प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों में ग्रेच्युटी को लेकर अक्सर भ्रम रहता है,दरअसल लोग सोचते हैं कि ये सिर्फ 5 साल की नौकरी के बाद मिलती है, लेकिन कुछ खास स्थितियों में 5 साल से कम सेवा पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है.तो इसके लिए नियम अलग हैं, जिन्हें जानना जरूरी है.
1/7Gratuity Calculation: प्राइवेट नौकरी करने वालों के मन में अक्सर ग्रेच्युटी को लेकर सवाल और कंफ्यूजन होता है. मन में लगता रहता है कि ग्रेच्युटी ये सिर्फ 5 साल बाद ही मिलती है? असल में, आमतौर पर 5 साल की निरंतर नौकरी के बाद ही ग्रेच्युटी का पेमेंट होता है, लेकिन कुछ खास परिस्थितियों में यह टाइमिंग जरूरी नहीं होती. उदाहरण के तौर पर, अगर किसी कर्मचारी की मृत्यु या स्थायी विकलांगता आदि हो जाए, तो उसे या उसके आश्रितों को ग्रेच्युटी की राशि 5 साल से पहले भी दी जा सकती है. तो यही कारण है कि ऐसे में जरूरी है कि हर कर्मचारी ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों की सही जानकारी रखे.
2/7ग्रेच्युटी एक तरह का धन्यवाद या इनाम माना जाता है, जो एक employer अपने कर्मचारी को लॉन्ग टर्म तक कंपनी में लगातार काम देने के लिए देता है. यह एकमुश्त भुगतान होता है. यह 'भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972' (Payment of Gratuity Act, 1972) के तहत आता भी है, जो सभी कर्मचारियों को रिटायरमेंट के समय फाइमेंशियल सेफ्टी देने के उद्देश्य से बनाया गया है. यह किसी कर्मचारी की सैलरी का हिस्सा नहीं है, बल्कि एक एक्स्ट्रा बेनेफिट्स होता है.
3/7असल में इसके अधिनियम के अनुसार, ग्रेच्युटी पाने के लिए सबसे पहली और सबसे अहम शर्त यह है कि कर्मचारी ने किसी एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल की लगातार काम किया हो. यह रूल रिटायरमेंट, इस्तीफे या नौकरी छोड़ने के बाद ग्रेच्युटी पाने के लिए लागू होता है. तो फिर यदि कोई भी कर्मचारी 5 साल से पहले नौकरी छोड़ देता है, तो वह आम तौर पर ग्रेच्युटी का हकदार नहीं हो सकता है.
4/7वैसे अधिकांश लोगों को लगता है कि ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल नौकरी करना जरूरी होता है, लेकिन यह बात हमेशा सही नहीं होती. क्योंकि कुछ खास टाइम में यह रूल लागू नहीं होता.तो यदि किसी कर्मचारी की सेवा के दौरान मृत्यु हो जाती है, तो उसके नॉमिनी को सेवा अवधि की परवाह किए बिना ग्रेच्युटी का भुगतान किया जा सकता है. इसी तरह, अगर कोई नौकरी करते हुए किसी दुर्घटना या गंभीर बीमारी के चलते स्थायी रूप से विकलांग हो जाए, तो उसे भी ग्रेच्युटी मिलने का पूरा अधिकार हो सकता है.
5/7'भुगतान ग्रेच्युटी अधिनियम, 1972' में '5 साल की लगातार सेवा' के बारे में क्लियर किया गया है. अगर किसी कर्मचारी ने लास्ट इयर में 240 दिन या उससे अधिक काम किया है, तो उसे उस साल के लिए 'पूरे साल' माना जाएगा.यानी कि उदाहरण के लिए, यदि किसी कर्मचारी ने 4 साल और 240 दिन तक पूरा काम कर लिया है, तो उसे ग्रेच्युटी की गणना के लिए 5 साल की सेवा पूरी करने वाला माना जाएगा.
6/7अगर आप जानना चाहते हैं कि नौकरी छोड़ने पर आपको कितनी ग्रेच्युटी मिलेगी, तो इसका आसान फॉर्मूला है: (लास्ट सैलरी × 15 / 26) × सेवा के साल. लास्ट सैलरी में आपकी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ता (DA) शामिल होता है. ग्रेच्युटी अधिनियम के अनुसार महीने के 26 कार्य दिवस मानकर 15 दिन की सैलरी के आधार पर कैलकुलेशन होता है. उदाहरण के लिए, अगर आपकी लास्ट सैलरी ₹35,000 है और आपने 7 साल काम किया है, तो आपको ₹1,41,346 मिल सकते हैं. इसमें अधिकतम ₹20 लाख तक ग्रेच्युटी टैक्स फ्री मिल सकती है.
7/7ग्रेच्युटी पर टैक्स से जुड़ा नियम कर्मचारी के प्रकार पर डिपेंड करता है और इसे जानना हर नौकरीपेशा इंसान के लिए जरूरी है. तो यदि आप सरकारी कर्मचारी हैं, तो आपको मिलने वाली पूरी ग्रेच्युटी राशि टैक्स फ्री होती है,और निजी क्षेत्र में काम करने वाले कर्मचारियों के लिए ₹20 लाख तक की ग्रेच्युटी राशि पर कोई टैक्स नहीं लगता.(नोट-खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है,ग्रेच्युटी की अधिक जानकारी के लिए किसी जानकार से सलाह लें)