नौकरी लगने पर हर महीने सैलरी (Salary) तो मिलती ही है, और भी कई तरह फायदे के हकदार हो जाते हैं. इनमें EPF, इंश्योरेंस, मेडिक्लेम और ग्रेच्युटी (Gratuity) शामिल हैं. सबके अपने-अपने फायदे हैं. इनसे जुड़े नियम-कानून भी अलग-अलग हैं. अगर आप नौकरी करते हैं या जल्द ज्वाइन करने वाले हैं तो आपके लिए इन फायदों के बारे में जानना जरूरी है. यहां हम ग्रेच्युटी के बारे में बता रहे हैं. ग्रेच्युटी से जुड़ी काम की हर बात समझ सकते हैं.
1/8आपकी कंपनी रिटायरमेंट के वक्त आपको ग्रेच्युटी के रूप में अच्छी रकम (Gratuity payment) देती है. नौकरी छोड़ने पर भी यह रकम कंपनी आपको देती है. इसके लिए शर्त यह है कि कंपनी में आपकी नौकरी 5 साल से कम नहीं होनी चाहिए. सरकारी कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी (Central government employees gratuity) का लाभ मिलता है. यह लंबे समय तक नौकरी करने का इनाम है. अगर आपने 20 साल से ज्यादा नौकरी एक ही कंपनी में की है तो फिर आपको रिटायरमेंट पर ग्रेच्युटी (Retirement gratuity) के रूप में अच्छी रकम मिलती है.
2/8अगर किसी निजी या सरकारी कंपनी में 10 या ज्यादा लोग काम करते हैं तो फिर कंपनी के लिए सभी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी (Gratuity benefits) का लाभ देना जरूरी है. कंपनी के अलावा इस नियम के दायरे में दुकानें, खान, फैक्ट्री आती हैं. सरकार ने यह नियम इसलिए बनाया है ताकि सालों की नौकरी के बाद कर्मचारी को रिटायरमेंट के समय अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने के लिए अच्छी रकम मिल जाए.
3/8नौकरी के दौरान अगर किसी कर्मचारी की मौत हो जाती है तो उसके ग्रेच्युटी खाते में जमा पूरी रकम उसके नॉमनी (Gratuity nominee) को दे दी जाती है. ऐसे मामले में कम से कम 5 साल नौकरी की शर्त लागू नहीं होती है.
4/8ग्रेच्युटी एक्ट 1972 (Gratuity payment act 1972) में लागू हुआ था. कर्मचारियों को रिटायरमेंट पर अच्छी एकमुश्त रकम देने के लिए इसकी शुरुआत की गई थी. यह नौकरी से जुड़े लाभ का अहम हिस्सा है. लेकिन लोग खासकर निजी क्षेत्र के कर्मचारी इसे ज्यादा तवज्जो नहीं देते. इसकी वजह यह है कि वे जल्दी-जल्दी नौकरी बदलते हैं.
5/8ग्रेच्युटी की रकम तय करने के लिए एक फार्मूला (Gratuity calculation formula) है. ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के मुताबिक, नौकरी के हर साल के लिए 15 दिन की सैलरी ग्रेच्युटी के लिए बनती है. यह फार्मूला है : सैलरी*नौकरी के साल*15/6. यहां सैलरी का मतलब बेसिक सैलरी और DA (Dearness allowance) से है. 15 का मतलब सैलरी के लिए हर महीने के दिन से है. 26 का मतलब हर महीने के कामकाजी दिन से है.
6/8प्राइवेट सेक्टर के कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी (Gratuity increased upto 20 lakh rupees) के लिए रकम की सीमा बढ़ाकर 20 लाख रुपए कर दी गई है. इस पैसे पर उन्हें टैक्स नहीं देना होगा. सरकारी कर्मचारियों को ग्रेच्युटी के तहत मिलने वाली रकम पहले से टैक्स-फ्री है.
7/8आपने किसी कंपनी में कितने साल नौकरी की है, यह तय करने का भी एक फार्मूला है. इसे उदाहरण से समझ सकते हैं. मान लीजिए किसी कर्मचारी ने किसी कंपनी में 6 साल 9 महीने काम किया है तो ग्रेच्युटी (Gratuity eligibility and rules) के लिए नौकरी की अवधि 7 साल मानी जाएगी. इसी तरह किसी कर्मचारी ने 5 साल 4 महीने नौकरी की है तो उसकी नौकरी की अवधि 5 साल मानी जाएगी.
8/8क्या ग्रेच्युटी की रकम (Gratuity meaning) आपकी सैलरी से हर महीने काटी जाती है? कुछ कंपनियां ग्रेच्युटी की रकम अपने पास से कर्मचारी के खाते में जमा करती हैं, जबकि कुछ कंपनियां यह पैसा कर्मचारी की मासिक सैलरी से काट लेती हैं.