Gratuity Calculator: नए लेबर कोड के बाद ग्रेच्युटी का नियम पूरी तरह बदल गया है और कर्मचारियों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है. अब लगातार एक साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी का हक मिलता है, जबकि पहले पांच साल की शर्त थी. तो चलिए हम समझेंगे कि 34,500, 45,500 की बेसिक सैलरी पर अब कितना पैसा मिलेगा.
1/9नए लेबर कोड के आने के बाद ग्रेच्युटी को लेकर कर्मचारियों की सबसे बड़ी परेशानी खत्म हो गई है. पहले जहां ग्रेच्युटी पाने के लिए 5 साल लगातार नौकरी करना जरूरी था, अब यह टाइमिंग घटाकर सिर्फ 1 साल कर दी गई है. यानी अब कर्मचारी सिर्फ एक साल की सर्विस देने के बाद भी ग्रेच्युटी का हकदार बन जाता है. हालांकि इसमें एक अहम शर्त भी जुड़ी है जिसके बारे में बहुत कम कर्मचारी जानते हैं और यही शर्त तय करती है कि आपके एक साल पूरे होने के बाद भी आप ग्रेच्युटी के योग्य हैं या नहीं.
2/9ग्रेच्युटी का फायदा तभी मिलता है जब कर्मचारी बिना किसी लंबे गैप के लगातार 1 साल तक कंपनी में काम करे. मान लीजिए कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ रहा है तो उसकी ग्रेच्युटी की गणना उसके जॉइनिंग दिन से लेकर आखिरी वर्किंग डे तक की जाएगी. लेकिन अगर बीच में उसने लंबी छुट्टी या ब्रेक लिया है, तो यह उसकी ग्रेच्युटी पाने की प्रक्रिया को मुश्किल बना सकता है.तो ऐसे में यह समझना जरूरी है कि ग्रेच्युटी की सही कैलकुलेशन कैसे होती है और इसमें किन बातों का खास ध्यान रखा जाता है.
3/9अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि केवल एक साल नौकरी करने पर ग्रेच्युटी कितनी मिलती है. इसका जवाब निकालना बिल्कुल आसान है, क्योंकि ग्रेच्युटी का फॉर्मूला पहले से तय है. इसमें आपकी आखिरी बेसिक सैलरी और डीए को जोड़कर उस रकम को 15 से गुणा किया जाता है और फिर 26 से डिवाइड किया जाता है. 15 दिन का वेतन और 26 औसत वर्किंग डेज को ध्यान में रखकर ही यह फॉर्मूला बनाया गया है. इस आसान गणना से कोई भी कर्मचारी अपनी ग्रेच्युटी तुरंत समझ सकता है.
4/9कर्मचारियों के मन में अक्सर यह चिंता रहती है कि नौकरी छोड़ते समय उन्हें कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी.तो अच्छी बात यह है कि इसका फॉर्मूला बेहद आसान है और कोई भी कर्मचारी इसे खुद समझ सकता है. ग्रेच्युटी आपकी अंतिम बेसिक सैलरी, 15 दिनों की तय वैल्यू और नौकरी के कुल सालों के आधार पर तय होती है. इसका फॉर्मूला है लास्ट बेसिक सैलरी × (15/26) × कुल साल. इस आसान गणना से आप तुरंत जान सकते हैं कि नौकरी छोड़ते समय आपके हाथ में कितनी एक्स्ट्रा रकम आने वाली है.
5/9बहुत से कर्मचारियों को ग्रेच्युटी फॉर्मूले में 26 आने का कारण समझ नहीं आता, जबकि इसके पीछे की गणना बेहद आसान है. नए लेबर कोड के अनुसार, महीने में औसतन 26 कार्यदिवस माने जाते हैं, क्योंकि साप्ताहिक छुट्टियों को निकालने के बाद वास्तविक वर्किंग डेज इतने ही बचते हैं. इसी वजह से ग्रेच्युटी के कैलकुलेशन में 26 का उपयोग किया जाता है.तो अब मान लीजिए किसी कर्मचारी की बेसिक सैलरी 70,000 रुपये है और वह एक साल बाद नौकरी छोड़ता है, तो इसी फॉर्मूले से उसकी ग्रेच्युटी तुरंत निकाली जा सकती है.
6/9अगर आपकी बेसिक सैलरी 34,500 रुपये है, तो एक साल की नौकरी पर मिलने वाली ग्रेच्युटी लगभग ₹ 19,904 रुपये बनती है. यानी अब कम अवधि तक काम करने वाले कर्मचारियों को भी सीधा लाभ मिल रहा है. पहले जहां पांच साल पूरे किए बिना ग्रेच्युटी नहीं मिलती थी, वहीं नए नियमों के बाद एक, दो या तीन साल की सेवा पर भी कर्मचारी इस सुविधा के हकदार हो गए हैं. यह बदलाव खासतौर पर नौकरी बदलने वाले युवाओं और कॉन्ट्रैक्ट बेसिस पर काम करने वालों के लिए बड़ी राहत साबित हो रहा है.
7/9जी हां अगर आपकी बेसिक सैलरी करीब 45,500 रुपये है. तो अब 1 साल में ही आपका एक तगड़ी रकम ग्रेच्युटी की मिल जाने वाली है. जी हां आपको इस सैलरी के हिसाब से करीब ₹ 26,250 तक की ग्रेच्युटी अपनी कंपनी से मिलने वाली है. यानी कि मात्र 12 महीने में ही खाते में ₹ 26,250 रुपए ग्रेच्युटी के मिल जाएंगे, जो 5 साल की ग्रेच्युटी के रूल में ₹1,31,250 करीब होते.
8/9एक साल की नौकरी पर मिलने वाली ग्रेच्युटी का हिसाब निकालना बेहद आसान है, क्योंकि इसका फॉर्मूला सरकार ने पहले से तय कर रखा है. इसमें आपकी आखिरी बेसिक सैलरी और डीए को जोड़कर उस रकम को 15 से गुणा किया जाता है और फिर 26 से भाग दिया जाता है, जो महीने के औसत वर्किंगडेज को पेश करता है. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की अंतिम सैलरी 34,500 रुपये है और उसने एक साल काम किया है, तो ( 34,500×15×1)/26 के आधार पर लगभग ₹ 19,904 रुपये ग्रेच्युटी मिलती है, यानी कम अवधि की नौकरी में भी अच्छी रकम मिल जाती हैय
9/9ग्रेच्युटी समझने में जितनी साधारण है, उतनी ही फायदेमंद भी है। यह आपकी आखिरी बेसिक सैलरी और डीए के 15 दिनों के बराबर रकम के रूप में मिलती है. सैलरी जितनी ज्यादा होगी, ग्रेच्युटी भी उतनी बढ़ेगी. खास बात यह है कि किसी कंपनी में छह महीने से अधिक काम करना भी पूरा एक साल माना जाता है. यानी 11 महीने की नौकरी पर भी कर्मचारी ग्रेच्युटी का हकदार होता है. सबसे बड़ा फायदा यह है कि ग्रेच्युटी पूरी तरह टैक्स-फ्री मिलती है, जो बार-बार नौकरी बदलने वालों के लिए बड़ी राहत है.(नोट: खबर केवल सामान्य जानकारी पर आधारित है. कैलकुलेशन में बदलाव हो सकता है)