नया ऑफर लेटर मिला है? सिर्फ इन-हैंड सैलरी देखकर खुश न हों.. पैकेज के पीछे छिपे वेरिएबल पे, नोटिस पीरियड, जॉइनिंग बोनस की शर्तों और मेडिकल इंश्योरेंस जैसे जरूरी पॉइंट्स को चेक करना न भूलें.जी हां कहीं भारी पैकेज के चक्कर में आप अपना सुकून तो नहीं खो रहे? पूरी डिटेल यहां पढ़ें और स्मार्ट फैसला लें
1/11नई नौकरी का ऑफर लेटर हाथ में आते ही ऐसा लगता है जैसे दुनिया जीत ली हो. हममें से 90% लोग सीधे 'Salary Structure' वाले पेज पर जाते हैं और देखते हैं कि महीने के आखिर में अकाउंट में कितना पैसा (In-hand Salary) आएगा. अगर वो नंबर पसंद आ गया, तो हम तुरंत साइन करने को बेताब हो जाते हैं. जी हां अगर आपको लगता है की सीटीसी पर ज़्यादा हाइक मिला है तो उस पर ध्यान देने से पहले सैलरी स्ट्रक्चर को देखना होगा की आपके हाथ में कितना पैसा आ रहा है? अगर सैलरी अधिक है तो टैक्स में कितना दे रहे हैं
2/11लेकिन ठहरिए! क्या आपको पता है कि कॉर्पोरेट की दुनिया में दिखता कुछ है और बिकता कुछ है? अक्सर जिस मोटे पैकेज को देखकर आप खुश हो रहे होते हैं, उसकी असलियत कुछ और ही होती है.असल में ऑफर लेटर केवल पैसों का हिसाब-किताब नहीं, बल्कि अगले कुछ सालों के आपके सुकून और करियर का 'कानूनी दस्तावेज' है.तो अगर आप भी नई जॉब जॉइन करने जा रहे हैं, तो इन-हैंड सैलरी के अलावा इन बातों पर जरूर गौर करें, वरना बाद में आपकी जेब पर भी बुरा असर हो सकता है.
3/11आजकल कंपनियां CTC (Cost to Company) को बड़ा दिखाने के लिए उसमें 'Variable Pay' या 'Performance Bonus' का तगड़ा तड़का लगाती हैं.यानी कि मान लीजिए पैकेज 12 लाख है, लेकिन उसमें 2 लाख 'Variable' है. इसका मतलब है कि वो 2 लाख आपको तभी मिलेंगे जब आप और कंपनी दोनों अच्छा परफॉर्म करेंगे. इसलिए लेटर में देखें कि वेरिएबल का प्रतिशत कितना है. अगर यह 20-30% से ज्यादा है, तो समझ लीजिए कि आपकी फिक्स्ड सैलरी काफी कम होने वाली है.
4/11कई बार कंपनियां आपको लुभाने के लिए 1-2 लाख का 'Joining Bonus' दे देती हैं.ये आपको सुनने में ये मुफ्त के पैसे जैसा लगे, लेकिन इसके पीछे अक्सर एक Clawback Clause छिपा होता है.असल में अगर ऑफर लेटर में लिखा है कि 'अगर आपने 1 साल से पहले नौकरी छोड़ी, तो जॉइनिंग बोनस वापस करना होगा, तो आप कल में अपने पैसों का नुकसान करवाने वाले हैं. क्योंकि ये हो सकता है कि कंपनी का 6 महीने बाद आपको वर्क कल्चर पसंद नहीं आया या कोई बेहतर मौका मिला, तो आप चाहकर भी नहीं छोड़ पाएंगे क्योंकि आपको वो पैसे जेब से भरने पड़ेंगे.
5/11ज्यादातर लोग इसे इग्नोर कर देते हैं. आजकल कई कंपनियां 90 दिनों (3 महीने) का नोटिस पीरियड रखती हैं.जी हां 3 महीने का नोटिस पीरियड मतलब नई नौकरी का हाथ से जाना भी हो सकता है. अलल में बहुत कम कंपनियां 3 महीने का इंतजार करती हैं. साथ ही, 'Probation Period' के दौरान नोटिस पीरियड कितना होगा, यह भी देखें. क्या कंपनी आपको बिना नोटिस दिए निकाल सकती है? या क्या आप 15 दिन के नोटिस पर छोड़ सकते हैं? इन सभी बातों को कभी भी इग्नोर ना करें.
