SIP की पावर: रोज 100 रुपये की सेविंग, 25 साल में 56 लाख के मालिक; समझें कैलकुलेशन 

SIP calculator: म्‍यूचुअल फंड SIP निवेश का एक बेहद आसान ऑप्‍शन है. आप अपनी छोटी-छोटी बचत को अगर हर महीने निवेश की आदत बना लें, तो आप लाखों रुपये का फंड आसानी से बना सकते हैं.
SIP की पावर: रोज 100 रुपये की सेविंग, 25 साल में 56 लाख के मालिक; समझें कैलकुलेशन 

(Image: Representational) 

Mutual Fund SIP Investment: म्‍यूचुअल फंड SIP निवेश का एक बेहद आसान ऑप्‍शन है. आप अपनी छोटी-छोटी बचत को अगर हर महीने निवेश की आदत बना लें, तो आप अगले कुछ सालों में लाखों रुपये का फंड आसानी से बना सकते हैं. अगर आप 100 रुपये रोज बचाते हैं और हर महीने एसआईपी में निवेश का ऑप्‍शन चुनते हैं, तो आप 25 साल आसानी से 56 लाख या इससे भी ज्‍यादा का फंड बना सकते हैं. म्‍यूचुअल फंड्स की कई ऐसी स्‍कीम्‍स हैं, जिन्‍होंने लॉन्‍ग टर्म में 12 फीसदी या इससे ज्‍यादा का रिटर्न दिया है.

SIP Calculator: रोज 100 रुपये बचाने की ताकत

अगर आप डेली 100 रुपये की सेविंग करते हैं, तो हर महीने आपकी सेविंग 3,000 रुपये हो गई. SIP कैलकुलेटर के मुताबिक, अगर आप 3,000 मंथली निवेश करते हैं और सालाना रिटर्न 12 फीसदी भी मिलता है, तो आप 25 साल में 56.92 लाख रुपये से ज्‍यादा का फंड बना लेंगे. इसी तरह, अगर आपने 35 साल तक निवेश जारी रखा और सालाना रिटर्न 12 फीसदी भी मिला तो करीब 2 करोड़ (1.9 करोड़) का फंड आसानी से बना सकते हैं. SIP को लॉन्‍ग टर्म तक बनाए रखने पर कम्‍पाउंडिंग का जबरदस्‍त फायदा मिलता है.

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SIP करने से पहले लक्ष्‍य तय करें

बीपीएन फिनकैप के डायरेक्‍टर एके निगम का कहना है कि म्‍यूचुअल फंड SIP शुरू करने से पहले म्‍यूचुअल फंड में निवेश से पहले आप अपना लक्ष्‍य जरूर तय कर लें. यानी, आप किस फाइनेंशियल जरूरत जैसेकि चाइल्‍ड एजुकेशन, मैरेज या वकेशन को पूरा करने के लिए निवेश करना चाहते हैं, उसे जरूर निर्धारित कर लें. एसआईपी में लॉन्‍ग टर्म में हमेशा शानदार रिटर्न मिलने की उम्‍मीद है. SIP के जरिए निवेश करने में यह बात ध्‍यान रखें कि इनकम ग्रोथ के साथ-साथ SIP भी बढ़नी चाहिए. इससे भविष्‍य में बड़ा फंड बनाने में आपको फायदा मिलेगा. किसी भी अन्‍य दूसरे ऑप्‍शन के मुकाबले इसमें आपके निवेश पर जबरदस्‍त रिटर्न मिलेगा.

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निवेश से पहले अपना रिस्‍क फैक्‍टर देख लें

निगम का कहना है कि SIP निवेश का एक सिस्‍टमेटिक तरीका है. इसमें भी रिस्‍क रहता है. इसलिए निवेशक को सबसे पहले अपनी रिस्‍क उठाने की क्षमता का आकलन जरूर कर लेना चाहिए. उसके बाद अपनी इनकम और गोल देखकर निवेश का फैसला करना चाहिए. आमतौर पर यह देखा जाता है कि शेयर बाजार में वॉलेटिलिटी पर निवेशक SIP बंद कर देते हैं. जबकि, मार्केट में उतार-चढ़ाव को देखकर कभी भी एसआईपी बंद नहीं करनी चाहिए.