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30 की उम्र आते-आते ज़िंदगी थोड़ा सेट लगने लगती है. हाथ में अच्छी नौकरी है, हर महीने सैलरी आ रही है, दोस्त घूमने जा रहे हैं और घर की ईएमआई (EMI) भी चल रही है. ऐसे में मन में अक्सर एक ही ख्याल आता है- "अभी तो बहुत टाइम है, रिटायरमेंट के बारे में बाद में देख लेंगे."
लेकिन क्या आप जानते हैं कि यही सोच आगे चलकर आपकी सबसे बड़ी भूल साबित हो सकती है? जो छोटी-छोटी गलतियां आज आपको हल्की लगती हैं, वही 60 की उम्र में एक बड़े संकट का रूप ले लेती हैं. उस वक्त न तो शरीर में पहले जैसी जान होती है और न ही गलतियों को सुधारने का समय. आइए जानते हैं उन 4 गलतियों के बारे में जो आपके बुढ़ापे का सुकून छीन सकती हैं.
सबसे आम गलती यही है कि लोग सोचते हैं पहले घर ले लें, कार आ जाए या बच्चों की पढ़ाई देख लें, फिर निवेश शुरू करेंगे. लेकिन रिटायरमेंट की रेस में पैसा नहीं, 'समय' जीतता है.
आसान भाषा में समझें तो, अगर आप 30 की उम्र में सिर्फ 5000 रुपये की एसआईपी (SIP) शुरू करते हैं, तो 60 तक वह करीब 1.75 करोड़ रुपये में बदल सकती है. लेकिन अगर यही काम आपने 40 की उम्र में शुरू किया, तो उतनी ही रकम पाने के लिए आपको हर महीने 17-18 हजार रुपये निवेश करने होंगे. अगर समय एक बार हाथ से निकल गया, तो कोई भी बड़ा रिटर्न उसकी भरपाई नहीं कर सकता.
कई नौकरीपेशा लोग सोचते हैं कि उनका पीएफ (PF) कट रहा है, तो बुढ़ापा सुरक्षित है. हकीकत यह है कि पीएफ अकेले काफी नहीं होता.
महंगाई हर साल आपकी बचत की ताकत को कम कर रही है. आज जो 50,000 रुपये आपको बहुत बड़ी रकम लगती है, 30 साल बाद शायद उससे महीने भर का राशन भी न आ पाए. पीएफ के साथ-साथ म्यूचुअल फंड्स, एनपीएस (NPS) और अन्य लॉन्ग टर्म निवेश करना बेहद ज़रूरी है.
ज़िंदगी कभी भी झटका दे सकती है- जैसे नौकरी का जाना या अचानक कोई मेडिकल इमरजेंसी. अगर आपके पास कम से कम 6 महीने के खर्च के बराबर पैसा अलग से नहीं है, तो हर मुसीबत आपके रिटायरमेंट के लिए किए गए निवेश को तोड़ देगी. इमरजेंसी फंड न होने का मतलब है- आज की परेशानी हल करने के लिए कल की सुरक्षा को कुर्बान करना.
सैलरी बढ़ते ही हम नया फोन, महंगी छुट्टियां और ईएमआई (EMI) पर ऐश करना शुरू कर देते हैं. इसे 'लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन' कहते हैं. अगर आपकी इनकम तो बढ़ रही है लेकिन निवेश (Investment) वहीं का वहीं है, तो 40 की उम्र तक पहुंचते ही आप खुद को फंसा हुआ महसूस करेंगे.
60 की उम्र में पहुंचकर अक्सर लोग कहते हैं- "काश 30 की उम्र में शुरू कर लिया होता." उस वक्त पछताने से कुछ नहीं बदलता, क्योंकि वक्त वापस नहीं आता. अगर आपकी उम्र 25 से 35 के बीच है, तो यह रिटायरमेंट प्लानिंग के लिए सबसे सुनहरा और सस्ता मौका है. थोड़ा सा अनुशासन और सही प्लानिंग आपको उस उम्र में चैन की नींद दे सकती है, जब ज़्यादातर लोग पैसों के डर में जी रहे होते हैं.
A- निवेश शुरू करने की सबसे सही उम्र आपकी पहली सैलरी मिलते ही शुरू हो जाती है, ताकि आपको 'कंपाउंडिंग' का फायदा मिल सके.
A- नहीं, बढ़ती महंगाई को देखते हुए सिर्फ पीएफ काफी नहीं होता, आपको इसके साथ अन्य निवेश विकल्पों की भी ज़रूरत होती है.
A- आपके इमरजेंसी फंड में कम से कम आपके 6 महीने के खर्च के बराबर की राशि सुरक्षित होनी चाहिए.
A- 40 की उम्र में शुरुआत करने पर आपको वही फंड जमा करने के लिए 30 की उम्र के मुकाबले बहुत ज्यादा पैसा हर महीने बचाना होगा.
A- सैलरी बढ़ने के साथ खर्चों को बढ़ा लेना लाइफस्टाइल इन्फ्लेशन है. इससे बचने के लिए आय बढ़ते ही अपना निवेश भी उसी अनुपात में बढ़ा दें.
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