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हर इंसान चाहता है कि रिटायरमेंट के बाद उसे पैसों की चिंता न हो. लेकिन इसके लिए सिर्फ सोचने से कुछ नहीं होता, सही समय पर सही निवेश करना जरूरी है. अगर आप चाहते हैं कि बुढ़ापे में आपका खर्च बिना काम किए आसानी से चलता रहे, तो रिटायरमेंट प्लानिंग को हल्के में न लें.
बहुत से लोग नौकरी के शुरुआती सालों में इसे नजरअंदाज करते हैं और बाद में पछताते हैं. वहीं जो लोग प्लानिंग करते भी हैं, वह कुछ ऐसी गलतियां कर बैठते हैं जो रिटायरमेंट के समय उनके लिए मुश्किलें बढ़ा देती हैं. आइए जानते हैं ऐसी ही 5 बड़ी गलतियों के बारे में, जिनसे हर किसी को बचना चाहिए.
ज्यादातर लोग मानते हैं कि उनका EPF (Employees Provident Fund) ही रिटायरमेंट के लिए काफी है. लेकिन ऐसा नहीं है. EPF में ब्याज दरें सरकार तय करती है और ये हमेशा ऊंची नहीं रहतीं. आज मार्केट में ऐसे कई बेहतर विकल्प हैं जो ज्यादा रिटर्न दे सकते हैं, जैसे NPS (National Pension System) या म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds). इसलिए अगर आप सिर्फ EPF पर निर्भर रहेंगे, तो रिटायरमेंट के समय पैसों की कमी महसूस हो सकती है.
कई लोग नौकरी बदलने के बाद पुरानी कंपनी के EPF अकाउंट को नई कंपनी में ट्रांसफर नहीं करते. इससे उनका पैसा लंबे समय तक निष्क्रिय पड़ा रहता है और ब्याज का नुकसान होता है. अगर आप भी जॉब बदल रहे हैं, तो पहले पुराना EPF नई कंपनी में ट्रांसफर करवाना न भूलें. इससे आपकी पूरी रकम बढ़ती रहेगी और ब्याज का फायदा मिलता रहेगा. बता दें कि पुरानी कंपनी में ही पड़े रहने पर ईपीएफ के पैसों पर 3 साल के बाद ब्याज मिलना बंद हो जाता है.
अक्सर लोग सोचते हैं कि अभी तो करियर की शुरुआत है, रिटायरमेंट के लिए बाद सेविंग कर लेंगे. लेकिन यही सोच सबसे बड़ी गलती होती है. जितनी जल्दी निवेश शुरू करेंगे, उतना ज्यादा फायदा मिलेगा. उदाहरण के लिए अगर आप 25 साल की उम्र में हर महीने ₹5000 निवेश करते हैं और 10% रिटर्न मिलता है, तो 60 साल में आपका फंड ₹1.9 करोड़ तक पहुंच सकता है. लेकिन अगर आप यही निवेश 35 की उम्र में शुरू करें, तो रकम घटकर ₹65 लाख रह जाएगी. मतलब जल्दी शुरुआत = बड़ा फायदा.
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि 60 की उम्र में ही रिटायर होना है, लेकिन आज के समय में ऐसा जरूरी नहीं. लोग अब जल्दी रिटायरमेंट (Early Retirement) लेना पसंद करते हैं, ताकि वह अपने लिए समय निकाल सकें या दूसरा काम शुरू कर सकें. अगर आप नौकरी के शुरुआती सालों में ही रिटायरमेंट की तैयारी शुरू कर देते हैं, तो आप 55 या यहां तक कि 50 साल में भी रिटायर होकर आराम से जी सकते हैं. यानी जितनी जल्दी प्लानिंग, उतनी जल्दी फ्रीडम.
अक्सर लोग रिटायरमेंट प्लानिंग करते समय Inflation (महंगाई) को ध्यान में नहीं रखते. आज जो ₹1 लाख है, वही 25 साल बाद सिर्फ ₹25,000 जितना रह जाएगा. इसलिए जब भी आप रिटायरमेंट फंड प्लान करें, तो महंगाई का असर जरूर जोड़ें. अगर आज आपको हर महीने ₹50,000 खर्च करने पड़ते हैं, तो 25 साल बाद यह खर्च ₹2 लाख तक पहुंच सकता है. इसलिए जितना सोचते हैं, उससे ज्यादा निवेश करें, ताकि रिटायरमेंट के बाद आपकी जिंदगी आराम से चल सके.
रिटायरमेंट की तैयारी कोई एक दिन का काम नहीं है. यह एक लंबी और सोच-समझकर की जाने वाली प्रक्रिया है. अगर आप चाहते हैं कि बुढ़ापे में किसी पर निर्भर न रहना पड़े, तो इन 5 गलतियों से जरूर बचें. जल्दी शुरुआत करें, सही निवेश चुनें और महंगाई को ध्यान में रखकर अपनी रिटायरमेंट प्लानिंग करें. याद रखें- “जो आज सेफ करता है, वही कल सेफ रहता है.”
जितनी जल्दी शुरू करें, उतना बेहतर. नौकरी लगने के पहले साल से ही शुरू कर दें.
नहीं, NPS और Mutual Funds जैसे दूसरे विकल्प भी जरूरी हैं.
हां, यह सरकार की तरफ से कंट्रोल किया जाने वाला और लंबी अवधि का निवेश है.
क्यों नहीं, अगर आपके पास पर्याप्त फंड है तो जल्दी रिटायर हो सकते हैं.
क्योंकि भविष्य में पैसे की कीमत घटती है.
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