क्रेडिट कार्ड (Credit Card) का इस्तेमाल तेजी से बढ़ रहा है. क्रेडिट कार्ड से पैसे खर्च करना बिल्कुल वैसा है जैसे आप किसी बैंक से लोन (Bank Loan) लेकर उसे खर्च करते हैं. ऐसे में कई बार ऐसा भी वक्त आता है जब लोगों के पास अपना कर्ज (Debt) चुकाने यानी क्रेडिट कार्ड का बिल भरने के लिए पर्याप्त पैसे नहीं होते हैं.
1/5बैलेंस ट्रांसफर के जरिए आप एक कार्ड से दूसरे कार्ड के बिल का भुगतान कर सकते हैं. इस प्रक्रिया को ही बैलेंस ट्रांसफर कहा जाता है. हालांकि, यह एक कर्ज को चुकाने के लिए दूसरा कर्ज लेने जैसा है. कुछ लोगों के इससे मदद मिलती है तो कुछ लोग एक बड़े डेट ट्रैप में फंस जाते हैं.
2/5मान लीजिए कि आपके एक क्रेडिट कार्ड पर बकाया है, लेकिन आप उसका भुगतान नहीं कर पा रहे हैं. अगर आप अगले महीने उसका भुगतान करने की सोचते हैं तो आपको लेट फीस के साथ-साथ करीब महीने भर उस पैसे पर ब्याज चुकाना होगा. यह ब्याज भी 36-48 फीसदी सालाना की दर से लग सकता है. ऐसे में अगर आपके पास दूसरा क्रेडिट कार्ड है तो उससे बहुत की कम ब्याज पर बैलेंस ट्रांसफर कर सकते हैं.
3/5किसी भी क्रेडिट कार्ड से दूसरे कार्ड का बिल चुकाने यानी बैलेंस ट्रांसफर करने के दो तरीके हो सकते हैं. पहला तरीका ये है कि आपको बैंक के कस्टमर केयर पर फोन करना होगा और उनसे बैलेंस ट्रांसफर करवाना होगा. दूसरा तरीका ये है कि आप खुद ही बैंक के ऐप या वेबसाइट से बैलेंस ट्रांसफर कर लें. हालांकि, इसके लिए आपको कार्ड डिटेल्स की जरूरत होगी. अलग-अलग बैंक में इसकी प्रोसेस अलग-अलग होती है.
4/5अगर आप बैलेंस ट्रांसफर नहीं करेंगे तो आपको अपने कार्ड का पूरा बिल चुकाने के लिए कहीं ना कहीं से पैसों का इंतजाम करना होगा. इसके लिए या तो आपको लेट फीस और भारी भरकम ब्याज चुकाना होगा, या फिर लोन लेना होगा और उसका भी ब्याज चुकाना होगा. वहीं अगर आप बैलेंस ट्रांसफर करते हैं तो उस सूरत में आपको जो अतिरिक्त पैसा खर्च करना होगा, वह एक लोन की तुलना में कम रहेगा. वहीं बिल ना चुकाने की वजह से आप डिफॉल्ट करने की कैटेगरी में भी नहीं आएंगे.
5/5बैलेंस ट्रांसफर मतलब एक कर्ज (क्रेडिट कार्ड) को चुकाने के लिए दूसरा कर्ज (दूसरे कार्ड से भुगतान) ले रहे हैं. अगर आप इसका बहुत ज्यादा इस्तेमाल करते हैं तो यह आपके सिबिल स्कोर पर असर डाल सकता है. इसमें एक बड़ी दिक्कत ये है कि आप कई बार अलग-अलग कार्ड के लिए बैलेंस ट्रांसफर का इस्तेमाल कर लेते हैं तो आप कर्ज को चुकाते-चुकाते एक नए कर्ज के जाल में फंस सकते हैं.