LIC में निवेश सुरक्षित माना जाता है, लेकिन कुछ सामान्य गलतियां आपकी पॉलिसी पर क्लेम को खतरे में डाल सकती हैं.कई बार लोग स्वास्थ्य या जीवनशैली से जुड़ी जरूरी जानकारी छिपा देते हैं, जिससे बाद में क्लेम रिजेक्ट हो जाता है. ऐसे में सही जानकारी देना और नियमों को समझना बहुत जरूरी है.
1/9लाइफ इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन (LIC) को फ्यूचर सी सुरक्षा के लिए अक्सर लोग अच्छा मानते हैं. लेकिन एलआईसी की पॉलिसियों से जुड़े क्लेम (दावा) कई बार छोटी-छोटी गलतियों की वजह से खारिज हो जाते हैं, जिससे पॉलिसीधारक या उनके परिवार को बड़ी परेशानी का सामना करना पड़ता है.तो फिर आइए आज हम जानेंगे LIC की पॉलिसी लेते समय किन बातों का ध्यान रखना चाहिए.
2/9पहले हम समझेंगे कि आखिरी पॉलिसी क्लेम खारिज हो क्यों जाता है. असल में बीमा का कारोबार "पूर्ण ईमानदारी" के सिद्धांत पर काम करता है. इसका मतलब है कि पॉलिसी लेते समय ग्राहक को कंपनी को सभी सही और पूरी जानकारी देनी होती है. अगर इसमें कोई भी गलती होती है, तो बाद में क्लेम खारिज हो सकता है.
3/9असल में हेल्थ बीमा के लिए अप्लाई करते समय अपनी हेल्थ संबंधी पूरी जानकारी देना बहुत जरूरी होता है.अगर आप अपने किसी पुराने रोग जैसे डायबिटीज या हाई बीपी आदि को छिपाते हैं, तो कंपनी क्लेम के समय मेडिकल रिकॉर्ड जांच कर सकती है और गलत जानकारी मिलने पर आपका क्लेम रद्द हो सकता है.इसके साथ ही, धूम्रपान या शराब जैसी आदतों को छुपाना भी नुकसानदेह होता है. इस वजह से भी क्लेम प्रक्रिया में कठिनाई हो सकती है और पेमेंट से इंकार किया जा सकता है.
4/9अगर आपने अपनी बीमा पॉलिसी का प्रीमियम समय पर नहीं भरा और पॉलिसी बंद (लैप्स) हो गई, तो उस दौरान कोई क्लेम मिलने की संभावना नहीं रहती है. हालांकि, बीमा कंपनियां अक्सर एक निर्धारित टाइमिंग के अंदर पॉलिसी को फिर से शुरू (रिवाइव) करने का मौका देती हैं,तो इस अवधि में प्रीमियम और ब्याज चुका कर आप अपनी पॉलिसी को पुनः सक्रिय कर सकते हैं, जिससे फ्यूचर में क्लेम का बेनेफिट पाया जा सके.
5/9अक्सर ऐसा होता है कि पॉलिसी में नॉमिनी का नाम, पता या बाकी की और जानकारी गलत होने पर भी क्लेम मिलने में दिक्कत आ जाती है. तो, अगर नॉमिनी का नाम ही नहीं लिखा गया है, तो क्लेम के लिए कानूनी प्रक्रिया और भी मुश्किल हो जाती है.
6/9एसआईसी बीमा क्लेम करते टाइम डाक्यूमेंट्स की सही और पूरी जानकारी देना बेहद जरूरी होता है. जैसे कि मृत्यु प्रमाण पत्र, पॉलिसी बॉन्ड, अस्पताल से जुड़े सभी मेडिकल रिकॉर्ड और बैंक खाते की सटीक जानकारी जमा करनी होती है. अगर इनमें से कोई भी डाक्यूमेंट्स अधूरा, गलत होता है, तो बीमा कंपनी क्लेम प्रक्रिया को रोक सकती है या देर कर सकती है.
7/9पॉलिसी क्लेम के रिजेक्शन से बचने के लिए सबसे जरूरी है कि आप बीमा लेते समय पूरी तरह से ईमानदार और पारदर्शी रहें.यानी कि बीमा पॉलिसी से जुड़े बेनेफिट्स पाने के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना बहुत जरूरी है. सबसे पहले, अप्लाई करने वाले फॉर्म में अपनी हेल्थ, इनकम और लाइफस्टाइव से जुड़ी सभी जानकारी बिल्कुल सही भरें. पॉलिसी के नियम और शर्तें ध्यान से पढ़ें और समझें. साथ ही प्रीमियम का पेमेंट टाइम पर करें, और अगर चूक हो जाए तो ग्रेस पीरियड का लाभ उठाएं.आप नॉमिनी का नाम सही और अपडेटेड रखें, ताकि क्लेम में कोई दिक्कत न हो. साथ ही, सभी दस्तावेज सुरक्षित जगह पर रखें और परिवार को इसकी जानकारी जरूर दें.
8/9आपको बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने मार्च 2025 में एलआईसी के पक्ष में अहम फैसला सुनाया था, जिसमें बीमा क्लेम से जुड़ी पारदर्शिता पर जोर दिया गया था. कोर्ट ने यह भी कहा था कि जीवन आरोग्य योजना एक कैश बेनिफिट पॉलिसी है, इसलिए यदि बीमारी शराब के कारण हुई हो, तो उसका क्लेम भुगतान योग्य नहीं माना जा सकता.
9/9तो अगर आपका क्लेम खारिज हो जाता है, तो फिर भी घबराने की जरूरत नहीं है. जीहां आप कंपनी के शिकायत निवारण विभाग से संपर्क कर सकते हैं, या फिर बीमा लोकपाल (Insurance Ombudsman) के पास शिकायत दर्ज करा सकते हैं.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है)