ग्रेच्युटी नौकरी करने वालों के लिए एक तरह की रिटायरमेंट सेविंग है, जो लंबे समय तक कंपनी में काम करने के बाद मिलती है. आमतौर पर यह नियम है कि अगर आप कम से कम 5 साल लगातार नौकरी करते हैं तो आपको ग्रेच्युटी का हक मिलता है. लेकिन बहुत लोग ये नहीं जानते कि कुछ खास हालात में 5 या 10 साल काम करने के बाद भी ग्रेच्युटी का एक भी रुपया हाथ नहीं आता. आइए जानते हैं वो 4 बड़ी वजहें, जहां आपके सालों का पसीना भी ग्रेच्युटी में नहीं बदल पाता.
1/6ग्रेच्युटी एक्ट उन सभी कंपनी, दुकानों, कारखानों, खदानों और अन्य प्रतिष्ठानों पर लागू है, जिनमें 10 या 10 से ज्यादा लोग काम करते हैं. लेकिन अगर किसी कंपनी में 10 से 10 कर्मचारी हैं और कंपनी या संस्थान Gratuity Act के तहत रजिस्टर्ड न हो तो कर्मचारी ग्रेच्युटी एक्ट के तहत नहीं आते हैं. ऐसे में कर्मचारियों को ग्रेच्युटी का फायदा आमतौर पर नहीं मिलता. लेकिन अगर कंपनी स्वेच्छा से ग्रेच्युटी देना चाहे तो दे सकती है. ऐसे में ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन का फॉर्मूला अलग होता है. ऐसे में Gratuity की रकम, हर साल के लिए आधे महीने की सैलरी के बराबर होगी. लेकिन महीने भर काम करने के दिनों की संख्या 30 दिन मानी जाएगी, 26 नहीं.
2/6अगर कर्मचारी पर कंपनी की संपत्ति को नुकसान पहुंचाने, हिंसा करने या किसी तरह की गंभीर अनुशासनहीनता का आरोप साबित हो जाए तो कंपनी को ग्रेच्युटी रोकने का पूरा अधिकार है. ये फैसला ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत वैध है. ऐसे में फिर चाहे आपने कंपनी में 5 साल की सेवाएं दी हों या 10 साल की, अगर कंपनी आपको ग्रेच्युटी देने से इनकार कर दे तो वो आपको नहीं मिलेगी.
3/6कर्मचारी द्वारा धोखाधड़ी, गबन या किसी भी तरह की आपराधिक गतिविधि साबित होने पर ग्रेच्युटी का हक खत्म हो जाता है. ऐसी स्थिति में न सिर्फ ग्रेच्युटी, बल्कि कंपनी आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी कर सकती है.
4/6अगर आपके किसी काम या लापरवाही से कंपनी को बड़ा आर्थिक नुकसान होता है, तो कंपनी ग्रेच्युटी की रकम पूरी तरह से रोक सकती है. ये प्रावधान इसलिए रखा गया है ताकि कर्मचारी कंपनी की संपत्ति और काम को गंभीरता से लें.
5/6हालांकि इनमें से किसी भी तरह की स्थिति में ग्रेच्युटी को रोकने के लिए कंपनी को पहले सबूत और उसकी वजह को पेश करना होगा. जो भी वजह कंपनी दे रही है, उसके लिए उसे कर्मचारी को कारण बताओ नोटिस जारी करना होता है. इसके बाद दोनों पक्षों की सुनवाई होती है. कर्मचारी के दोषी पाने के बाद ही ग्रेच्युटी का पैसा रोका जाएगा.
6/6नियम के अनुसार अगर कंपनी ग्रेच्युटी एक्ट के तहत रजिस्टर्ड है तो 5 साल की लगातार सेवाएं देने वाले कर्मचारी को ग्रेच्युटी का हकदार माना जाता है. अगर किसी कर्मचारी ने कंपनी में 4 साल 8 महीने तक काम किया है तो भी उसकी नौकरी पूरे 5 साल की मानी जाती है और उसे 5 साल के हिसाब से उसे ग्रेच्युटी का अमाउंट दिया जाता है. लेकिन अगर उसने 4 साल 8 महीने से कम समय की नौकरी की है तो उसकी नौकरी की अवधि को 4 साल गिना जाएगा और ऐसे में उसे ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी.