सरकार बड़े लेन-देन पर निगरानी बढ़ाने की तैयारी में है. नए ड्राफ्ट नियमों के तहत अब कई हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन में PAN कार्ड देना अनिवार्य होगा. मकसद साफ है- टैक्स पारदर्शिता और कैश ट्रांजैक्शन पर कंट्रोल.
1/8टैक्स चोरी पर रोक, बड़े कैश लेन-देन की ट्रैकिंग, रियल एस्टेट और लग्जरी खर्च में पारदर्शिता, आय और खर्च के बीच अंतर पकड़ना.
2/8अगर आप साल में ₹10 लाख से ज्यादा कैश जमा करते हैं या ₹10 लाख से ज्यादा कैश निकालते हैं तो PAN देना जरूरी होगा. इससे बार-बार छोटे ट्रांजैक्शन करके सीमा से बचना मुश्किल होगा.
3/8सबसे अहम बदलाव रियल एस्टेट सेक्टर के लिए है. प्रस्ताव है कि अब ₹20 लाख तक की प्रॉपर्टी डील में भी PAN अनिवार्य किया जा सकता है. छोटे शहरों में भी अब अधिकतर डील इस दायरे में आएंगी.
4/8अगर आप ₹5 लाख से ऊपर की गाड़ी खरीदते हैं, तो PAN देना होगा, डील ट्रैक होगी. अब सिर्फ लग्जरी कार नहीं, मिड-सेगमेंट गाड़ियां भी निगरानी दायरे में.
5/8₹1 लाख से ज्यादा होटल बिल, इवेंट खर्च, शादी या कॉर्पोरेट आयोजन. इन सबमें PAN देना अनिवार्य हो सकता है. सरकार अब लाइफस्टाइल खर्च भी ट्रैक करेगी.
6/8नए नियमों के मुताबिक, इंश्योरेंस अकाउंट खोलने के लिए PAN अनिवार्य, हाई-वैल्यू पॉलिसी ट्रैकिंग आसान. मनी लॉन्ड्रिंग पर लगाम लगाने की कोशिश.
7/8अब बड़े ट्रांजैक्शन का डेटा: बैंक, आयकर विभाग, रजिस्ट्रेशन विभाग के बीच साझा हो सकता है. अगर खर्च और घोषित आय में बड़ा अंतर होगा, तो नोटिस संभव.
8/8सरकार का संदेश साफ है: “बड़ा खर्च = पूरी पारदर्शिता”. PAN अब सिर्फ टैक्स रिटर्न के लिए नहीं, बल्कि हर बड़े वित्तीय कदम की पहचान बनता जा रहा है. अगर आप हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन करते हैं, तो नियम समझना जरूरी है, वरना बाद में नोटिस आ सकता है.