Gratuity 5 Big Rule: आपको बता दें कि नए लेबर कोड के बाद अब 1 साल की नौकरी पर भी ग्रेच्युटी मिल सकती है, लेकिन ऑफिस में गलती, अनुशासनहीनता, हिंसा या फ्रॉड किया तो एक रुपया भी नहीं मिलेगा,तो जानिए कैसे बचाएं अपनी ग्रेच्युटी और किन नियमों से बदल गया पूरा सिस्टम.
1/11क्या आप जानते हैं कि ऑफिस में छोटी-सी गलती भी आपकी जेब पर भारी पड़ सकती है.असल में कई लोग सालों तक नौकरी करते हैं और रिटायरमेंट के समय केवल एक ही उम्मीद रहती है कि ग्रेच्युटी का पैसा हाथ में आए, ताकि फ्यूचर के लिए कुछ फाइनेंशियल सेफ्टी मिल सके. लेकिन सोचिए, अगर आप सालों नौकरी करने के बाद भी एक रुपया भी ग्रेच्युटी न पा सकें, तो कैसा लगेगा? ऐसा अब हो सकता है, क्योंकि सरकार द्वारा लाए गए नए लेबर कोड के प्रावधानों ने जहां ग्रेच्युटी पाने का रास्ता आसान किया है, वहीं कुछ गलतियों पर इसे रोकने के भी कड़े नियम बना दिए गए हैं.
2/11पहले कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए कम से कम 5 साल की लगातार नौकरी करनी होती थी.जिस कारण से लाखों लोगों को नौकरी बदलने या फिक्स्ड कॉन्ट्रैक्ट पर काम करने के कारण यह लाभ नहीं मिल पाता था, लेकिन नए रूल्स के अनुसार अब 1 साल की सेवा पूरी करने पर भी ग्रेच्युटी मिलेगी. इसका फायदा स्पेशलिर फिक्स्ड-टर्म और कॉन्ट्रैक्ट आधारित कर्मचारियों को मिलने वाला है, जिन्हें पहले तक कोई स्थायी सुरक्षा नहीं मिलती थी.
3/11आपको बता दें कि नया रूल केवल राहत नहीं, एक चेतावनी भी है.असल में सरकार ने साफ कर दिया है कि कर्मचारी अगर कंपनी के नियमों और आचार संहिता का पालन नहीं करता, तो ग्रेच्युटी का हक छिन सकता है. यानी कि एक छोटी-सी गलती, ऑफिस में अनुशासनहीनता, बुरा व्यवहार या कोई गलत कदम आपकी मेहनत की कमाई पर पानी फेर सकता है.
4/11कई मामलों में देखा गया है कि कर्मचारी तनाव, गुस्से या पर्सनल कारणों के चलते ऑफिस में ही हिंसा कर बैठते हैं या सहकर्मियों से बदसलूकी कर देते हैं.लेकिन अब ऐसा क्या तो इसको ग्रेच्युटी के पैसा से हाथ धोना पड़ सकता है.
5/11अगर किसी कर्मचारी पर ऑफिस में हिंसा, यौन उत्पीड़न, दुर्व्यवहार या गलत आचरण के आरोप साबित हो जाते हैं, तो कंपनी को पूरा अधिकार है कि वह उसके ग्रेच्युटी के पैसे को पूरी तरह जब्त कर दे या आंशिक रूप से रोक दे. यह कदम कंपनी की गरिमा, सुरक्षा और महिलाओं की कार्यस्थल पर सुरक्षा को मजबूत बनाने के लिए लागू किया गया है.
6/11इसके साथ ही अगर कर्मचारी की किसी गलती से कंपनी को फाइनेंशियल नुकसान होता है, जैसे गलत डिसीजन, जानबूझकर की गई कार्रवाई या लापरवाही के कारण कंपनी को बड़ा फाइनेंशियल लॉस झेलना पड़े, तो कंपनी उस नुकसान की भरपाई सीधे उसकी ग्रेच्युटी से कर सकती है.
7/11सबसे गंभीर स्थिति रिश्वत और फ्रॉड से जुड़ी है.जी हां अगर कोई कर्मचारी रिश्वत लेते हुए, धोखाधड़ी करते हुए या कंपनी के नाम पर फ्रॉड करते हुए पकड़ा जाता है, तो उसे ग्रेच्युटी का अधिकार नहीं माना जाएगा. कंपनी ऐसे मामलों में बिना किसी हिचक के पूरी राशि रोक सकती है.
8/11आपको बता दें कि ध्यान देने वाली बात ये भी है कि ग्रेच्युटी हर कंपनी में लागू नहीं होती है. ग्रेच्युटी भुगतान अधिनियम केवल उन संस्थानों पर लागू होता है, जहां कम से कम 10 कर्मचारी काम करते हैं.तो अगर आपकी कंपनी में कर्मचारियों की संख्या इससे कम है, तो आप कानूनी रूप से इस लाभ का दावा नहीं कर सकते.
9/11ग्रेच्युटी एक कानूनी लाभ है, जो कर्मचारी को उसकी लंबी सेवा, वफादारी और निरंतर योगदान के सम्मान में दिया जाता है. इसकी राशि की गणना कर्मचारी की अंतिम बेसिक सैलरी और डीए के आधार पर की जाती है. सरकार ने इसकी अधिकतम सीमा ₹20 लाख तय की है, हालांकि समय-समय पर इसे बढ़ाने की समीक्षा की जाती है.
10/11ग्रेच्युटी पाने के लिए कुछ रूल्स को फॉलो करें.जैसे कि कंपनी के सभी नियमों का पालन करें,फिस में किसी भी प्रकार की अनुशासनहीनता से बचें,ईमानदारी और पारदर्शिता के साथ काम करें,कंपनी को नुकसान पहुँचाने वाली गतिविधियों से दूर रहें. वैसे नई व्यवस्था में ग्रेच्युटी जल्दी मिल सकती है, लेकिन कंपनी के नियम तोड़ने पर एक रुपया भी हाथ में नहीं आएगा.
11/11सरकार के नए लेबर कोड में बदलाव के बाद अब कर्मचारियों को कुछ मामलों में केवल 1 साल की सेवा के बाद भी ग्रेच्युटी मिल सकती है. लेकिन रूल्स को तोड़ने, ऑफिस में हिंसा, यौन उत्पीड़न, अनुशासनहीनता, रिश्वत या फ्रॉड जैसे मामलों में कंपनी को पूरी राशि जब्त करने का अधिकार है.फिलहाल ग्रेच्युटी की अधिकतम सीमा ₹20 लाख है और इसका कैलकुलेशन बेसिक वेतन और डीए के आधार पर की जाती है.(नोट: खबर सामान्य जानकारी पर आधारित है, अधिक जानकारी के लिए किसी जानकारी से परामर्श लें, या ऑफिस से संपर्क करें.)