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PM Mudra Yojana: केंद्र सरकार प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के दस साल पूरे होने का जश्न मना रही है. यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) की प्रमुख योजना है, जिसे छोटे व्यापारियों को उनके व्यापार के लिए वित्तीय सहायता देने के उद्देश्य से लाया गया है. 8 अप्रैल 2015 को लॉन्च होने के बाद से, PMMY ने 32.61 लाख करोड़ रुपये के 52 करोड़ से ज्यादा लोन स्वीकृत किए हैं, जिससे देश भर में उद्यमिता क्रांति को बढ़ावा मिला है.
प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) भारत सरकार की एक प्रमुख योजना है, जिसे 8 अप्रैल 2015 को शुरू किया गया था. इसका मकसद छोटे और मध्यम स्तर के कारोबारियों, स्टार्टअप्स और स्वरोजगार को बढ़ावा देना है. इस योजना के तहत बिना किसी गारंटी के लोन दिया जाता है.
PMMY के अंतर्गत तीन तरह के लोन दिए जाते हैं:
इस योजना का लाभ वे लोग ले सकते हैं जो कोई छोटा व्यापार शुरू करना चाहते हैं या पहले से व्यवसाय कर रहे हैं और उसे बढ़ाना चाहते हैं. इसके अलावा सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं जैसे- दुकानदार, बढ़ई, दर्जी, ब्यूटी पार्लर संचालक, ऑटो/टैक्सी ड्राइवर आदि या फिर कृषि से जुड़े छोटे काम या फूड प्रोसेसिंग यूनिट चलाना चाहते हैं, तो पीएम मुद्रा योजना का फायदा ले सकते हैं.
सभी मुद्रा लाभार्थियों में 68 प्रतिशत महिलाएं हैं, जो देश भर में महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों को आगे बढ़ाने में इस योजना की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करता है. वित्त वर्ष 2016 और वित्त वर्ष 2025 के बीच प्रति महिला पीएमएमवाई संवितरण राशि 13 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 62,679 रुपये पर पहुंच गई, जबकि प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14 प्रतिशत की सीएजीआर से बढ़कर 95,269 रुपये हो गई.
जिन राज्यों में महिलाओं को ज्यादा ऋण दिया गया है, वहां महिलाओं द्वारा चलाए जा रहे छोटे व्यवसायों (एमएसएमई) के माध्यम से रोजगार का सृजन बहुत हुआ है. इससे यह पता चलता है कि महिलाओं को लक्षित करके वित्तीय सहायता देना उनकी आर्थिक स्थिति और काम करने की दर को बढ़ाने में बहुत प्रभावी है.
इस योजना ने पारंपरिक ऋण बाधाओं को तोड़ने में महत्वपूर्ण प्रगति की है. एसबीआई की रिपोर्ट के अनुसार, 50 प्रतिशत मुद्रा खाते एससी, एसटी और ओबीसी उद्यमियों के पास हैं, जिससे औपचारिक वित्त तक व्यापक पहुंच सुनिश्चित होती है. इसके अलावा, मुद्रा ऋण धारकों में से 11 प्रतिशत अल्पसंख्यक समुदायों से हैं, जो हाशिए पर पड़े समुदायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनने में सक्षम बनाकर समावेशी विकास में इस योजना के योगदान को दर्शाता है.