दिवाली का त्योहार आने वाला है. नौकरीपेशा को इस त्योहार का बेसब्री से इंतजार होता है क्योंकि इस मौके पर ज्यादातर कंपनियों में कर्मचारी को उनकी मेहनत और वफादारी के लिए बोनस और गिफ्ट वगैरह दिया जाता है. लेकिन, क्या आपने कभी सोचा है कि कंपनी से मिलने वाले इन दिवाली गिफ्ट्स या बोनस पर भी सरकार टैक्स लेती है? ये एक ऐसा सवाल है जिस पर अक्सर लोग ध्यान नहीं देते, लेकिन इसकी जानकारी होना बहुत जरूरी है. आइए बताते हैं कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट्स और बोनस को लेकर क्या हैं इनकम टैक्स के नियम.
1/5जब भी कंपनी आपको कैश बोनस देती है, वो आपकी सैलरी इनकम का हिस्सा बन जाता है. इस पर कोई छूट नहीं होती. बोनस के रूप में मिली रकम को रेगुलर इनकम के तौर पर देखा जाता है. बोनस की पूरी रकम आपकी कुल वार्षिक आय में जोड़ी जाती है और आपके इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स लगता है.
2/5Income Tax Act के हिसाब से कंपनी से मिलने वाले गिफ्ट्स, गिफ्ट वाउचर, गिफ्ट हैम्पर, मोबाइल, लैपटॉप या अन्य कीमती सामान देती है तो वो एक लिमिट तक टैक्स फ्री होते हैं. अगर उस लिमिट से ज्यादा कीमत के हैं तो वो भी टैक्स के दायरे में आते हैं.
3/5अगर एम्प्लॉयर से मिले नॉन-कैश गिफ्ट की कुल कीमत ₹5,000 से ज़्यादा है, तो गिफ्ट की पूरी कीमत अनुलाभ (Perquisite) के तौर पर टैक्स योग्य हो जाती है. हालांकि ₹5,000 से कम कीमत के गिफ्ट पर कोई टैक्स नहीं लगता.
4/5कंपनियां कर्मचारियों को मिलने वाले टैक्सेबल परक्यूज़िट्स (जैसे ₹5,000 से ज़्यादा के गिफ्ट) के लिए भी TDS काटती हैं. कुछ कंपनियां गिफ्ट पर लगने वाले टैक्स को कर्मचारी की सैलरी से ही एडजस्ट कर लेती हैं, या फिर वे फॉर्म 16 में इसकी जानकारी देती हैं ताकि कर्मचारी खुद आईटीआर भरते समय इस पर टैक्स का भुगतान कर सकें.
5/5कर्मचारियों के लिए अपनी टैक्स देनदारी को सही से समझना और उसके हिसाब से प्लानिंग करना बहुत ज़रूरी है. इसके लिए अपनी सैलरी स्लिप और फॉर्म 16 को ध्यान से देखें. इसमें बोनस और टैक्सेबल परक्यूज़िट्स की जानकारी दी गई होगी. अगर आपको उम्मीद है कि आपको बड़ा बोनस या महंगे गिफ्ट मिलेंगे, तो अपनी टैक्स प्लानिंग में इसे शामिल करें ताकि आपकी कुल टैक्सेबल आय कम हो सके. कंपनी की HR या फाइनेंस टीम से दिवाली के लाभों पर टैक्स के नियमों के बारे में पूछने में संकोच न करें.