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बोर्ड ने यह आदेश दक्षिण रेलवे (Southern Railway) के एक मामले के संदर्भ में जारी किया है, जो पूरे देश में लागू होगा. (प्रतीकात्मक फोटो)
8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) पर लगातार काम चल रहा है. 18 महीनों में सिफारिशें आएंगी. अभी पैनल लगातार मीटिंग्स करके अपनी फाइल तैयार कर रहा है. लेकिन, इस बीच भारतीय रेलवे के उन लाखों कर्मचारियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर आई है, जो किसी दुर्घटना या बीमारी के कारण 'मेडिकली डी-कैटेगराइज' (Medically De-categorized) हो जाते हैं. अक्सर देखा गया है कि स्वास्थ्य कारणों से पद बदलने के बाद कर्मचारियों की वरिष्ठता (Seniority) और प्रमोशन के अवसर अधर में लटक जाते थे.
लेकिन रेलवे बोर्ड ने 23 अप्रैल 2026 को एक ऐतिहासिक स्पष्टीकरण जारी किया है. अब ग्रुप 'सी' (Group C) से ग्रुप 'बी' (Group B) में ऑफिसर बनने का सपना देख रहे ऐसे कर्मचारियों की पिछली सेवा (Past Service) बेकार नहीं जाएगी. आइए, समझते हैं कि रेलवे बोर्ड के इस आदेश का आपकी सैलरी, पद और भविष्य पर क्या असर होगा.
रेलवे में जब कोई कर्मचारी अपने मूल पद के लिए मेडिकल आधार पर अयोग्य हो जाता है, तो उसे किसी अन्य वैकल्पिक पद (Alternative Post) पर भेजा जाता है. पहले इस बात को लेकर काफी भ्रम था कि क्या ऑफिसर लेवल (Group B) के प्रमोशन के लिए उसकी पुरानी सर्विस को गिना जाएगा या नहीं. कई बार कर्मचारियों को नए सिरे से अनुभव जुटाना पड़ता था, जिससे उनका प्रमोशन सालों पिछड़ जाता था.
रेलवे बोर्ड ने साफ कर दिया है कि अगर कोई कर्मचारी मेडिकली डी-कैटेगराइज होने के बाद उसी विभाग के किसी वैकल्पिक पद पर समाहित (Absorb) किया जाता है, तो उसकी पुरानी सेवा भी ग्रुप 'बी' प्रमोशन के लिए 'पात्रता सेवा' (Eligible Service) के रूप में गिनी जाएगी. शर्त केवल इतनी है कि दोनों पद (पुराना और नया) उस ग्रुप 'बी' पोस्ट के लिए फीडर कैटेगिरी होने चाहिए.
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बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि 2024 के पुराने पत्र उन मामलों के लिए थे जहां विभाग बदल जाता था. लेकिन ताजा आदेश उन कर्मचारियों के लिए है जो एक ही विभाग के भीतर रहते हैं. उदाहरण के लिए, अगर ऑपरेटिंग विभाग का कोई कर्मचारी मेडिकली अनफिट होकर ऑपरेटिंग के ही किसी दूसरे डेस्क जॉब पर आता है, तो उसकी पूरी सर्विस प्रमोशन के लिए काउंट होगी.
इसका सबसे बड़ा फायदा उन कर्मचारियों को मिलेगा जो 30% LDCE (Limited Departmental Competitive Examination) या सीनियरिटी के आधार पर ग्रुप 'बी' ऑफिसर बनने की तैयारी कर रहे हैं. अब उन्हें अनुभव की कमी के कारण परीक्षा से वंचित नहीं किया जा सकेगा.
रेलवे बोर्ड के आदेश सामान्य तौर पर जारी होने की तारीख से प्रभावी होते हैं, लेकिन यह एक 'स्पष्टीकरण' (Clarification) है, जिसका उपयोग वर्तमान में चल रही सभी प्रमोशन प्रक्रियाओं (Selection Cycles) में किया जा सकेगा.
