New labour code salary changes: लेबर कोड और पीएफ (PF) विड्रॉल के नए रूल्स के बीच एक और बहुत बड़ा बदलाव आपकी सैलरी स्लिप (Salary Slip) पर होने वाला है. अब लेबर कोड लागू होने के बाद अब आपकी 'इन-हैंड सैलरी' और 'रिटायरमेंट फंड' का पूरा कैलकुलेशन बदलने जा रहा है.
1/9अगर आप नौकरी करते हैं, तो फिर अब आप तैयार हो जाएं. असल में अब नए लेबर कोड के अप्लाई होने के साथ ही आपकी सैलरी स्लिप के अलग-अलग हिस्से यानी कि Components नए तरीके से तय किए जा रहे हैं.असल में सरकार की हालिया स्टडी और नए रूल्स के मुताबिक, अब आपकी 'बेसिक सैलरी' आपके कुल पैकेज (CTC) का कम से कम 50% होना जरूरी है.
2/9वैसे सैलरी के हिसाब से इस एक रूल का आपकी जेब पर क्या असर होगा ये जानना बहुत ही जरूरी है? समझना होगा कि क्या महीने के आखिर में आने वाली रकम कम हो जाएगी? तो आइए इसे आसान भाषा में डिकोड करते हैं.
3/9अब तक कई कंपनियां टैक्स बचाने के लिए आपकी 'बेसिक सैलरी' को कम रखा करती थीं और 'अलाउंस' (भत्ते) को आमतौर पर बढ़ा देती थीं.लेकिन नए कोड के मुताबिक आपकी Basic Salary + DA आपकी कुल ग्रॉस सैलरी का करीब 50% हो सकता है.यानी कि बाकी 50% में आपके सारे भत्ते (HRA, कन्वेयंस, बोनस आदि) आने वाले हैं.
4/9असल में आपका पीएफ (PF) आपकी बेसिक सैलरी के आधार पर कटता है, तो फिर इसलिए जब बेसिक सैलरी बढ़ेगी, तो आपकी सैलरी से कटने वाला पीएफ का हिस्सा भी बढ़ सकता है,तो इसका मतलब है कि हर महीने घर ले जाने वाली रकम (Take-home pay) में थोड़ी कमी आ सकती है.हालांकि भले ही आज जेब में कुछ हजार रुपये कम आएं, लेकिन आपके फ्यूचर की सेविंग रॉकेट की रफ़्तार इससे बढ़ेगी.
5/9इससे बड़ा पीएफ फंड होना,यानी कि कंपनी भी आपके पीएफ खाते में ज्यादा योगदान देगी.इसके साथ ही ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन बेसिक सैलरी पर होता है, तो बेसिक बढ़ने से नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट के वक्त मिलने वाली ग्रेच्युटी की रकम भी काफी बढ़ जाने वाली है.
6/9मान लीजिए आपकी सैलरी ₹50,000 है.तो पुराने सिस्टम में आपकी बेसिक सैलरी करीब ₹15,000 होती थी, जिस पर PF कटकर लगभग ₹1,800 जाता था, तो इसलिए हाथ में आने वाला पैसा थोड़ा ज्यादा रहता था.हालांकि नए सिस्टम में बेसिक सैलरी बढ़कर करीब ₹25,000 हो सकती है, जिससे PF कटौती ₹3,000 हो जाएगी.यानी कि इसका मतलब यह है कि हर महीने इन-हैंड सैलरी थोड़ी कम मिलेगी, लेकिन रिटायरमेंट के लिए जमा होने वाला फंड पहले के मुकाबले काफी बड़ा बन जाएगा.
7/9स्टडी में यह भी सामने आया है कि अब सिर्फ फुल-टाइम कर्मचारी ही नहीं, बल्कि जो लोग कॉन्ट्रैक्ट पर हैं या फ्रीलांसर (गिग वर्कर्स) हैं, उन्हें भी सामाजिक सेफ्टी के दायरे में लाया जाएगा.तो उनकी सैलरी स्लिप में भी अब सोशल सिक्योरिटी का एक छोटा हिस्सा कट सकता है, ताकि उन्हें भी फ्यूचर में पेंशन या बीमा की सुविधा मिल सके.
8/9अब तक लोग अलाउंस के जरिए टैक्स बचाते थे, लेकिन अब बेसिक सैलरी बढ़ने से 'टैक्सेबल इनकम' बढ़ सकती है. हालांकि, एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरने की व्यवस्था ज्यादा पारदर्शी और साफ होगी.
9/9शुरुआत में शायद आपको अपनी कम सैलरी देखकर थोड़ा बुरा लगे, लेकिन लॉन्ग टर्म में यह आपके हित में है. यह लेबर कोड आपको एक 'मजबूर कर्मचारी' के बजाय एक 'सुरक्षित निवेशक' बना रहा है. अब आपकी रिटायरमेंट प्लानिंग आपकी कंपनी खुद करके दे रही है.