इमरजेंसी में पैसों की जरूरत हो तो आप या तो क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, किसी से पैसा उधार लेते हैं या फिर पर्सनल लोन के ऑप्शन पर जाते हैं. लेकिन अगर आपके पास बैंक में सेविंग्स अकाउंट है तो बैंक से आपको एक ऐसी सर्विस मिल जाती है जिसके जरिए आपके पैसों का इंतजाम भी आसानी से हो जाता है और इसके बदले आपसे किसी तरह की प्रोसेसिंग फीस भी नहीं ली जाती. फीचर्स के मामले में ये सुविधा पर्सनल लोन (Personal Loan) से कई मायनों में बेहतर साबित हो सकती है. जानिए इसके बारे में.
1/7हम बात कर रहे हैं बैंक से मिलने वाली ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी (Overdraft Facility-OD) की. इसे ओवरड्राफ्ट लोन भी कहा जाता है. ये एक फाइनेंशियल सुविधा है, जिसके लिए आपको बैंक से मंजूरी लेनी होती है. अगर आपको मंजूरी मिल जाती है तो आप अपने बैंक अकाउंट से मौजूदा बैलेंस से ज्यादा अमाउंट भी निकाल सकते हैं.
2/7ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी एक तरह का लोन होता है. ज्यादातर बैंक करंट अकाउंट, सैलरी अकाउंट और फिक्स्ड डिपॉजिट (एफडी) पर ये सुविधा देते हैं. ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के जरिए लिए गए अमाउंट को एक निश्चित अवधि के अंदर चुकाना होता है. इस पर ब्याज भी लगता है. ब्याज डेली बेसिस पर कैलकुलेट होता है.
3/7ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के तहत मिलने वाले अमाउंट की लिमिट क्या रहेगी, ये बैंक तय करते हैं. आमतौर पर सैलरी अकाउंट पर अगर आप ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी लेते हैं, तो आपको सैलरी की दोगुनी या तिगुनी रकम लोन के तौर पर मिल सकती है. लेकिन सैलरी अकाउंट पर ओवरड्राफ्ट की सुविधा वो ही बैंक दे सकता है, जिसमें आपका अकाउंट ओपन हो.
4/7आमतौर पर जब आप पर्सनल लोन लेते हैं तो जितनी राशि का अप्रूवल मिलता है, उस पूरी राशि पर ब्याज कैलकुलेट किया जाता है. लेकिन ओवरड्राफ्ट लोन में ऐसा नहीं होता. इसमें बैंक से अप्रूव की हुई पूरी राशि पर ब्याज नहीं देना होता. आप अपने अकाउंट से जितना अमाउंट निकालकर यूज करते हैं, सिर्फ उतने अमाउंट पर ही आपको ब्याज चुकाना पड़ता है.
5/7मान लीजिए कि अगर ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के तहत मिलने वाले अमाउंट की लिमिट बैंक की ओर से दो लाख तय की गई है और आपने सिर्फ एक लाख रुपए ही इस्तेमाल किए हैं, तो ब्याज सिर्फ एक लाख पर ही लगेगा. लेकिन अगर आपने 2 लाख का पर्सनल लोन लिया है तो आपको पूरे 2 लाख के हिसाब से ही इस पर ब्याज देना होगा. इसके अलावा OD में जितने समय के लिए अमाउंट आपके पास होता है, ब्याज भी सिर्फ उतने समय तक ही लगता है. मतलब आप जितनी जल्दी लोन चुकाएंगे, उतनी जल्दी किस्त के झंझट से मुक्ति पाएंगे.
6/7OD में आपको लोन लेने के लिए प्रोसेसिंग फीस वगैरह नहीं देनी होती. जबकि पर्सनल लोन या किसी अन्य लोन में प्रोसेसिंग फीस भी देनी होती है. इसके अलावा ओवरड्राफ्ट का एक फायदा ये है कि लोन जल्दी चुकाने के लिए आपको प्रीपेमेंट चार्ज वगैरह नहीं देना होता है. जबकि पर्सनल लोन निश्चित समय से पहले क्लोज नहीं कर सकते. अगर आप ऐसा करते हैं, तो आपको उसके लिए प्रीपेमेंट चार्ज देना पड़ता है.
7/7ओवरड्राफ्ट फैसिलिटी के लिए आपको अपनी एफडी, शेयर्स, घर, सैलरी, इंश्योरेंस पॉलिसी, बॉन्ड्स आदि को गिरवी रखना पड़ता है. अगर आप अमाउंट को नहीं चुका पाते हैं तो आपकी गिरवी रखी चीज से इसकी भरपाई की जाती है. लेकिन ओवरड्राफ्टेड अमाउंट आपके द्वारा गिरवी रखी गई चीज से ज्यादा है तो गिरवी रखी चीज से भरपाई करने के बाद आपको बाकी के पैसे चुकाने होंगे.