अगर आप नौकरीपेशा हैं तो हर महीने EPFO में कॉन्ट्रीब्यूशन करते होंगे. हर महीने कर्मचारी की बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का 12 फीसदी अमाउंट कटकर पीएफ अकाउंट में जाता है. इतना ही योगदान कंपनी की ओर से भी किया जाता है. ईपीएफ पर मौजूदा समय में 8.25% के हिसाब से ब्याज दिया जा रहा है. ये ब्याज तमाम सरकारी स्कीम्स पर मिलने वाले ब्याज से बेहतर है. ऐसे में लंबे समय तक ईपीएफ में कॉन्ट्रीब्यूट करके अच्छा खासा पैसा जमा किया जा सकता है. लेकिन अगर आप EPF पर मिलने वाले तगड़े ब्याज को अच्छे से वसूल करना चाहते हैं, तो आपको एक काम करना होगा. यहां जानिए इस बारे में.
1/6नियम के मुताबिक अगर आप EPF में अपने कॉन्ट्रीब्यूशन को बढ़ाना चाहें तो आप सीधेतौर पर ऐसा नहीं कर सकते. लेकिन आप वॉलेंटरी प्रोविडेंट फंड (Voluntary Provident Fund - VPF) के जरिए आप ईपीएफ में भी अपने योगदान को बढ़ा सकते हैं और अपने निवेश पर उसी ब्याज (8.25%) का फायदा उठा सकते हैं, जो आपको ईपीएफ पर मिलता है.
2/6कोई भी ईपीएफओ मेंबर वीपीएफ के जरिए प्रोविडेंट फंड में अपने कॉन्ट्रीब्यूशन को बढ़ा सकता है. VPF में सैलरी कटाने की कोई सीमा तय नहीं होती. कर्मचारी चाहे तो बेसिक सैलरी का 100 फीसदी तक योगदान भी कर सकता है.
3/6अगर आप भी वीपीएफ में निवेश करने में रुचि रखते हैं तो आपको अपनी कंपनी के HR से मिलकर उसे ये बताना होगा कि आप पीएफ में अपने निवेश को बढ़ाना चाहते हैं. HR की मदद से आप अपना वीपीएफ अकाउंट भी ईपीएफ के साथ-साथ खोल सकते हैं. आपको अपनी सैलरी का कितना योगदान बढ़ाना है, इसके बारे में आपको एक फॉर्म भरकर HR को देना होगा. इसके बाद EPF Account के साथ आपके VPF अकाउंट की प्रक्रिया पूरी की जाएगी. इस प्रक्रिया पूरी होने के बाद आप वीपीएफ में अपनी Salary से पैसा कटवाना चालू कर सकते हैं.
4/6VPF में इन्वेस्टमेंट एक बार शुरू हो गया तो इसका पैसा भी हर महीने उसी तरह अपने आप आपकी सैलरी से कटता रहेगा, जैसे ईपीएफ का कटता है. एक बार VPF का विकल्प चुनने के बाद, कम से कम 5 साल तक उसमें पैसा जमा करना अनिवार्य है.
5/6वीपीएफ की रकम पर मिलने वाला ब्याज और फायदे सबकुछ ईपीएफ की तरह ही हैं, वैसे ही रकम निकासी के नियम भी EPF जैसे ही हैं. वीपीएफ फंड की पूरी रकम की निकासी आप रिटायरमेंट के बाद ही कर सकते हैं. 5 साल बाद जब इसका लॉक इन पीरियड खत्म होता है, तब आप इससे आंशिक धनराशि निकाल सकते हैं. इसके लिए ऑनलाइन क्लेम किया जा सकता है.
6/6अगर आप अपनी नौकरी को बदलते हैं पीएफ अकाउंट को भी ईपीएफ की तरह से ट्रांसफर किया जा सकता है. वीपीएफ में निवेश करने पर इसके ब्याज और निकासी की रकम पर टैक्स नहीं देना पड़ता. इसलिए इसे Exempt-Exempt-Exempt (E-E-E) श्रेणी का निवेश माना जाता है. इसमें आयकर कानून के सेक्शन 80C के तहत टैक्स छूट का फायदा मिलता है. इस फंड में आप एक वित्त वर्ष में 1.50 लाख रुपए तक की टैक्स छूट के लिए दावा कर सकते हैं.