Gratuity Rules India: ग्रेच्युटी कर्मचारी की मेहनत और वफादारी का इनाम होती है, जो नौकरी छोड़ने या रिटायरमेंट पर मिलती है. 2025 के नए नियमों के बाद अब 1 साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी का हक मिल सकता है. सैलरी के आधार पर इसका कैलकुलेशन आसान तरीके से किया जाता है.
1/9जब आप किसी कंपनी को अपना लंबा समय और मेहनत देते हैं, तो विदाई के वक्त Employe आपको खाली हाथ नहीं जाने देता है, असल में तब आपको मिलती है ग्रेच्युटी (Gratuity). जी हां ग्रेच्युटी एक कर्मचारी को उसकी लंबी और समर्पित सेवा के लिए नियोक्ता (Employer) की ओर से दिया जाने वाला एक बेनेफिट्स होता है.यानी कि च्युटी रिटायरमेंट या नौकरी बदलने पर आपके बैंक खाते में खुशियां लेकर आती है और फ्यूचर को सेफ बनाने में मदद करती है.
2/9ग्रेच्युटी के रूल्स में हाल ही में बड़ा बदलाव हुआ,यानी ये अब कर्मचारियों के लिए किसी 'दिवाली बोनस' से कम नहीं है. सरकार ने पुराने 29 कानूनों के जाल को हटाकर 4 नए लेबर कोड लागू कर दिए हैं, जिससे ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन अब और भी साफ और फायदेमंद हो गया है, सबसे बड़ी खुशखबरी फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों के लिए है,अब उन्हें नौकरी छोड़ने पर खाली हाथ नहीं जाना पड़ेगा, चाहे नौकरी कितने भी कम समय की हो. 21 नवंबर 2025 को आए इन नए नियमों का मकसद साफ है कि आपकी मेहनत का पूरा हक और रिटायरमेंट पर मोटी रकम की गारंटी.
3/9ग्रेच्युटी एक तरह से कंपनी से वफादारी का इनाम माना जाता है.असल में अगर आप एक ही कंपनी में 1 साल या इससे अधिक साल तक लगातार काम करते हैं, तो आप ग्रेच्युटी के हकदार हो जाते हैं. अगर अब आप किसी कंपनी में 1 साल तक काम करेंगे तो बेसिक सैलरी के आधार पर ग्रेच्युटी का लाभ मिलेगा.वैसे भी पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट, 1972 के तहत, 10 या उससे ज्यादा कर्मचारियों वाली कंपनियों को कानूनी तौर पर ग्रेच्युटी देना जरूरी होता है.
4/9ग्रेच्युटी इंप्लाइज के लिए मिलने वाला एक जरूरी फाइनेंशियल बेनेफिट्स है, जो उनकी सालों की मेहनत का सम्मान माना जाता है. यह बेनेफिट्स उन सभी कर्मचारियों को मिलती है जो किसी ऐसी कंपनी, फैक्ट्री या संस्थान में काम करते हैं जहां 10 या उससे अधिक कर्मचारी हों. पहले ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल की लगातार सेवा जरूरी होती थी, लेकिन 2025 के नए रूल्स के बाद फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट कर्मचारियों को भी केवल 1 साल की नौकरी पर इसका हक मिल सकता है. यह प्राइवेट, सरकारी और PSU,तीनों सेक्टर के कर्मचारियों पर लागू होता है. आमतौर पर ग्रेच्युटी रिटायरमेंट, नौकरी छोड़ने, मृत्यु या स्थायी विकलांगता की स्थिति में दी जाती है.वैसे यह राशि कर्मचारी की आखिरी सैलरी और उसकी टोटल वर्किंग डेज के आधार पर तय होती है और यह उसका कानूनी अधिकार है, न कि कंपनी की मर्जी.
