इन दिनों हर जगह पर Gold के दाम काफी तेजी से बढ़ रहे हैं. माना जा रहा है कि जल्द ही ये 1,00,000 रुपए का आंकड़ा छू सकता है. गोल्ड एक ऐसी धातु है जिसे सभी खरीदते हैं. शादी, सगाई, मुंडन जैसे घर के तमाम रीति रिवाजों से लेकर महिलाओं के श्रंगार तक सोना वर्षों से परंपरा का हिस्सा रहा है. आजकल तो लोग इसे निवेश का भी अच्छा ऑप्शन मान रहे हैं और इस कारण इसे पोर्टफोलियो का हिस्सा बना रहे हैं. जब भी आप सोना खरीदने जाते हैं तो उस दिन के Gold Price जरूर चेक करते होंगे. लेकिन आधा हिंदुस्तान इस बात को नहीं जानता होगा कि आखिर वायदा बाजार से लेकर स्पॉट प्राइस तक, कैसे तय होते हैं सोने के दाम.
1/5आप जिस प्राइस पर ज्वेलर्स से सोना खरीदते हैं उसे स्पॉट रेट यानी हाजिर भाव कहा जाता है. ये भाव मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) के आधार पर तय किए जाते हैं.
2/5MCX वायदा बाजार पर सोने के दाम भारतीय बाजारों में सोने की मांग, आपूर्ति के आंकड़ों को जुटाकर और ग्लोबल मार्केट में मुद्रास्फीति की स्थिति को ध्यान में रखकर तय किए जाते हैं. इसके अलावा वायदा बाजार, सोने के दाम तय करने से पहले लंदन स्थित बुलियन मार्केट एसोसिएशन के साथ भी समन्वय भी करता है. इसके बाद ये दाम तय होते हैं. MCX पर जो दाम होते हैं वो वैट, लेवी एवं लागत को जोड़कर घोषित किए जाते हैं.
3/5सोने के दाम पर घरेलू और वैश्विक, दोनों तरह के आर्थिक और राजनीतिक फैसले भी असर डालते हैं. जैसे अगर हमारे देश में सरकार सोने के इंपोर्ट को लेकर कोई नया नियम लागू करती है, तो सोने के दाम पर उसका असर पड़ता है. वहीं सोने का एक्सपोर्ट करने वाले देश में किसी साल उत्पादन घट जाता है, तो इससे भी सोने की कीमतों पर असर पड़ता है.
4/5स्पॉट प्राइस यानी जिस कीमत पर आप ज्वैलर्स से सोना खरीदते हैं, उन दामों को ज्यादातर शहरों के सर्राफा एसोसिएशन के सदस्य मिलकर, बाजार खुलने के समय तय करते हैं. हर शहर के सर्राफा व्यापारियों की ओर से भाव तय किए जाने की वजह से इनके दामों में थोड़ा-बहुत फर्क भी देखने को मिलता है. कैरेट के आधार पर सोने की कीमतें अलग-अलग तय होती हैं.
5/5दुनियाभर में सोने की कीमतें लंदन के बुलियन मार्केट में तय होती हैं. यह दुनिया का सबसे बड़ा बुलियन मार्केट है. 2015 के पहले लंदन गोल्ड फिक्स सोने की नियामक इकाई थी जो कीमतें तय करती थीं, लेकिन 20 मार्च 2015 के बाद एक नई इकाई लंदन बुलियन मार्केट एसोसिएशन बनाई गई. इसे ICE प्रशासनिक बेंच मार्क चलाता है. ये संगठन दुनिया के तमाम देशों की सरकारों से जुड़े राष्ट्रीय स्तर के संगठनों के साथ मिलकर तय करता है कि सोने की कीमत क्या होनी चाहिए.