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PPF के विड्रॉल नियम सख्त हैं और एक छोटी सी गलती आपके ब्याज का बड़ा हिस्सा कम कर सकती है (प्रतीकात्मक फोटो/AI-ChatGpt)
आमतौर पर हम सभी एक सेफ इन्वेस्टमेंट स्कीम की तलाश में रहते हैं और यही कारण है कि 2026 में भी लोग पब्लिक प्रोविडेंट फंड यानी PPF में जमकर इन्वेस्टमेंट कर रहे हैं. टैक्स फ्री रिटर्न, सरकारी गारंटी और सुरक्षित फ्यूचर, यही कारण है कि करोड़ों लोग हर साल इसमें पैसा जमा करते हैं.
असली दिक्कत असल में तब शुरू होती है जब लोग PPF अकाउंट को हम नॉर्मल बैंक अकाउंट जैसा समझने लगते हैं.जी हां कई लोग सोचते हैं कि जरूरत पड़ी तो कभी भी पैसा निकाल लेंगे. जबकि सच यह है कि PPF के विड्रॉल नियम काफी सख्त हैं और एक छोटी सी गलती आपके ब्याज का बड़ा हिस्सा कम कर सकती है
यही वो सवाल है जिसे समझे बिना कई लोग नुकसान उठा बैठते हैं. आज हम समझेंगे कि 2026 में PPF विड्रॉल के रूल्स क्या हैं, कब पैसा निकाला जा सकता है और कौन सी मिस्टेक आपकी जेब पर भारी पड़ सकती हैं.
PPF यानी Public Provident Fund एक सरकारी लॉन्ग टर्म सेविंग स्कीम है
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अगर आप 15 साल के इन्वेस्टमेंट पीरियड को पूरे होने से पहले (आंशिक निकासी को छोड़कर) पैसा निकालने पर 1% तक ब्याज कम मिल सकता है
पीपीएफ से आप जब मर्जी पैसा नहीं निकाल सकते है. असल में नियम यह है कि खाता खुलने के 6 साल पूरे होने के बाद (यानी 7वें साल से) ही आप थोड़ा-बहुत पैसा यानी कि आंशिक विड्रॉल कर सकते हैं
आप अपने मन मुताबिक पूरी राशि नहीं निकाल सकते . पीपीएफ का नियम के हिसाब से आप पिछले बैलेंस का अधिकतम 50% हिस्सा ही निकाल पाएंगे, वो भी एक खास कैलकुलेशन के आधार पर.
PPF नियमों के अनुसार साल में केवल एक बार ही आंशिक निकासी की परमीशन है. जी हां सरकारी नियमों के मुताबिक, आप एक Financial Year में केवल एक ही बार पैसा निकाल सकते हैं.
15 साल बाद अकाउंट को 5 साल के लिए आगे बढ़ाया है, तो ध्यान रहे कि उस 5 साल की अवधि में आप कुल बैलेंस का केवल 60% हिस्सा ही निकाल सकते हैं
अगर पीपीएफ अकाउंट में नॉमिनी नहीं जोड़ा है, तो मेच्योरिटी पर या किसी इमरजेंसी में पैसा निकालने में आपको बहुत ज्यादा कानूनी और तकनीकी कागजी कार्यवाही का सामना करना पड़ सकता है.

जवाब: नहीं
PPF कोई सेविंग अकाउंट नहीं है. इसमें 15 साल का लॉक-इन होता है
उदाहरण: अगर आपने 2024 में अकाउंट खोला, तो यह 2039-40 में मैच्योर होगा.
हां...लेकिन सरकार ने Partial Withdrawal यानी आंशिक निकासी की ही सुविधा दी है
| फीचर | जानकारी |
| लॉक-इन पीरियड | 15 साल |
| वर्तमान ब्याज दर | सरकार हर तिमाही तय करती है |
| न्यूनतम निवेश | ₹500 सालाना |
| अधिकतम निवेश | ₹1.5 लाख सालाना |
| टैक्स लाभ | धारा 80C के तहत |
| जोखिम | लगभग शून्य |
हां, लेकिन खास खास परिस्थितियों में सरकार 5 साल बाद Premature Closure की अनुमति देती है
किन मामलों में?
15 साल पूरे होने के बाद आपके पास 3 रास्ते होते हैं
1. पूरा पैसा निकाल लें
2. 5 साल के लिए बढ़ाएं और निवेश जारी रखें
अगर Form H नहीं भरा तो?
3. इन्वेस्टमेंट बंद करें, ब्याज लेते रहें
बहुत जरूरी अगर नॉमिनी अपडेट नहीं है, तो परिवार को क्लेम में परेशानी हो सकती है.असल में कानूनी प्रक्रिया लंबी हो सकती है.
आपको बता दें कि पीपीएफ केवल एक सेविंग स्कीम नहीं, बल्कि ये आपके रिटायरमेंट का सहारा होता है.इसकी खासियत ये है कि इस पर कोर्ट की कुर्की (Attachment) भी लागू नहीं होती.यानी कर्ज होने पर भी कोई आपका पीपीएफ का पैसा नहीं छीन सकता.तो 2026 में सेफ निवेश के लिए पीपीएफ को चुनना बेस्ट हो सकता है.
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आर्टिकल से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल (FAQs)
Q1 6 साल से पहले पैसों की जरूरत हो तो क्या करें?
विड्रॉल नहीं मिलेगा, लेकिन आप तीसरे साल से 'लोन' की सुविधा ले सकते हैं
Q2 क्या पैसा निकालने के बाद भी ₹500 जमा करना होगा?
हां, खाता चालू रखने के लिए हर साल कम से कम ₹500 डालना जरूरी है
Q3 क्या मैच्योरिटी के बाद मिलने वाले ब्याज पर टैक्स लगेगा?
नहीं, पीपीएफ का पूरा पैसा और ब्याज 100% टैक्स फ्री होता है
Q4 क्या बच्चे के खाते से अपनी जरूरत के लिए पैसे निकाल सकते हैं?
नहीं, बच्चे के खाते का पैसा सिर्फ उसकी पढ़ाई या बीमारी के लिए ही निकलेगा
Q5 बंद (Inactive) खाते से पैसा कैसे निकालें?
बंद खाते से पैसा नहीं निकलेगा, पहले जुर्माना भरकर खाता चालू करना होगा, फिर विड्रॉल मिलेगा