अगर आप नौकरी करते हैं तो ग्रेच्युटी आपके लिए बड़ी फाइनेंशियल सुरक्षा होती है. नए लेबर कोड के बाद कई मामलों में 1 साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है. हालांकि गंभीर अनुशासनहीनता, धोखाधड़ी या कंपनी को नुकसान पहुंचाने जैसी स्थितियों में कंपनी ग्रेच्युटी रोक भी सकती है.
1/8अगर आप नौकरी करते हैं तो ग्रेच्युटी आपके लिए एक अहम फाइनेंशियल फायदा है. नए लेबर कोड लागू होने के बाद ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों में बदलाव हुआ है. अब कर्मचारियों को ग्रेच्युटी पाने के लिए पहले की तरह 5 साल इंतजार नहीं करना पड़ता. सिर्फ 1 साल काम करने के बाद भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार मान लिया जाएगा.
2/8क्या आप जानते हैं कि कंपनी चाहे तो कर्मचारी को ग्रेच्युची देने से मना कर सकती है. जी हां कुछ ऐसी परिस्थितियां भी होती हैं जब कंपनी ग्रेच्युटी देने से इनकार कर सकती है.तो इसलिए कर्मचारियों के लिए यह समझना जरूरी है कि कौन-सी गलतियां उनकी मेहनत की कमाई पर असर डाल सकती हैं. तो अगली स्लाइड से जानेंगे किन परिस्थितियों में कंपनी ग्रेच्युटी रोक सकती है?
3/8अगर किसी कर्मचारी पर हिंसा, धमकी, उत्पीड़न या कंपनी के नियमों का जानबूझकर उल्लंघन करने जैसे गंभीर आरोप साबित हो जाते हैं, तो कंपनी उसकी ग्रेच्युटी रोक सकती है.तो ऐसे मामलों में कंपनी को जांच और तय प्रक्रिया पूरी करनी होती है, तभी यह फैसला अप्लाई किया जा सकता है.
4/8अगर किसी कर्मचारी की मिस्टेक, लापरवाही या गैरजिम्मेदाराना काम की वजह से कंपनी को बड़ा फाइनेंशियल नुकसान होता है, तो कंपनी उसकी ग्रेच्युटी में कटौती कर सकती है. हालांकि ऐसा फैसला बिना आधार के नहीं लिया जा सकता. कंपनी को यह साबित करना होता है कि नुकसान वाकई में कर्मचारी की वजह से हुआ है.जी हां जांच और सबूत के बाद ही ग्रेच्युटी की रकम में उतनी ही कटौती की जाती है, जितना नुकसान कंपनी को हुआ हो.
5/8अगर किसी कर्मचारी पर चोरी, रिश्वत लेने, फर्जी दस्तावेज बनाने या किसी अन्य तरह की धोखाधड़ी का आरोप साबित हो जाता है, तो कंपनी उसकी पूरी ग्रेच्युटी रोक सकती है.असल में ऐसे मामलों में जांच और कानूनी प्रोसेस के बाद ही कंपनी यह फैसला लेती है.
6/8अगर किसी कंपनी में ग्रेच्युटी एक्ट लागू नहीं होता, तो ग्रेच्युटी देना कंपनी के फैसले पर निर्भर करता है.तो फिर ऐसी स्थिति में कर्मचारी कानूनी दावा नहीं कर सकता है.
7/8कंपनी किसी कर्मचारी की ग्रेच्युटी बिना वजह नहीं रोक सकती.तो इसके लिए पहले कर्मचारी को शो-कॉज नोटिस देना पड़ता है और पूरी प्रोसेस के बाद ही फैसला लिया जाता है. जी हां अगर कर्मचारी दोषी पाया जाता है, तो कंपनी उतनी ही रकम काट सकती है जितना नुकसान हुआ है.