6/11आज के टाइम में हेल्थ इंश्योरेंस की अहमियत बढ़ गई है.जी हां केवल इन-हैंड सैलरी ना देखें, यह भी देखें कि कंपनी आपको और आपके परिवार को कितने का मेडिकल कवर दे रही है. जी हां अगर कंपनी आपको 5 लाख का ग्रुप इंश्योरेंस दे रही है जिसमें पैरेंट्स भी कवर हैं, तो समझ लें कि सालाना 20-30 हजार रुपये की सेविंग्स हो रही है. ऑफर लेटर में ये भी चेक करें कि क्या कंपनी OPD के बिल रीइम्बर्स करती है? क्या मैटरनिटी कवर है? असल में ये चीजें मुश्किल वक्त में सैलरी से ज्यादा काम आती हैं.
7/11स्टार्टअप्स में आजकल ESOPs (Employee Stock Ownership Plan) का क्रेज बढ़ रहा है.कुछ स्टार्टअप्स कहते हैं कि सैलरी थोड़ी कम ले लो, लेकिन कंपनी के शेयर ले लो, ताकि कल को करोड़पति बन पाएं. लेकिन ESOPs के मामले में Vesting Period चेक करें. अगर शेयर मिलने में 4 साल लगने हैं और हर साल करीब 25% मिलने हैं, तो क्या आप वहां 4 साल टिकने को तैयार हैं? ध्यान रखें कि अगर कंपनी डूबी तो शेयर भी डूबेंगे
8/11ऑफर लेटर में काम के घंटों का जिक्र अक्सर Standard Industry Hours के नाम पर गोल कर दिया जाता है. तो इसलिए पहले ही देखें कि क्या कंपनी 5 दिन की है या 6 दिन की? क्या 'Work From Home' की सुविधा है? अगर हाइब्रिड मॉडल है, तो कितने दिन ऑफिस जाना जरूरी है? अगर ऑफिस आपके घर से 2 घंटे दूर है और कंपनी 6 दिन बुला रही है, तो आपकी बढ़ी हुई सैलरी पेट्रोल और थकान में ही निकल जाएगी.
9/11आपकी सैलरी से PF (Provident Fund) कटता है, लेकिन क्या आपको पता है कि कंपनी का योगदान आपके CTC का हिस्सा है या उसके ऊपर? इसी तरह 'Gratuity' का पैसा आपको तभी मिलता है जब आप वहां 4 साल 7 महीने (तकनीकी रूप से 5 साल) पूरे कर लें. जी हां नए वेज रूल में बेसिक और पीएफ का रोल बलता है तो ऑफर लेटर को नए रूल से हिसाब से ही देखें. साथ ही टैक्स बचाने के चक्कर में बेसिक को बहुत ज्यादा कम न होने दें.
10/11आमतौर पर ऐसा होता है कि हम ऑफर लेकर में इनहैंड सैलरी के साथ पीएफ, इंश्योरेंस बगैहरा भी देख लेते हैं लेकिन जिस जरूरी चीज को इग्नोर करते हैं वो है लीव. असल में ऑफिस से मिलने वाली लीव हमारा हक हैं,क्योंकि कुछ कंपनी में पीएल , सीएल..लीव आगे नहीं बढ़ती हैं और कुछ में बची लीव का बेसिक सैलरी कै पैसा मिलता है. इसलिए अगर लेटर में लीव मेंशन नहीं तो एचआई से इसको लेकर पहले ही क्लियर हो जाएं.
11/11तो फिर अगली बार जब ऑफर लेटर आए, तो सिर्फ जीरो न गिनें, बल्कि इन बारीकियों को भी पढ़ें.क्योंकि एक सही फैसला आपको करियर की ऊंचाइयों पर ले जा सकता है, और एक गलत दस्तखत आपकी रातों की नींद उड़ा सकता है.