5/9ग्रेच्युटी उन कर्मचारियों के लिए एक जरूरी फायदा है जो लंबे समय तक किसी ऑर्गनाइजेशन में काम करते हैं. ये एम्प्लॉयर की तरफ से सभी इंप्लाइज की मेहनत और वफादारी का बेनेफिट्स है. ग्रेच्युटी का कैलकुलेशन सर्विस के हर पूरे साल के लिए 15 दिनों की सैलरी पर आधारित है, जिसमें एक महीने में काम करने के दिनों की संख्या 26 है.यानी कि "लास्ट ड्रॉन सैलरी" में बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता शामिल होता है.तो अगर इंप्लाइज ने आखिरी साल में छह महीने से ज्यादा काम किया है, तो कैलकुलेशन के लिए इसे अगले पूरे साल में राउंड अप किया जाता हैय
6/9ग्रेच्युटी कैलकुलेट करने का तरीका बेहद ही आसान होता है. ग्रेच्युटी निकालने के लिए कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी और डीए को जोड़कर उसे 15 से गुणा किया जाता है और फिर 26 से भाग दिया जाता है. इसके बाद जितने साल की सेवा होगी, उससे गुणा कर अंतिम राशि तय होती है। यानी 1 साल की सर्विस पर भी कर्मचारी को (अंतिम सैलरी × 15/26) के बराबर ग्रेच्युटी मिलेगी,यानी कि ग्रेच्युटी = (अंतिम बेसिक सैलरी + डीए) × 15 ÷ 26 × वर्किंग ईयर.
7/9मान लीजिए उदाहरण के लिए किसी ने एक साल तक एक कंपनी में काम किया. नए लेबर कोड में बेसिक सैलरी कम से कम कुल वेतन का 50 फीसदी अब होना चाहिए. अगर आपकी सैलरी 50,000 रुपये है और आपने 1 साल तक नौकरी की है. तो मान लेते हैं कि ₹50,000 में से बेसिक + डीए (DA) 30,000 रुपये है.वैसे तो ये सभी कंपनियों में अलग हो सकता है. एक साल की नौकरी में ग्रेच्युटी के लिए साल के अंतिम महीने की सैलरी को गणना के तौर पर ली जााएगी.यानी कि 1 साल की नौकरी पर ग्रेच्युटी= (30,000 × 15 × 1) ÷ 26= 17,308 रुपये,यानी कि 17,308 रुपए 1 साल की ग्रेच्युटी आपको मिलेगी.
8/9अगर किसी कर्मचारी ने किसी संस्थान में लगातार 1 साल की नौकरी पूरी कर ली है और उस पर किसी तरह की धोखाधड़ी या गैरकानूनी गतिविधि का आरोप नहीं है, तो उसे ग्रेच्युटी की पूरी रकम पाने का कानूनी अधिकार होता है,लेकिन कंपनी भुगतान में आनाकानी करती है, तो कर्मचारी जिला श्रम आयुक्त के पास शिकायत कर सकते हैं. फैसला कर्मचारी के पक्ष में आने पर कंपनी को ग्रेच्युटी के साथ ब्याज और जुर्माना भी देना पड़ता है. वहीं, नोटिस पीरियड को लेकर भी कई लोग भ्रम में रहते हैं कि क्या इसे वर्किंग टेन्योर में जोड़ा जाता है या नहीं, लेकिन बता दें कि नोटिस पीरियड में ग्रेच्युटी को जोड़ा जाता है.
9/92025 के नए ग्रेच्युटी नियम कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आए हैं.तो अब फिक्स्ड-टर्म कर्मचारियों को सिर्फ 1 साल की सेवा पर भी ग्रेच्युटी का हक मिलेगा, जबकि पहले 5 साल की शर्त थी. हालांकि स्थायी कर्मचारियों के लिए 5 साल की सीमा बनी रहेगी, इसके साथ ही CTC का कम से कम 50% हिस्सा बेसिक सैलरी होना अनिवार्य कर दिया गया है, जिससे ग्रेच्युटी की राशि बढ़ेगी। ₹20 लाख तक की टैक्स-फ्री सीमा भी बरकरार रहेगी, जिससे लाखों कर्मचारियों को सीधा फायदा मिलेगा.