फिजिकल, डिजिटल या गोल्ड बॉन्ड.. किसमें सबसे ज्यादा फायदा? जानिए कहां लगेगा कितना टैक्स, कहां होगी बंपर बचत

भारत में सोने में निवेश के 4 मुख्य तरीके हैं: फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF), डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB). बजट 2024 के बाद अब सभी प्रकार के सोने पर लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन्स (LTCG) टैक्स की दर 12.5% कर दी गई है (बिना इंडेक्सेशन लाभ के). हालांकि, हर माध्यम के लिए 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग है.
फिजिकल, डिजिटल या गोल्ड बॉन्ड.. किसमें सबसे ज्यादा फायदा? जानिए कहां लगेगा कितना टैक्स, कहां होगी बंपर बचत

भारत में सोने में निवेश के 4 मुख्य तरीके हैं: फिजिकल गोल्ड, गोल्ड ईटीएफ (ETF), डिजिटल गोल्ड और सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB).

हम भारत के लोग सोने के बिना किसी शुभ काम की कल्पना भी नहीं कर सकते. धनतेरस हो या अक्षय तृतीया, सोने की दुकानों पर भीड़ इस बात का सबूत है कि हमें पीली धातु पर कितना भरोसा है. लेकिन जमाना बदल रहा है. अब लोग लॉकर में सोना रखने के बजाय फोन में 'डिजिटल गोल्ड' रखना या शेयर बाजार की तरह 'गोल्ड ईटीएफ' में ट्रेड करना भी खूब पसंद कर रहे हैं.

पर क्या आप जानते हैं कि सरकार इन सब पर एक जैसा टैक्स नहीं लगाती? अगर आप गहने बेचते हैं तो नियम अलग हैं और अगर आप सरकारी गोल्ड बॉन्ड (SGB) से पैसा निकालते हैं तो नियम बिल्कुल अलग हैं. बजट 2024 में सरकार ने 'इंडेक्सेशन' (महंगाई के हिसाब से लागत एडजस्ट करना) का फायदा खत्म कर दिया है और टैक्स की एक नई दर 12.5% लागू कर दी है. चलिए, आज समझते हैं कि आपकी जेब के लिए कौन सा सोना सबसे 'खरा' है.

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1. फिजिकल गोल्ड (गहने, सिक्के और बिस्कुट)

यह सोने में निवेश का सबसे पुराना और पसंदीदा तरीका है. लेकिन टैक्स के मामले में यह थोड़ा पेचीदा हो सकता है.

लॉन्ग टर्म (LTCG): अगर आप अपना सोना खरीदने के 24 महीने (2 साल) के बाद बेचते हैं, तो होने वाले मुनाफे पर 12.5% टैक्स देना होगा. पहले इसमें महंगाई का फायदा (Indexation) मिलता था, जो अब खत्म हो गया है.

शॉर्ट टर्म (STCG): अगर आप 2 साल से पहले सोना बेचते हैं, तो मुनाफा आपकी कुल कमाई में जुड़ जाएगा और आपको अपने इनकम टैक्स स्लैब (जैसे 10%, 20% या 30%) के हिसाब से टैक्स देना होगा.

जरूरी बात: गहने बनवाते समय जो 'मेकिंग चार्ज' आप देते हैं, उस पर कोई टैक्स छूट नहीं मिलती. इसलिए निवेश के लिए सिक्के या बार बेहतर माने जाते हैं.

2. गोल्ड ईटीएफ (Gold ETF)

यह उन लोगों के लिए है जो शेयर बाजार को समझते हैं. इसमें आप सोने की यूनिट्स खरीदते हैं जो आपके डिमैट अकाउंट में रहती हैं.

लॉन्ग टर्म (LTCG): यहां 'लॉन्ग टर्म' की परिभाषा अलग है. अगर आप 12 महीने (1 साल) के बाद अपनी यूनिट्स बेचते हैं, तो इसे लॉन्ग टर्म माना जाएगा और 12.5% टैक्स लगेगा.

शॉर्ट टर्म (STCG): अगर 1 साल के भीतर बेचते हैं, तो मुनाफा आपकी सालाना इनकम में जुड़ेगा और आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा.

फायदा: इसे आप शेयर की तरह कभी भी एक क्लिक पर बेच सकते हैं.

3. डिजिटल गोल्ड

आजकल मोबाइल ऐप से सोना खरीदना बहुत आसान है. इसे डिजिटल गोल्ड कहते हैं.

टैक्स नियम: यह बिल्कुल फिजिकल गोल्ड की तरह ही काम करता है.

अवधि: 24 महीने से ज्यादा रखने पर 12.5% (LTCG) और इससे कम पर टैक्स स्लैब (STCG) के हिसाब से भुगतान करना होगा.

सावधानी: डिजिटल गोल्ड को SEBI या RBI रेगुलेट नहीं करते, इसलिए इसमें सुरक्षा का जोखिम फिजिकल या बॉन्ड के मुकाबले थोड़ा ज्यादा रहता है.

4. सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB)- सबसे बड़ा खिलाड़ी

यह आरबीआई (RBI) द्वारा जारी किया जाता है और टैक्स के मामले में यह 'बादशाह' है.

मैच्योरिटी (8 साल): अगर आप बॉन्ड को पूरे 8 साल तक रखते हैं, तो मिलने वाला मुनाफा पूरी तरह टैक्स-फ्री होता है. आपको एक पैसा भी टैक्स नहीं देना.

सालाना ब्याज: सरकार आपको हर साल 2.5% ब्याज भी देती है (जो हर 6 महीने में मिलता है). ध्यान रहे, यह ब्याज आपकी इनकम माना जाता है और इस पर आपके स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है.

बजट 2026 का नया नियम: टैक्स छूट का फायदा केवल उन्हीं लोगों को मिलेगा, जिन्होंने सीधे आरबीआई से बॉन्ड खरीदे हैं और 8 साल तक रुके हैं. अगर आप बीच में (5 साल के बाद) निकलते हैं या बाजार से बॉन्ड खरीदते हैं, तो मुनाफे पर 12.5% टैक्स देना पड़ सकता है.

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निवेश के तरीके और टैक्स

सोने का प्रकारलॉन्ग टर्म कब होगा?LTCG टैक्स दरSTCG टैक्स दर
फिजिकल गोल्ड24 महीने बाद12.5%टैक्स स्लैब के अनुसार
डिजिटल गोल्ड24 महीने बाद12.5%टैक्स स्लैब के अनुसार
गोल्ड ईटीएफ12 महीने बाद12.5%टैक्स स्लैब के अनुसार
SGB (मैच्योरिटी पर)8 साल बाद0% (Tax Free)लागू नहीं
SGB (बीच में बेचने पर)12 महीने बाद*12.5%टैक्स स्लैब के अनुसार

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Conclusion

अगर आपका मकसद अपनी बेटी की शादी के लिए गहने बनाना है, तो फिजिकल गोल्ड ही बेस्ट है. लेकिन अगर आप सिर्फ 'मुनाफे' के लिए निवेश कर रहे हैं, तो सॉवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGB) से बेहतर कुछ नहीं है, क्योंकि वहां आपको ब्याज भी मिलता है और टैक्स की भी पूरी बचत होती है. वहीं, अगर आप बार-बार सोना खरीदना और बेचना चाहते हैं, तो गोल्ड ईटीएफ सबसे आसान रास्ता है. निवेश करने से पहले यह जरूर देख लें कि आप कितने समय के लिए पैसा लगा रहे हैं, क्योंकि वही तय करेगा कि आपकी मेहनत की कमाई में से सरकार कितना हिस्सा लेगी.

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