PPF में ये फॉर्म जमा नहीं करने पर आपको हो जाएगा नुकसान, जानिये कब भरना होता है ये Form  

PPF : एक साल के अन्दर फॉर्म एच भरकर बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना जरूरी होता है. यह एक पेज का साधारण का फॉर्म होता है. आप इस फॉर्म को बैंक या इंडिया पोस्ट की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं.
PPF में ये फॉर्म जमा नहीं करने पर आपको हो जाएगा नुकसान, जानिये कब भरना होता है ये Form  

इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी का फायदा भी नहीं ले सकेंगे. (pixabay)

अगर आप पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) में निवेश करते हैं तो आपके लिए इससे जुड़ी एक बेहद जरूरी बात जान लेना चाहिए. आपको पता है कि आपका पीपीएफ अकाउंट 15 साल में मेच्योर होगा. आप चाहें तो इसे इसके बाद और पांच साल के लिए जारी रख सकते हैं. इस दौरान अगर आप पैसे नहीं भी डालते हैं तब भी बैलेंस राशि पर आपको ब्याज मिलेगा. यहां आपको बता दें कि मेच्योरिटी के बाद एक ही बार पांच साल के लिए जारी रख सकते हैं, ऐसी कोई लिमिट नहीं है. लेकिन जब आप मेच्योरिटी के बाद पांच साल के लिए पीपीएफ अकाउंट को जारी रखने का फैसला कर लेते हैं तो आपको एक फॉर्म एच (Form H) भरकर देना होता है जो बेहद जरूरी है.

फॉर्म नहीं भरने पर है ये नुकसान
पीपीएफ को एक्सटेंड करने के फैसले के बाद अकाउंट के मेच्योर होने की तारीख से एक साल के अन्दर फॉर्म एच भरकर बैंक या पोस्ट ऑफिस में जमा करना जरूरी होता है. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपके अकाउंट में जो आप फ्रेश डिपॉजिट करेंगे उस पर आपको कोई ब्याज नहीं मिलेगा. साथ ही फ्रेश डिपॉजिट के रूप में पीपीएफ में डाले गए पैसे के बदले इनकम टैक्स के सेक्शन 80सी का फायदा भी नहीं ले सकेंगे.

क्या होता है फॉर्म एच
यह एक पेज का साधारण का फॉर्म होता है. आप इस फॉर्म को बैंक या इंडिया पोस्ट की वेबसाइट से डाउनलोड कर सकते हैं. अकाउंट होल्डर को यह फॉर्म भरकर जहां उसका अकाउंट है, वहां जमा करना होता है.

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(उदाहरण के तौर पर एसबीआई का फॉर्म एच)

जब अकाउंट होल्डर पीपीएफ अकाउंट को एक्सटेंड करता है तो वह हर साल एक तय लिमिट में पैसे निकाल सकता है. लेकिन वह पांच साल में अकाउंट बैलेंस का 60 प्रतिशत से ज्यादा अमाउंट नहीं निकाल सकता है.

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जानकारों की सलाह है कि पीपीएफ अकाउंट मेच्योर होने के बाद भी अगर निवेशक पीपीएफ को आगे जारी रखना चाहता है तो उसे पीपीएफ अकाउंट बंद कर नया पीपीएफ अकाउंट खोलने के बजाए एक्सटेंड करना ज्यादा सही है. इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि आप हर साल बैलेंस के मुताबिक एक तय राशि निकाल सकते हैं.

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