SIP Mutual Funds आज के समय में काफी लोकप्रिय स्कीम है क्योंकि लॉन्ग टर्म में इसके जरिए काफी अच्छा मुनाफा कमाने का मौका मिलता है. लेकिन इसमें निवेश करने से पहले निवेशकों को ये नहीं भूलना चाहिए कि ये स्कीम मार्केट लिंक्ड है. इसमें छोटी सी भूल भी आपका बड़ा नुकसान करवा सकती है. यहां जानिए उन गलतियों के बारे में, जिसके चलते SIP निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.
1/6अगर आप SIP को शुरू करना चाहते हैं तो पहले मार्केट में रिसर्च करें और सूझबूझ और जरूरत के हिसाब से SIP का चुनाव करें फिर निवेश करें. आपको जानकारी नहीं है तो इस मामले में किसी एक्सपर्ट से सलाह लें. लेकिन किसी दूसरे की बात सुनकर बिना किसी रिसर्च और जानकारी के निवेश करना आपको नुकसान करवा सकता है.
2/6सिर्फ ज्यादा मुनाफा कमाने के चक्कर में SIP में बड़ी रकम को निवेश न करें, वरना आपका बजट गड़बड़ा जाएगा. ये भी संभव है कि आप अपनी एसआईपी को लंबे समय तक जारी ही न रख सकें. इसलिए आप अपनी आर्थिक स्थिति को देखते हुए निवेश की राशि तय करें. SIP में आपको फ्लेक्सिबिलिटी मिलती है. आप इसे कभी भी बंद कर सकते हैं, बीच में रोक सकते हैं और SIP में रकम को बढ़ा या घटा सकते हैं. इस फ्लैक्सिबिलिटी का फायदा उठाइए और अपनी जेब को देखकर निवेश कीजिए. फिर जैसे-जैसे आमदनी बढ़े, उसके हिसाब से निवेश बढ़ाते जाएं.
3/6मुनाफे के लिहाज से लॉन्ग टर्म की SIP करने की सलाह दी जाती है. इसमें जोखिम कम होता है. एवरेजिंग का फायदा मिलता है. साथ ही आपको कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है. लेकिन अगर आपने लॉन्ग टर्म की SIP शुरू की है तो इसे बीच में बंद न करें. नहीं तो आप अपने मुनाफे वाले लक्ष्य को हासिल नहीं कर पाएंगे. ध्यान रखें कि आप जितने लंबे समय के लिए निवेश करेंगे, कंपाउंडिंग का उतना तगड़ा फायदा लेंगे और बड़ा कॉर्पस तैयार कर पाएंगे.
4/6अपना सारा पैसा एक ही फंड में लगाने से बचें. इससे आपके निवेश का जोखिम बढ़ता है. आप अपने निवेश को डेट, इक्विटी और अन्य एसेट क्लास में बैलेंस करें. इससे आप अपना जोखिम काफी हद तक कम कर सकते हैं.
5/6म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले एक्सपेंस रेश्यो को नजरअंदाज न करें. आमतौर पर आपको लगता होगा कि अगर किसी फंड का रिटर्न 15 फीसदी या 18 फीसदी है तो आपको भी निवेश करने पर उतना ही फायदा होगा. लेकिन ऐसा नहीं होता क्योंकि इसके बीच एक्सपेंस रेश्यो आ जाता है. आपके म्यूचुअल फंड को मैनेजमेंट का जो भी खर्च आता है उसे एक्सपेंस रेश्यो कहा जाता है. किसी भी फंड का एक्सपेंस रेश्यो ही ये तय करता है कि आपको कोई फंड कितना सस्ता मिलेगा. एक्सपेंस रेश्यो कम या ज्यादा होने का असर आपके रिटर्न पर भी पड़ता है.
6/6आपने जो भी इन्वेस्टमेंट किया है, समय-समय पर उसकी समीक्षा करना बहुत जरूरी होता है. अगर आप ऐसा नहीं करते हैं तो आपको बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है. फंड के प्रदर्शन और बाजार में होने वाले बदलावों को नजरअंदाज करने से आपके रिटर्न पर असर पड़ सकता है.