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| विवरण | पुराना नियम/भ्रम | नया नियम (23.04.2026) |
| अनुभव की गणना | वैकल्पिक पद पर जॉइनिंग से नया अनुभव शुरू होता था | पुराना + नया अनुभव = कुल सर्विस |
| प्रमोशन पात्रता | प्रमोशन में देरी होने का डर रहता था | समय पर ऑफिसर बनने का मौका मिलेगा |
| विभाग का रोल | विभाग बदलने पर नियम पेचीदा थे | एक ही विभाग में रहने पर नियम बेहद सरल |
| एप्लीकेबिलिटी | अलग-अलग जोन में अलग व्याख्या | पूरे भारतीय रेलवे में एक समान नियम |
अगर आप रेलवे के ग्रुप 'सी' कर्मचारी हैं और मेडिकल कारणों से आपका पद बदला है, तो यह आपकी जीत है:
वरिष्ठता सुरक्षित: आपकी सालों की मेहनत अब बर्बाद नहीं होगी.
एग्जाम के लिए तैयार रहें: अगर आप पहले अनुभव की कमी के कारण ग्रुप 'बी' एग्जाम नहीं दे पा रहे थे, तो अब अपना 'सर्विस रिकॉर्ड' चेक करें. आप पात्र (Eligible) हो सकते हैं.
दस्तावेज दुरुस्त करें: अपने सर्विस बुक में मेडिकली डी-कैटेगराइजेशन और एब्जॉर्प्शन की तारीखों को स्पष्ट रूप से दर्ज करवाएं ताकि प्रमोशन के समय कोई तकनीकी दिक्कत न आए.
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मुख्य सवाल यह है कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, दक्षिण रेलवे (Southern Railway) में AOM (Assistant Operations Manager) के 30% LDCE कोटे के चयन के दौरान कुछ मेडिकली डी-कैटेगराइज्ड कर्मचारियों की पात्रता पर सवाल उठे थे. मामला बोर्ड तक पहुंचा और बोर्ड ने 'न्याय के सिद्धांत' (Principles of Natural Justice) का पालन करते हुए यह साफ किया कि स्वास्थ्य खराब होना कर्मचारी की गलती नहीं है, इसलिए उसकी पिछली सेवा को प्रमोशन से नहीं छीना जा सकता.
आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 क्या सेफ्टी कैटेगरी से नॉन-सेफ्टी कैटेगरी में जाने पर भी यह नियम चलेगा?
हां, बशर्ते विभाग वही रहे. रेलवे बोर्ड का जोर 'सेम डिपार्टमेंट' पर है. अगर दोनों पद एक ही ऑफिसर कैडर को फीड करते हैं, तो कोई दिक्कत नहीं है.
Q2 मेरा पद 5 साल पहले बदला था, क्या मुझे अब लाभ मिलेगा?
अगर वर्तमान में आपके विभाग में ग्रुप 'बी' का कोई सिलेक्शन चल रहा है या भविष्य में होने वाला है, तो आपकी पुरानी 5 साल की सर्विस और नई सर्विस को जोड़कर ही आपकी पात्रता तय की जाएगी.
Q3 क्या इसके लिए अलग से कोई आवेदन करना होगा?
नहीं, यह एक पॉलिसी गाइडलाइन है. जब भी प्रमोशन के लिए नाम मांगे जाएंगे, कार्मिक विभाग (Personnel Department) को इस आदेश के तहत आपका अनुभव काउंट करना होगा. हालांकि, आप अपने विभाग को इस आदेश (No. E(GP) 2024/2/09) का हवाला दे सकते हैं.
Q4 फीडर कैटेगरी (Feeder Category) का क्या मतलब है?
हर ग्रुप 'बी' पद के लिए कुछ निश्चित ग्रुप 'सी' पद तय होते हैं जहां से कर्मचारी प्रमोट होकर ऊपर जाते हैं. इन्हें ही फीडर कैटेगरी कहते हैं.
Q5 क्या पेंशन और अन्य लाभों पर भी इसका असर पड़ेगा?
यह स्पष्टीकरण विशेष रूप से 'प्रमोशन पात्रता' के लिए है. पेंशन और रिटायरमेंट लाभों के लिए रेलवे के मेडिकल डी-कैटेगराइजेशन के नियम पहले से ही काफी स्पष्ट हैं और उनमें कर्मचारी की पुरानी सर्विस हमेशा काउंट होती है.