मांग और अपनी प्रॉफिटेबिलिटी के बीच कैसे तालमेल बैठाती हैं.
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